बिहार की पहली कार्यवाहक महिला DGP की कहानी:2005 में वैशाली की SP बनीं, कैसे किडनी कांड से चर्चा में आईं थीं प्रीता वर्मा

बिहार की पहली कार्यवाहक महिला DGP की कहानी:2005 में वैशाली की SP बनीं, कैसे किडनी कांड से चर्चा में आईं थीं प्रीता वर्मा

बिहार पुलिस की कमान इन दिनों एक ऐसी वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी के हाथ में है, जिन्होंने अपने करीब 34 साल के पुलिस करियर में फील्ड से लेकर पुलिस मुख्यालय तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। 1991 बैच की IPS अधिकारी प्रीता वर्मा को DGP विनय कुमार के 15 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक छुट्टी पर रहने के दौरान बिहार DGP का अतिरिक्त प्रभार मिला है। वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारी DG-कमांडर इन चीफ, होम गार्ड और फायर सर्विस के साथ यह अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं। उनके DGP का अतिरिक्त प्रभार संभालते ही उनके लंबे पुलिस करियर का एक पुराना अध्याय फिर चर्चा में आ गया है। यह 2005 का महनार किडनी कांड है। उस समय प्रीता वर्मा वैशाली की SP थीं। महनार में एक रिक्शा चालक के ऑपरेशन के बाद PMCH में जांच के दौरान उसकी दोनों किडनियां नहीं मिलने का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले में निजी क्लिनिक के डॉक्टर और उनके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी हुई थी। इस दौरान प्रीता वर्मा ने एसपी होने के नाते इस केस में काफी एक्टिवनेस दिखाई थी। वो ये मामला उस समय के सीएम नीतीश कुमार के पास तक ले गईं थीं। इसके बाद उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए भेजा था। 2005 में महनार से सामने आया था मामला दिसंबर 2005 में वैशाली के महनार में एक रिक्शा चालक पेट में तेज दर्द की शिकायत लेकर निजी क्लिनिक पहुंचा था। हालिया रिपोर्टों में डॉक्टर आरके गुप्ता की क्लिनिक का उल्लेख है। उसे अपेंडिसाइटिस की समस्या बताकर ऑपरेशन किए जाने की बात सामने आई थी। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। पेशाब नहीं होने और तबीयत लगातार खराब रहने के बाद उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी PMCH लाया गया था। PMCH में जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि उसकी दोनों किडनियां मौजूद नहीं थीं। उसे यूरोलॉजी विभाग में भर्ती कर डायलिसिस पर रखा गया था। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई थी, लेकिन गरीब परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति थी। मामला सामने आने के बाद बिहार में हड़कंप मच गया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों स्तर पर जांच की बात सामने आई थी। 20 दिनों तक पीड़ित ने अपनी जान के लिए संघर्ष किया था इस घटना के समय प्रीता वर्मा वैशाली की पुलिस अधीक्षक थीं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पीड़ित की पत्नी की शिकायत के आधार पर डॉक्टर आरके गुप्ता और उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने अदालत में कार्रवाई के लिए आवेदन किया और आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने की रिपोर्ट सामने आई थी। डॉक्टर के फरार होने की भी बात रिपोर्टों में कही गई थी। करीब 20 दिनों तक इलाज चलने के बाद रिक्शा चालक की मौत हो गई। इस घटना ने बिहार में अवैध अंग निकासी और निजी चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के आदेश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मामले में पुलिस अधिकारियों से जांच की जानकारी लेकर कार्रवाई और ट्रायल की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए थे। 21 साल बाद फिर चर्चा में क्यों? 2026 में प्रीता वर्मा के बिहार DGP का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद 2005 का यह मामला फिर से चर्चा में आया है। वजह यह है कि जिस समय यह घटना हुई थी, तब वह वैशाली जिले की पुलिस अधीक्षक थीं और आज वह राज्य पुलिस के टॉप पोस्ट का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं। हालांकि, 2005 की घटना और 2026 की उनकी जिम्मेदारी के बीच 21 साल का अंतर है। इस दौरान प्रीता वर्मा ने पुलिस विभाग में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया। राजस्थान मूल की हैं, 1992 में IPS जॉइन किया भारत सरकार की IPS सिविल लिस्ट में प्रीता वर्मा का नाम 1991 बैच की बिहार कैडर IPS अधिकारी के रूप में दर्ज है। रिकॉर्ड में उनका होम स्टेट राजस्थान और शैक्षणिक योग्यता B.A. दर्ज है। उन्होंने 11 अक्टूबर 1992 को IPS के रूप में सेवा जॉइन की थी। उनका जन्म 1 जुलाई 1968 दर्ज है। यानी पुलिस सेवा में उन्हें तीन दशक से अधिक समय हो चुका है। लंबे करियर में उन्होंने फील्ड पोस्टिंग के साथ-साथ CID, SCRB, मॉर्डनाइजेशन, ट्रेनिंग और पुलिस भवन निर्माण जैसे विभागों में वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभाली हैं। प्रीता वर्मा के करियर में शुरुआती महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग में वैशाली की SP की जिम्मेदारी शामिल रही। 