बार-बार थकान और सांस फूलना सिर्फ उम्र का असर नहीं, Heart Valve की बीमारी का भी हो सकता है संकेत

बार-बार थकान और सांस फूलना सिर्फ उम्र का असर नहीं, Heart Valve की बीमारी का भी हो सकता है संकेत

Heart Valve Disease Symptoms: उम्र बढ़ने के साथ अगर पहले की तुलना में जल्दी थकान होने लगे, सामान्य गतिविधियों के दौरान सांस फूलने लगे या शरीर कमजोर महसूस हो, तो इसे सिर्फ उम्र का असर नहीं मानना चाहिए। हार्ट वाल्व से जुड़ी समस्या भी इसकी वजह हो सकती है। आइए जानते हैं कि हार्ट वाल्व क्या होता है और इससे जुड़ी बीमारी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

हार्ट वाल्व की बीमारी क्या है?

हार्ट वाल्व की बीमारी तब होती है, जब दिल का एक या उससे ज्यादा वाल्व ठीक तरह से काम नहीं करता। दिल में चार वाल्व होते हैं, माइट्रल, ट्राइकसपिड, महाधमनी (एओर्टिक) और फुफ्फुसीय (पल्मोनरी)। ये वाल्व रक्त को दिल के अंदर एक ही दिशा में बहने में मदद करते हैं। वाल्व खुलकर रक्त को आगे जाने देता है और फिर बंद होकर रक्त को पीछे जाने से रोकता है।

हार्ट वाल्व की बीमारी में वाल्व पूरी तरह नहीं खुल सकता या ठीक से बंद नहीं हो सकता। इसे वाल्व के संकरे होने और रक्त के पीछे की ओर रिसाव जैसी समस्याओं के रूप में देखा जाता है। वाल्व के संकुचन में वाल्व का रास्ता संकरा हो जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह कम हो सकता है। वहीं, रक्त के पीछे की ओर रिसाव में वाल्व पूरी तरह बंद नहीं होता और रक्त पीछे की ओर जाने लगता है। ऐसे में दिल को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

हार्ट वाल्व से जुड़ी बीमारी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं?

ब्रिटेन नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, हार्ट वाल्व की बीमारी के लक्षणों में सांस फूलना, थकान या कमजोरी, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना, पैरों और टखनों में सूजन तथा सीने में दर्द या बेचैनी शामिल हो सकती है। वहीं मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, महाधमनी वाल्व (एओर्टिक वाल्व) की बीमारी में सीने में दर्द या दबाव, चक्कर आना, बेहोशी, गतिविधि के बाद असामान्य थकान या पहले की तुलना में कम सक्रिय रहने की क्षमता, अनियमित धड़कन और खासकर ज्यादा शारीरिक गतिविधि या लेटने के दौरान सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उम्र बढ़ने के साथ क्या बढ़ सकता है हार्ट वाल्व की बीमारी का खतरा?

क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, उम्र बढ़ना हार्ट वाल्व की बीमारी के जोखिम कारकों में शामिल है। वाल्व के ऊतकों में समय के साथ गिरावट या कैल्शियम जमा होने से उसका काम प्रभावित हो सकता है।वहीं मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, उम्र बढ़ने पर महाधमनी वाल्व में कैल्शियम जमा हो सकता है। इससे वाल्व सख्त होकर संकरा हो सकता है और महाधमनी वाल्व के संकुचन का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जन्म से मौजूद दिल की खराबी, दिल की अंदरूनी परत का संक्रमण और सीने पर विकिरण उपचार का इतिहास भी महाधमनी वाल्व की बीमारी के जोखिम कारकों में शामिल हैं।

ब्रिटेन नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, उम्र के साथ होने वाले दिल में बदलाव के अलावा धूम्रपान, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल भी हार्ट वाल्व की बीमारी से जुड़े हो सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

ब्रिटेन नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, अगर नियमित रूप से सांस फूलती है, सामान्य गतिविधियां करते समय थकान, कमजोरी या चक्कर महसूस होता है, बार-बार दिल की धड़कन तेज या अनियमित होती है, पैरों या टखनों में सूजन रहती है या सीने में दर्द आता-जाता है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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