Nager Syndrome: जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, तो माता-पिता उसकी हर छोटी-बड़ी गतिविधि और बनावट को बहुत गौर से देखते हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ बच्चे जन्म से ही शरीर की बनावट में थोड़े अलग होते हैं। उनके चेहरे की हड्डियां, कान या हाथ-पैर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। जब चेहरे और हाथ-पैर की हड्डियों के विकास में इस तरह की असामान्यताएं एक साथ दिखाई देती हैं, तो इसे मेडिकल की भाषा में नेगर सिंड्रोम (Nager Syndrome) कहा जाता है। यह एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार (Rare Genetic Disorder) है। इसे एक्रोफेशियल डिसोस्टोसिस (Acrofacial Dysostosis) भी कहा जाता है, जिसका सीधा सा मतलब है चेहरे और शरीर के दूरदराज के अंगों यानी हाथों-पैरों की हड्डियों का सही से विकास न होना। आइए समझते हैं कि नेगर सिंड्रोम क्या है, इसके क्या लक्षण होते हैं और इस स्थिति में बच्चों की देखभाल कैसे की जाती है।
नेगर सिंड्रोम के मुख्य लक्षण क्या हैं?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, नेगर सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में लक्षण जन्म से ही स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं। यह सिंड्रोम मुख्य रूप से शरीर के दो हिस्सों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है चेहरा और हाथ-पैर।
चेहरे और सिर से जुड़े बदलाव
- कानों की बनावट में अंतर- बच्चों के बाहरी कान या तो बहुत छोटे होते हैं, पूरी तरह नहीं बने होते या असामान्य आकार के होते हैं। इसके साथ ही कान की अंदरूनी नलियां बंद या छोटी हो सकती हैं।
- आंखों के आसपास के लक्षण- आंखों की पलकें नीचे की ओर झुकी हुई लग सकती हैं, और निचली पलक में छोटा सा छेद या कमी (Coloboma) हो सकती है। गाल की हड्डियां (Cheekbones) भी पूरी तरह विकसित नहीं होतीं।
- कटे हुए तालू (Cleft Palate)- मुंह के अंदर ऊपरी तालू में छेद या कटाव हो सकता है, जिससे बच्चे को कुछ भी निगलने में दिक्कत आती है।
हाथों और पैरों की हड्डियों में दिक्कत
- अंगूठे की समस्या- नेगर सिंड्रोम का सबसे बड़ा संकेत हाथों में दिखता है। पीड़ित बच्चों के हाथों के अंगूठे या तो बहुत छोटे होते हैं, असामान्य रूप से मुड़े होते हैं या कई मामलों में अंगूठा पूरी तरह गायब भी हो सकता है।
- कलाई की हड्डियों में असामान्यता- हाथ की कलाई और कोहनी को जोड़ने वाली मुख्य हड्डी (Radius) छोटी या गायब हो सकती है, जिससे हाथ की बनावट थोड़ी मुड़ी हुई दिखती है।
- पैरों में बनावट से जुड़ी दिक्कतें- हालांकि हाथों के मुकाबले पैर कम प्रभावित होते हैं, लेकिन कुछ बच्चों के पैरों की उंगलियों की बनावट में भी कमी आ सकती है।
शरीर की अन्य कार्यप्रणालियों पर क्या असर पड़ता है?
चेहरे और हड्डियों की इस खास बनावट के कारण बच्चे को रोजमर्रा की बुनियादी गतिविधियों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है;
- सांस लेने में गंभीर तकलीफ।
- सुनने में परेशानी।
- खाने और निगलने में परेशानी।
- बोलने में देरी।
नेगर सिंड्रोम क्यों होता है?
साइंसडायरेक्ट के मुताबिक, नेगर सिंड्रोम एक जेनेटिक स्थिति है। यह मुख्य रूप से शरीर के SF3B4 नाम के जीन में बदलाव या खराबी (Mutation) आने के कारण होता है। यह जीन भ्रूण के विकास के दौरान चेहरे और हाथों की हड्डियों को सही आकार देने का काम करता है। ज्यादातर मामलों में यह जीन बदलाव नया होता है (Spontaneous Mutation), यानी माता-पिता को यह बीमारी नहीं होती, बल्कि गर्भधारण के दौरान अचानक जीन में यह बदलाव आ जाता है।
इसका इलाज और प्रबंधन कैसे किया जाता है?
नेगर सिंड्रोम का कोई एक पक्का इलाज या दवा नहीं है जो इसे पूरी तरह ठीक कर सके, लेकिन सही समय पर डॉक्टरों की मल्टी-स्पेशलिस्ट टीम की मदद से बच्चे की जिंदगी को काफी आसान और सामान्य बनाया जा सकता है;
- सांस और खुराक का इंतजाम।
- सर्जरी (प्लास्टिक और ऑर्थोपेडिक)।
- हियरिंग एड (Hearing Aids)।
- थेरेपी।

