सर्वे में 16 रास्ते चिह्नित; 3 चेक पोस्ट लगाए, 1 नया बनाया ग्वालियर के बिलौआ क्षेत्र में अवैध खनन-परिवहन रोकने की व्यवस्था को लेकर कलेक्टर रुचिका चौहान ने हाई कोर्ट में दावा किया कि चेक पोस्ट की नई व्यवस्था के बाद खनन क्षेत्र से बिना जांच खनिज बाहर निकालने की संभावना नहीं है। इसी रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि क्रेशरों पर लगे धर्मकांटों का डेटा राज्य सरकार के MPSEDC e-TP सिस्टम से सीधे और रियल टाइम में नहीं जुड़ा है। यानी क्रेशर पर कितना खनिज तौला गया, उसकी जानकारी सरकारी सिस्टम तक अपने आप नहीं पहुंचती। दरअसल, बिलौआ क्षेत्र में अवैध खनन-परिवहन और खदान संचालकों से करोड़ों रुपए की वसूली नहीं होने के आरोप को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इसी मामले में कोर्ट ने कलेक्टर से निगरानी व्यवस्था का जवाब मांगा था। 11 अगस्त के आदेश के पालन में पेश रिपोर्ट के मुताबिक पूरे खनन क्षेत्र की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई और 16 वैकल्पिक रास्ते चिह्नित किए गए। तीन पुराने चेक पोस्ट की जगह बदली गई, जबकि एक नया चेक पोस्ट लगाया गया। इसके बाद प्रशासन ने दावा किया कि अब बिना जांच खनिज बाहर निकालना संभव नहीं होगा। कोर्ट के आदेश के बाद ये हुए बदलाव
पूरे क्षेत्र की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई।
16 वैकल्पिक रास्ते नक्शे में दर्ज किए गए।
तीन चेक पोस्ट दूसरी जगह शिफ्ट किए गए।
एक नया चेक पोस्ट लगाया गया।
छोटे, 3 से 4 फीट चौड़े रास्तों को भी नक्शे में शामिल किया गया। यहीं उठता है सवाल
धर्मकांटे वाहन में लदे खनिज का वास्तविक वजन बताते हैं। रिपोर्ट में इन धर्मकांटों का डेटा सरकारी e-TP सिस्टम से ऑनलाइन जुड़ा नहीं है। फिलहाल विभाग e-TP के आधार पर वाहन रोककर वजन जांचता है। रिपोर्ट में इस कमी को दूर करने की जरूरत बताई है।
55 क्रेशर, 51 निजी जमीन और 4 सरकारी जमीन पर
खनिज विभाग के मुताबिक क्षेत्र में कुल 55 क्रेशर हैं। इनमें 51 खनन क्षेत्र के आसपास निजी जमीन पर और 4 सरकारी जमीन पर संबंधित लीज में लगे हैं। कोर्ट पहले ही कह चुका है कि निगरानी के लिए खनन क्षेत्र में वह हिस्सा भी शामिल होगा जहां क्रेशर लगे हैं।

