गोंडा में 9 सितंबर को हुए विनोद साहनी हत्याकांड में सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नए तथ्य सामने आए हैं। विनोद साहनी हत्या से पहले लगातार कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद और उनके बेटों का सोशल मीडिया पर विरोध कर रहे थे। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में मंत्री को ‘महाठग’ और ‘समाज का गद्दार’ तक बताया था। कई पोस्ट में अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। विनोद साहनी पिछले करीब तीन साल से निषाद पार्टी में किसी पद पर नहीं थे। हालांकि, मंत्री डॉ. संजय निषाद ने 11 सितंबर को गोंडा में धरने के दौरान उन्हें अपना जिला प्रचारक बताया था। वहीं, निषाद पार्टी के गोंडा जिलाध्यक्ष रामानंद निषाद ने कहा कि विनोद करीब तीन साल पहले पार्टी छोड़ चुके थे और वर्तमान में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) में थे। सपा से निषाद पार्टी, फिर आजाद समाज पार्टी और VIP में गए विनोद कुमार साहनी पहले समाजवादी पार्टी में रहे। इसके बाद उन्होंने निषाद पार्टी, आजाद समाज पार्टी और फिर विकासशील इंसान पार्टी की सदस्यता ली। हत्या से पहले वे निषाद पार्टी के नेताओं के खिलाफ लगातार पोस्ट कर रहे थे। इन पोस्ट में विनोद का आरोप था कि निषाद पार्टी के नेता निषाद समाज की आवाज नहीं उठा रहे हैं, बल्कि सत्ता में मंत्री पद हासिल कर अपनी राजनीति चमका रहे हैं। हालांकि, ये उनके सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए आरोप हैं। घटना से 3 दिन पहले लिखा- ‘कैबिनेट मंत्री की भी नहीं चलती’ विनोद साहनी ने घटना से करीब तीन दिन पहले फेसबुक पर एक पोस्ट की थी। इसमें उन्होंने निषाद समाज के शोषण और समाज के नेताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए थे। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जब कैबिनेट मंत्री तक समाज की बात नहीं सुनते तो लोग विरोध और शिकायत करने लगते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि निषाद समाज को अब किसी व्यक्ति के बहकावे में नहीं आना चाहिए। इस पोस्ट में उन्होंने मंत्री डॉ. संजय निषाद पर भी निशाना साधा था। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने बिना नाम लिए डॉ. संजय निषाद को लेकर सवाल उठाया कि यदि निषाद समाज का कोई ‘महाठग’ कांशीराम और मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं की जगह आगे होता, तो क्या फूलन देवी की रिहाई हो पाती? विनोद साहनी की पोस्ट…
अखिलेश निषाद की मौत पर चंदा लेने का लगाया आरोप विनोद ने एक पोस्ट में डॉ. संजय निषाद से सवाल किया था कि क्या उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश या देश में निषाद समाज के लिए कोई सामाजिक कार्य किया है? उन्होंने इसके प्रमाण के तौर पर फोटो साझा करने की बात भी लिखी थी। पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद समाज के घर-घर जाकर चंदा जुटाया गया और आरक्षण आंदोलन के दौरान शहीद हुए अखिलेश निषाद की मौत के नाम पर भी समाज से चंदा वसूला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश निषाद के परिवार के लिए भी कोई ठोस काम नहीं किया गया। अखिलेश निषाद की बहन को नौकरी नहीं दिलाने का आरोप एक अन्य पोस्ट में विनोद ने अखिलेश निषाद की बहन बंदना निषाद का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि बंदना ने बीएससी तक पढ़ाई की है और परिवार की ओर से नौकरी दिलाने की मांग की गई थी, लेकिन उनके अनुसार आज तक नौकरी नहीं दिलाई गई। विनोद ने इसी आधार पर डॉ. संजय निषाद की भूमिका पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जो व्यक्ति अपने समाज के बलिदान देने वाले परिवार की मदद नहीं कर सकता, वह समाज का क्या भला करेगा। मंत्री के दोनों बेटों की फोटो लगाकर भी किया विरोध विनोद ने डॉ. संजय निषाद के दोनों बेटों की फोटो लगाकर भी पोस्ट की थी। इसमें उन्होंने मंत्री और उनके समर्थकों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। पोस्ट में उन्होंने पुराने विवादों और निषाद समाज से जुड़े कुछ मामलों का जिक्र करते हुए मंत्री के समर्थकों पर भी गंभीर आरोप लगाए। इन पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। निषाद पार्टी और भाजपा की जमीन खिसकने का किया दावा घटना से करीब चार दिन पहले की एक पोस्ट में विनोद ने लिखा कि उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी और भाजपा की जमीन खिसक रही है। उन्होंने इसके पीछे विकासशील इंसान पार्टी के आने और निषाद समाज के नए राजनीतिक विकल्प की तलाश को वजह बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद पार्टी के मुखिया अपने स्वार्थ के लिए राजनीति कर रहे हैं। इसी पोस्ट में उन्होंने गोंडा के एक प्रभावशाली नेता का भी जिक्र किया और निषाद समाज को गुमराह करने का आरोप लगाया। राजू दास के बयान को लेकर भी की थीं पोस्ट विनोद साहनी ने महंत राजू दास के बयानों को लेकर भी कई पोस्ट की थीं। इनमें उन्होंने राजू दास पर निषाद समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। पोस्ट में उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए विरोध जताया था। विनोद ने एक पोस्ट में निषाद पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजू दास से माफी मंगवाकर समाज को गुमराह किया।