2005 के किडनी कांड के समय भी वह इसी पद पर थीं। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस के विभिन्न विंग में काम किया। 2015 में वह बिहार मिलिट्री पुलिस की IG थीं और उन्हें IG, CID-वीकर सेक्शन के साथ राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। इसके बाद वो कई सालों तक पुलिस के बड़े पदों में वह पुलिस मुख्यालय की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ी रहीं। 2017 में ADG मॉर्डनाइजेशन रहते हुए उन्हें वायरलेस और टेक्निकल सर्विसेज और SCRB का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। इस तरह उनके करियर में फील्ड पुलिसिंग के साथ-साथ अपराध अनुसंधान, कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों, पुलिस मॉर्डनाइजेशन और तकनीकी व्यवस्था जैसे क्षेत्र भी शामिल रहे। 2023 में DG Training बनीं, राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला जनवरी 2023 में प्रीता वर्मा को DG (ट्रेनिंग), बिहार बनाया गया। भारत सरकार की IPS सिविल लिस्ट में उन्हें इस पद पर दर्ज किया गया है। उसी सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम के साथ 2009 का पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस भी दर्ज है। उस समय वह IG, CID के पद पर थीं। इसके बाद 2023 में उन्हें प्रेसिडेंट पुलिस मेडल फॉर डिस्टिंग्विश सर्विस मिला। सरकारी IPS सिविल लिस्ट में यह सम्मान दर्ज है। जनवरी 2026 में हुए बड़े IPS फेरबदल में प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का DG-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक बनाया गया था। इसके कुछ महीनों बाद जुलाई 2026 में उनका तबादला DG, को-कमांडर इन चीफ, गृह रक्षा वाहिनी और अग्निशमन सेवाएं के पद पर किया गया। बिहार अग्निशमन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी वर्तमान में प्रीता वर्मा को DG-सह-कमांडेंट जनरल, होम गार्ड और बिहार फायर सर्विस के रूप में दर्ज किया गया है। यानी DGP का अतिरिक्त प्रभार मिलने से पहले वह पहले से ही राज्य सरकार के एक बड़े सुरक्षा और आपदा-प्रतिक्रिया विभाग की DG थीं। परिवार में भी प्रशासनिक सेवा से जुड़ा नाम प्रीता वर्मा के पारिवारिक संबंध की बात करें तो हालिया रिपोर्टों में उन्हें झारखंड की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की बहन बताया गया है। दोनों का संबंध राजस्थान से बताया गया है। राजबाला वर्मा झारखंड में मुख्य सचिव जैसे प्रशासनिक पद पर रह चुकी हैं। इस तरह प्रीता वर्मा और राजबाला वर्मा दोनों बहनों का नाम अलग-अलग समय में वरिष्ठ प्रशासनिक/पुलिस जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। DGP का अतिरिक्त प्रभार संभालते ही चार प्राथमिकताएं 15 सितंबर से DGP विनय कुमार के 21 दिन के अवकाश पर जाने के बाद प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस के DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वह 5 अक्टूबर तक इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को संभालेंगी। प्रभार संभालने के बाद पुलिस मुख्यालय में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक उनकी शुरुआती प्राथमिकताओं में सूखे नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई, महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, गया के पितृपक्ष मेले की सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों की निगरानी शामिल हैं। जिलों के पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील मामलों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। यह जिम्मेदारी फिलहाल अतिरिक्त प्रभार की है। नियमित DGP की नियुक्ति अलग प्रक्रिया के तहत होगी। साल 2028 में रिटार्यमेंट, 12 लाख से ज्यादा की हैं मालकिन बता दें कि 2 साल बाद 2028 में प्रीता वर्मा रिटायर्ड हो जाएंगी। प्रीता वर्मा ने साल 2025 के लिए अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण घोषित किया है। घोषणा के अनुसार उनके पास ₹35 हजार कैश और बैंक/वित्तीय संस्थानों में करीब ₹12.08 लाख कैश जमा हैं। उनके पास करीब 60 तोला सोने के गहने, जिनकी अनुमानित कीमत ₹35 लाख, करीब 3 किलो चांदी के जेवरात और अन्य सामान मौजूद हैं। इसकी कीमत करीब ₹1.80 लाख बताई गई है। LIC की कई पॉलिसियां और एक SBI फिक्स्ड डिपॉजिट भी दर्ज है। घोषणा में अचल संपत्ति, मकान/अपार्टमेंट और जमीन के कॉलम में कोई राशि दर्ज नहीं है। आयकर के रूप में ₹9,32,788 की राशि दर्ज है। बिहार पुलिस की कमान इन दिनों एक ऐसी वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी के हाथ में है, जिन्होंने अपने करीब 34 साल के पुलिस करियर में फील्ड से लेकर पुलिस मुख्यालय तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। 