उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में प्रशासनिक महकमे में उस समय हड़कंप मच गया जब जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह ने कड़ा कदम उठाते हुए लापरवाही और भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई की। डीएम ने कार्यकुशलता में सुधार न करने पर एक कनिष्ठ सहायक (बाबू) को पदावनत (डिमोशन) कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) बना दिया है, वहीं गबन के आरोपी एक अन्य कनिष्ठ सहायक को बर्खास्त (टर्मिनेट) कर दिया गया है। इसके अलावा, अन्य कर्मचारियों को चेतावनी जारी कर टाइपिंग टेस्ट पास करने का अंतिम मौका दिया गया है। 3 बार मौका मिलने के बाद भी टाइपिंग में फेल हुआ बाबू मीरगंज तहसील में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत रेहान खान को मृतक आश्रित कोटे के तहत वर्ष 2021 में नियुक्ति मिली थी। नियम के अनुसार कनिष्ठ सहायक पद के लिए कंप्यूटर टाइपिंग आना अनिवार्य है। रेहान खान को अपनी टाइपिंग में सुधार के लिए लगातार 3 बार अवसर दिए गए, लेकिन वह तीनों बार टाइपिंग टेस्ट में अनुत्तीर्ण रहा। शासन के निर्देशों और जीओ के तहत कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी ने रेहान खान का डिमोशन कर उसे कनिष्ठ सहायक से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) के पद पर तैनात करने का आदेश दे दिया। अमीनों की रकम हड़पने वाले बाबू की सेवाएं समाप्त वहीं दूसरा मामला फरीदपुर का है, जहां कनिष्ठ सहायक पद पर तैनात रहे अंशु वर्मा (शर्मा) पर राजस्व वसूली के पैसों के गबन का आरोप था। उसने अमीनों द्वारा जमा कराई गई राजस्व राशि को सरकारी खाते में जमा करने के बजाय अपने व्यक्तिगत खाते में डालकर हड़प लिया था। वर्ष 2015-16 में उसे पहले भी बर्खास्त किया गया था, जिसके बाद मामला ट्रिब्यूनल में चला गया। ट्रिब्यूनल के आदेश पर एडीएम सिटी की अध्यक्षता में पुनः जांच कमेटी गठित की गई। जांच के दौरान आरोप पत्र में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए। इसके आधार पर जिलाधिकारी ने सख्त एक्शन लेते हुए अंशु वर्मा को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। 2 अन्य कर्मचारियों को मिला 2 महीने का अंतिम मौका जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कंचित चौधरी, राहुल कुमार और लक्ष्मी सक्सेना जैसे अन्य कर्मचारियों को भी टाइपिंग टेस्ट में सुधार का अंतिम अवसर दिया गया है। डीएम ने बताया कि सहानुभूति के आधार पर इन कर्मचारियों को 2 महीने का समय दिया गया है ताकि वे कंप्यूटर टाइपिंग सीखकर अपनी कार्यक्षमता बढ़ा सकें। यदि वे तय समय सीमा में टेस्ट पास नहीं करते हैं, तो शासनादेश के अनुसार उनके विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। डीएम अविनाश सिंह का बयान:
“मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार प्रशासन में जीरो टॉलरेंस की नीति और कार्यकुशलता में सुधार प्राथमिकता है। लगातार अवसर देने के बाद भी जो कर्मचारी तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे या भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।”

