बाड़मेर नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद पार्टी ने पंचायती राज चुनाव में गुटबाजी खत्म करने की कवायद तेज कर दी है। विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बागी चुनाव लड़ने वाले फतेह खान और पूर्व मंत्री अमीन खान के बीच बढ़ी दूरियों को कम करने की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं। करीब 3 साल बाद सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व मंत्री गफूर अहमद और जिलाध्यक्ष लक्ष्मणसिंह गोदारा की मध्यस्थता से दोनों नेताओं के बीच राजीनामा हुआ है। वहीं, भाजपा भी चुनावी तैयारियों में जुटी है। पार्टी जिले में पहली बार जिला प्रमुख बनाने के लक्ष्य के साथ मजबूत दावेदारों पर मंथन कर रही है। दूसरी ओर, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी अपनी सरलीकरण यात्रा के जरिए भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। बाड़मेर में पहले दो चरणों में मतदान होगा, जबकि 20 नवंबर को एक साथ चुनाव परिणाम आएंगे। कांग्रेस, भाजपा और आरएलपी सर्वे तथा जमीनी फीडबैक के आधार पर मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही हैं। आरएलपी के चुनाव मैदान में उतरने से जिला परिषद की कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं। कांग्रेस में दावेदारों पर मंथन जारी कांग्रेस विधानसभा और उपखंड स्तर पर बैठकें कर रही है। इन बैठकों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के टिकट के दावेदारों से आवेदन लिए जा रहे हैं। पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले आपसी मतभेद दूर कर संगठन को मजबूत करने की है। शिव विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री अमीन खान और कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान राजीनामे के बाद एक मंच पर नजर आ रहे हैं। रामसर और बिजराड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों नेताओं को सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के साथ एक ही गाड़ी में बैठे और मंच साझा करते देखा गया है। इसे क्षेत्र में कांग्रेस की गुटबाजी कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच रहे भाजपा के प्रभारी भाजपा भी पंचायत चुनाव को लेकर सक्रिय हो गई है। पार्टी के प्रभारी विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं और दावेदारों से आवेदन ले रहे हैं। पंचायत समितिवार और जिला परिषद के लिए नियुक्त प्रभारी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से फीडबैक जुटा रहे हैं। पार्टी के सामने हर सीट पर मजबूत प्रत्याशी चुनने की चुनौती है। कई सीटों पर दो से पांच दावेदारों ने आवेदन किया है। भाजपा वार्ड वार पैनल तैयार कर बैठकों में नामों पर चर्चा करेगी। इसके बाद जीत की संभावना और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों के नाम अंतिम किए जाएंगे। शिव विधायक भाटी के रुख से भाजपा के सामने चुनौती शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ईडब्ल्यूएस सरलीकरण के मुद्दे को लेकर बीकानेर संभाग में जनसंपर्क कर रहे हैं और रैलियां निकाल रहे हैं। वहीं, शिव और गडरारोड पंचायत समिति क्षेत्रों के विभिन्न वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी उतारने की तैयारी भी चल रही है। कुछ वार्डों में प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे में भाजपा के सामने अपने वोट बैंक को एकजुट रखने की चुनौती हो सकती है। निर्दलीय प्रत्याशी कई सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। इधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष स्वरूपसिंह खारा भी सक्रिय हैं। वे पिछले कई दिनों से मंडलवार पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठकें ले रहे हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के लिए दावेदारों से आवेदन लेने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों की जमीनी स्थिति और जीत की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। आरएलपी की एंट्री से मुकाबला होगा दिलचस्प पंचायती राज चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के साथ आरएलपी की सक्रियता भी अहम मानी जा रही है। पार्टी के चुनाव मैदान में उतरने से कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। ऐसे में प्रत्याशियों के चयन, स्थानीय नेताओं की सक्रियता और जातीय-सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। कांग्रेस के लिए आपसी गुटबाजी दूर करना, भाजपा के लिए मजबूत उम्मीदवार उतारना और आरएलपी के लिए अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में चुनौती पेश करना चुनावी रणनीति के प्रमुख पहलू होंगे।