1991 बैच की IPS अधिकारी प्रीता वर्मा को DGP विनय कुमार के 15 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक छुट्टी पर रहने के दौरान बिहार DGP का अतिरिक्त प्रभार मिला है। वह अपनी मौजूदा जिम्मेदारी DG-कमांडर इन चीफ, होम गार्ड और फायर सर्विस के साथ यह अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं। उनके DGP का अतिरिक्त प्रभार संभालते ही उनके लंबे पुलिस करियर का एक पुराना अध्याय फिर चर्चा में आ गया है। यह 2005 का महनार किडनी कांड है। उस समय प्रीता वर्मा वैशाली की SP थीं। महनार में एक रिक्शा चालक के ऑपरेशन के बाद PMCH में जांच के दौरान उसकी दोनों किडनियां नहीं मिलने का मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले में निजी क्लिनिक के डॉक्टर और उनके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी हुई थी। इस दौरान प्रीता वर्मा ने एसपी होने के नाते इस केस में काफी एक्टिवनेस दिखाई थी। वो ये मामला उस समय के सीएम नीतीश कुमार के पास तक ले गईं थीं। इसके बाद उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए भेजा था। 2005 में महनार से सामने आया था मामला दिसंबर 2005 में वैशाली के महनार में एक रिक्शा चालक पेट में तेज दर्द की शिकायत लेकर निजी क्लिनिक पहुंचा था। हालिया रिपोर्टों में डॉक्टर आरके गुप्ता की क्लिनिक का उल्लेख है। उसे अपेंडिसाइटिस की समस्या बताकर ऑपरेशन किए जाने की बात सामने आई थी। ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी थी। पेशाब नहीं होने और तबीयत लगातार खराब रहने के बाद उसे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी PMCH लाया गया था। PMCH में जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि उसकी दोनों किडनियां मौजूद नहीं थीं। उसे यूरोलॉजी विभाग में भर्ती कर डायलिसिस पर रखा गया था। डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई थी, लेकिन गरीब परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल स्थिति थी। मामला सामने आने के बाद बिहार में हड़कंप मच गया। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों स्तर पर जांच की बात सामने आई थी। 20 दिनों तक पीड़ित ने अपनी जान के लिए संघर्ष किया था इस घटना के समय प्रीता वर्मा वैशाली की पुलिस अधीक्षक थीं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पीड़ित की पत्नी की शिकायत के आधार पर डॉक्टर आरके गुप्ता और उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने अदालत में कार्रवाई के लिए आवेदन किया और आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने की रिपोर्ट सामने आई थी। डॉक्टर के फरार होने की भी बात रिपोर्टों में कही गई थी। करीब 20 दिनों तक इलाज चलने के बाद रिक्शा चालक की मौत हो गई। इस घटना ने बिहार में अवैध अंग निकासी और निजी चिकित्सा व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के आदेश दिए जाने की बात भी सामने आई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मामले में पुलिस अधिकारियों से जांच की जानकारी लेकर कार्रवाई और ट्रायल की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए थे। 21 साल बाद फिर चर्चा में क्यों? 2026 में प्रीता वर्मा के बिहार DGP का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद 2005 का यह मामला फिर से चर्चा में आया है। वजह यह है कि जिस समय यह घटना हुई थी, तब वह वैशाली जिले की पुलिस अधीक्षक थीं और आज वह राज्य पुलिस के टॉप पोस्ट का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं। हालांकि, 2005 की घटना और 2026 की उनकी जिम्मेदारी के बीच 21 साल का अंतर है। इस दौरान प्रीता वर्मा ने पुलिस विभाग में कई वरिष्ठ पदों पर काम किया। राजस्थान मूल की हैं, 1992 में IPS जॉइन किया भारत सरकार की IPS सिविल लिस्ट में प्रीता वर्मा का नाम 1991 बैच की बिहार कैडर IPS अधिकारी के रूप में दर्ज है। रिकॉर्ड में उनका होम स्टेट राजस्थान और शैक्षणिक योग्यता B.A. दर्ज है। उन्होंने 11 अक्टूबर 1992 को IPS के रूप में सेवा जॉइन की थी। उनका जन्म 1 जुलाई 1968 दर्ज है। यानी पुलिस सेवा में उन्हें तीन दशक से अधिक समय हो चुका है। लंबे करियर में उन्होंने फील्ड पोस्टिंग के साथ-साथ CID, SCRB, मॉर्डनाइजेशन, ट्रेनिंग और पुलिस भवन निर्माण जैसे विभागों में वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभाली हैं। प्रीता वर्मा के करियर में शुरुआती महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग में वैशाली की SP की जिम्मेदारी शामिल रही। 