बिहारशरीफ में 13 दिवसीय संत महोत्सव का शुभारंभ:कलश शोभायात्रा में 1000 महिलाएं हुईं शामिल; 1 अक्टूबर तक कथा वाचन और प्रवचन का आयोजन

बिहारशरीफ में 13 दिवसीय संत महोत्सव का शुभारंभ:कलश शोभायात्रा में 1000 महिलाएं हुईं शामिल; 1 अक्टूबर तक कथा वाचन और प्रवचन का आयोजन

बिहारशरीफ स्थित राजा कुआं संत बाबा मंदिर परिसर से मंगलवार को 13 दिवसीय संत महोत्सव के अवसर पर भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। संत बाबा की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित इस वार्षिक अनुष्ठान के दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय संत बाबा’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। शोभायात्रा में 1000 से अधिक महिलाओं और कन्याओं ने सिर पर पवित्र कलश धारण कर लगभग 8 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। नियम-निष्ठा के साथ 8 किमी. का नगर भ्रमण कलश यात्रा का शुभारंभ राजा कुआं स्थित संत आश्रम से विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। आश्रम से निकली शोभायात्रा पतुआना, बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन, अंबेर मोड़, बारादरी और नई सराय होते हुए कल्याणपुर पहुंची। इसके बाद यात्रा राजा कुआं होते हुए संत आश्रम परिसर में समाप्त हुई। करीब आठ किलोमीटर लंबे इस मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। जगह-जगह स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कलश यात्रियों के स्वागत के लिए शीतल पेयजल, शर्बत और पुष्प वर्षा की व्यवस्था की गई थी। बाबा के प्रति जन-आस्था का प्रतीक: पूर्व एमएलसी राजू यादव ट्रस्ट के अध्यक्ष सह पूर्व विधान पार्षद राजू यादव ने कहा कि संत बाबा के प्रति लोगों का अगाध विश्वास है। यह भीड़ बुलाई हुई नहीं है, बल्कि बाबा के प्रति भक्तों की निस्वार्थ श्रद्धा का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि लोग स्वयं खिंचे चले आते हैं। 22 सितंबर को कलश यात्रा के साथ महोत्सव का आगाज हुआ है। इसके बाद 23 सितंबर से 1 अक्टूबर तक कथा वाचन और प्रवचन का आयोजन होगा। वहीं, 3 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक तीन दिवसीय भव्य अखंड कीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसके पश्चात विशाल भंडारे के साथ महोत्सव संपन्न होगा। श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा रहा नगर प्रशासन व जनप्रतिनिधि पार्षद संजय यादव ने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे वार्ड और क्षेत्रवासियोंका सामूहिक प्रयास है। बाबा के दरबार में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। वार्ड के नागरिकों ने मिलकर कलश यात्रियों के मार्ग, सुरक्षा और जलपान की व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। संत बाबा का इतिहास और क्षेत्र में उनकी महत्ता नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित राजा कुआं के संत बाबा का इतिहास स्थानीय जनमानस की आस्था और आध्यात्मिक चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि संत बाबा एक पहुंचे हुए सिद्ध तपस्वी और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और ईश्वरीय साधना को समर्पित कर दिया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कलश शोभायात्रा के संपन्न होने के साथ ही पूरा राजा कुआं क्षेत्र अब अगले 12 दिनों तक कथा, भजन और अखंड संकीर्तन के भक्ति रस में डूबा रहेगा। पुलिस-प्रशासन द्वारा भी महोत्सव के सफल और शांतिपूर्ण संचालन को लेकर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। प्रेम और सद्भाव का संदेश बिहारशरीफ स्थित राजा कुआं के संत बाबा का इतिहास स्थानीय जनमानस की आस्था और आध्यात्मिक चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि संत बाबा एक पहुंचे हुए सिद्ध तपस्वी और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और ईश्वरीय साधना को समर्पित कर दिया। माना जाता है कि राजा कुआं क्षेत्र में संत बाबा ने वर्षों तक मौन साधना और कठोर तपस्या की थी। उनके सानिध्य में आकर लोग मानसिक शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। समाज के दबे-कुचले और उपेक्षित वर्गों को गले लगाना और जाति-पाति के भेद से परे हटकर प्रेम और सद्भाव का संदेश देना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था। गंभीर बीमारियों से मुक्ति! क्षेत्र में लोकमान्यता है कि संत बाबा के आश्रम में सच्चे मन से लगाई गई अर्जी कभी निष्फल नहीं जाती। गंभीर बीमारियों से मुक्ति और पारिवारिक कष्टों के निवारण के लिए आज भी दूर-दराज से लोग उनकी समाधि और मंदिर में शीश नवाने आते हैं। संत बाबा के समाधिस्थ होने के बाद उनके भक्तों ने उनकी स्मृति और शिक्षाओं को जीवित रखने के लिए राजा कुआं में संत आश्रम एवं मंदिर की स्थापना की। तभी से हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर 13 दिवसीय विशाल संत महोत्सव का आयोजन एक परंपरा