4 सितंबर की पोस्ट में मंत्री को बताया ‘समाज का गद्दार’ 4 सितंबर को विनोद ने डॉ. संजय निषाद की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ फोटो पोस्ट की थी। इसके साथ उन्होंने मंत्री को निषाद समाज का ‘द्रोही’, ‘लालची’ और ‘स्वार्थी’ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। इसी दिन एक अन्य पोस्ट में उन्होंने एक गाना साझा किया था, जिसका आशय था कि लोग जहां लाभ दिखता है, वहीं चले जाते हैं। पोस्ट में उन्होंने डॉ. संजय निषाद की राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठाए। विनोद ने यह भी लिखा कि उन्होंने निषाद पार्टी के मुखिया या उनके परिवार से लंबे समय से मुलाकात नहीं की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की राजनीति समाज के नौजवानों की मौतों पर टिकी हुई है। प्रवीण निषाद को लेकर भी उठाए सवाल विनोद ने डॉ. संजय निषाद के बेटे और गोरखपुर के पूर्व सांसद प्रवीण निषाद को लेकर भी पोस्ट की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवीण निषाद के हाथ में मामूली चोट आने के बाद निषाद पार्टी भाजपा के साथ चली गई। उन्होंने लिखा कि समाज को अब अपने वास्तविक हितैषियों और कथित गद्दारों की पहचान करनी चाहिए। फूलन देवी को लेकर लिखा- विरोध करने वालों को दुश्मन मानूंगा 29 अगस्त को की गई एक पोस्ट में विनोद ने फूलन देवी को निषाद समाज का आदर्श बताया था। उन्होंने लिखा कि जो भी फूलन देवी के बारे में गलत बोलेगा या उनके विरोध में खड़ा दिखाई देगा, वह उसे अपना दुश्मन मानेंगे। पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा कि वह ऐसे लोगों का विरोध करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े। मंत्री धरने पर बैठे, विनोद को बताया अपना जिला प्रचारक 10 सितंबर को विनोद साहनी की मौत के बाद डॉ. संजय निषाद लखनऊ के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और धरने पर बैठे। 11 सितंबर को विनोद का शव गोंडा पहुंचने के बाद मंत्री जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में धरने पर बैठे। उन्होंने विनोद को न्याय दिलाने की मांग की। धरना समाप्त करने के बाद मीडिया से बातचीत में डॉ. संजय निषाद ने विनोद साहनी को निषाद पार्टी का जिला प्रचारक बताया। उन्होंने कहा कि विनोद उनके मिशन के साथ चल रहे थे और समाज ने उन्हें अपना नेता और वकील बनाया है, इसलिए उन्हें समाज की लड़ाई लड़नी है। निषाद पार्टी जिलाध्यक्ष बोले- 3 साल पहले छोड़ चुके थे पार्टी विनोद साहनी की सोशल मीडिया पोस्ट और उन्हें जिला प्रचारक बताए जाने को लेकर दैनिक भास्कर ने निषाद पार्टी के गोंडा जिलाध्यक्ष रामानंद निषाद से फोन पर बात की। उन्होंने कहा, “विनोद साहनी वर्तमान में हमारी पार्टी में किसी पद पर नहीं थे। वह करीब तीन साल पहले पार्टी छोड़ चुके थे। जब वह पार्टी में थे, तब भी निषाद पार्टी और उसके मुखिया संजय निषाद के खिलाफ बोलते और लिखते थे।” जिलाध्यक्ष के अनुसार, विनोद वर्तमान में मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी में थे। जब उनसे पूछा गया कि यदि विनोद पार्टी के खिलाफ लिखते थे तो उनके समर्थन में क्यों खड़े हुए, तो उन्होंने कहा कि यह समाज का मामला है। मंत्री के धरने पर बैठने के बाद पार्टी के लोगों का साथ खड़ा होना स्वाभाविक था। विरोध के बावजूद मंत्री ने जिला प्रचारक क्यों बताया? विनोद साहनी की सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ. संजय निषाद और उनके बेटों का लगातार विरोध दिखाई देता है। दूसरी ओर, मंत्री ने उन्हें अपना जिला प्रचारक बताया और उनकी हत्या के बाद न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि विनोद पिछले तीन साल से निषाद पार्टी में किसी पद पर नहीं थे और सोशल मीडिया पर मंत्री का विरोध कर रहे थे, तो उन्हें जिला प्रचारक बताने के पीछे क्या वजह थी? इस सवाल का स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है। हत्या की जांच के दौरान पुलिस को इन पहलुओं की भी पड़ताल करनी होगी।