2005 के किडनी कांड के समय भी वह इसी पद पर थीं। इसके बाद उन्होंने बिहार पुलिस के विभिन्न विंग में काम किया। 2015 में वह बिहार मिलिट्री पुलिस की IG थीं और उन्हें IG, CID-वीकर सेक्शन के साथ राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। इसके बाद वो कई सालों तक पुलिस के बड़े पदों में वह पुलिस मुख्यालय की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से जुड़ी रहीं। 2017 में ADG मॉर्डनाइजेशन रहते हुए उन्हें वायरलेस और टेक्निकल सर्विसेज और SCRB का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था। इस तरह उनके करियर में फील्ड पुलिसिंग के साथ-साथ अपराध अनुसंधान, कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों, पुलिस मॉर्डनाइजेशन और तकनीकी व्यवस्था जैसे क्षेत्र भी शामिल रहे। 2023 में DG Training बनीं, राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला जनवरी 2023 में प्रीता वर्मा को DG (ट्रेनिंग), बिहार बनाया गया। भारत सरकार की IPS सिविल लिस्ट में उन्हें इस पद पर दर्ज किया गया है। उसी सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम के साथ 2009 का पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस भी दर्ज है। उस समय वह IG, CID के पद पर थीं। इसके बाद 2023 में उन्हें प्रेसिडेंट पुलिस मेडल फॉर डिस्टिंग्विश सर्विस मिला। सरकारी IPS सिविल लिस्ट में यह सम्मान दर्ज है। जनवरी 2026 में हुए बड़े IPS फेरबदल में प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम का DG-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक बनाया गया था। इसके कुछ महीनों बाद जुलाई 2026 में उनका तबादला DG, को-कमांडर इन चीफ, गृह रक्षा वाहिनी और अग्निशमन सेवाएं के पद पर किया गया। बिहार अग्निशमन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी वर्तमान में प्रीता वर्मा को DG-सह-कमांडेंट जनरल, होम गार्ड और बिहार फायर सर्विस के रूप में दर्ज किया गया है। यानी DGP का अतिरिक्त प्रभार मिलने से पहले वह पहले से ही राज्य सरकार के एक बड़े सुरक्षा और आपदा-प्रतिक्रिया विभाग की DG थीं। परिवार में भी प्रशासनिक सेवा से जुड़ा नाम प्रीता वर्मा के पारिवारिक संबंध की बात करें तो हालिया रिपोर्टों में उन्हें झारखंड की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की बहन बताया गया है। दोनों का संबंध राजस्थान से बताया गया है। राजबाला वर्मा झारखंड में मुख्य सचिव जैसे प्रशासनिक पद पर रह चुकी हैं। इस तरह प्रीता वर्मा और राजबाला वर्मा दोनों बहनों का नाम अलग-अलग समय में वरिष्ठ प्रशासनिक/पुलिस जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। DGP का अतिरिक्त प्रभार संभालते ही चार प्राथमिकताएं 15 सितंबर से DGP विनय कुमार के 21 दिन के अवकाश पर जाने के बाद प्रीता वर्मा को बिहार पुलिस के DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वह 5 अक्टूबर तक इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को संभालेंगी। प्रभार संभालने के बाद पुलिस मुख्यालय में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक उनकी शुरुआती प्राथमिकताओं में सूखे नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई, महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा, गया के पितृपक्ष मेले की सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों की निगरानी शामिल हैं। जिलों के पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील मामलों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। यह जिम्मेदारी फिलहाल अतिरिक्त प्रभार की है। नियमित DGP की नियुक्ति अलग प्रक्रिया के तहत होगी। साल 2028 में रिटार्यमेंट, 12 लाख से ज्यादा की हैं मालकिन बता दें कि 2 साल बाद 2028 में प्रीता वर्मा रिटायर्ड हो जाएंगी। प्रीता वर्मा ने साल 2025 के लिए अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण घोषित किया है। घोषणा के अनुसार उनके पास ₹35 हजार कैश और बैंक/वित्तीय संस्थानों में करीब ₹12.08 लाख कैश जमा हैं। उनके पास करीब 60 तोला सोने के गहने, जिनकी अनुमानित कीमत ₹35 लाख, करीब 3 किलो चांदी के जेवरात और अन्य सामान मौजूद हैं। इसकी कीमत करीब ₹1.80 लाख बताई गई है। LIC की कई पॉलिसियां और एक SBI फिक्स्ड डिपॉजिट भी दर्ज है। घोषणा में अचल संपत्ति, मकान/अपार्टमेंट और जमीन के कॉलम में कोई राशि दर्ज नहीं है। आयकर के रूप में ₹9,32,788 की राशि दर्ज है।  

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