के रूप में निरंतर किया जा रहा है, जिसमें नालंदा समेत आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते हैं। बिहारशरीफ स्थित राजा कुआं संत बाबा मंदिर परिसर से मंगलवार को 13 दिवसीय संत महोत्सव के अवसर पर भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। संत बाबा की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित इस वार्षिक अनुष्ठान के दौरान पूरा क्षेत्र ‘जय संत बाबा’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। शोभायात्रा में 1000 से अधिक महिलाओं और कन्याओं ने सिर पर पवित्र कलश धारण कर लगभग 8 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। नियम-निष्ठा के साथ 8 किमी. का नगर भ्रमण कलश यात्रा का शुभारंभ राजा कुआं स्थित संत आश्रम से विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। आश्रम से निकली शोभायात्रा पतुआना, बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन, अंबेर मोड़, बारादरी और नई सराय होते हुए कल्याणपुर पहुंची। इसके बाद यात्रा राजा कुआं होते हुए संत आश्रम परिसर में समाप्त हुई। करीब आठ किलोमीटर लंबे इस मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। जगह-जगह स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कलश यात्रियों के स्वागत के लिए शीतल पेयजल, शर्बत और पुष्प वर्षा की व्यवस्था की गई थी। बाबा के प्रति जन-आस्था का प्रतीक: पूर्व एमएलसी राजू यादव ट्रस्ट के अध्यक्ष सह पूर्व विधान पार्षद राजू यादव ने कहा कि संत बाबा के प्रति लोगों का अगाध विश्वास है। यह भीड़ बुलाई हुई नहीं है, बल्कि बाबा के प्रति भक्तों की निस्वार्थ श्रद्धा का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि लोग स्वयं खिंचे चले आते हैं। 22 सितंबर को कलश यात्रा के साथ महोत्सव का आगाज हुआ है। इसके बाद 23 सितंबर से 1 अक्टूबर तक कथा वाचन और प्रवचन का आयोजन होगा। वहीं, 3 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक तीन दिवसीय भव्य अखंड कीर्तन का आयोजन किया जाएगा, जिसके पश्चात विशाल भंडारे के साथ महोत्सव संपन्न होगा। श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा रहा नगर प्रशासन व जनप्रतिनिधि पार्षद संजय यादव ने शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे वार्ड और क्षेत्रवासियोंका सामूहिक प्रयास है। बाबा के दरबार में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। वार्ड के नागरिकों ने मिलकर कलश यात्रियों के मार्ग, सुरक्षा और जलपान की व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े। संत बाबा का इतिहास और क्षेत्र में उनकी महत्ता नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित राजा कुआं के संत बाबा का इतिहास स्थानीय जनमानस की आस्था और आध्यात्मिक चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि संत बाबा एक पहुंचे हुए सिद्ध तपस्वी और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और ईश्वरीय साधना को समर्पित कर दिया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कलश शोभायात्रा के संपन्न होने के साथ ही पूरा राजा कुआं क्षेत्र अब अगले 12 दिनों तक कथा, भजन और अखंड संकीर्तन के भक्ति रस में डूबा रहेगा। पुलिस-प्रशासन द्वारा भी महोत्सव के सफल और शांतिपूर्ण संचालन को लेकर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। प्रेम और सद्भाव का संदेश बिहारशरीफ स्थित राजा कुआं के संत बाबा का इतिहास स्थानीय जनमानस की आस्था और आध्यात्मिक चेतना से गहराई से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि संत बाबा एक पहुंचे हुए सिद्ध तपस्वी और समाज सुधारक थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और ईश्वरीय साधना को समर्पित कर दिया। माना जाता है कि राजा कुआं क्षेत्र में संत बाबा ने वर्षों तक मौन साधना और कठोर तपस्या की थी। उनके सानिध्य में आकर लोग मानसिक शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। समाज के दबे-कुचले और उपेक्षित वर्गों को गले लगाना और जाति-पाति के भेद से परे हटकर प्रेम और सद्भाव का संदेश देना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था। गंभीर बीमारियों से मुक्ति! क्षेत्र में लोकमान्यता है कि संत बाबा के आश्रम में सच्चे मन से लगाई गई अर्जी कभी निष्फल नहीं जाती। गंभीर बीमारियों से मुक्ति और पारिवारिक कष्टों के निवारण के लिए आज भी दूर-दराज से लोग उनकी समाधि और मंदिर में शीश नवाने आते हैं। संत बाबा के समाधिस्थ होने के बाद उनके भक्तों ने उनकी स्मृति और शिक्षाओं को जीवित रखने के लिए राजा कुआं में संत आश्रम एवं मंदिर की स्थापना की। तभी से हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर 13 दिवसीय विशाल संत महोत्सव का आयोजन एक परंपरा के रूप में निरंतर किया जा रहा है, जिसमें नालंदा समेत आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते हैं।  

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