बदलेंगे राजद के 43 में से 20 जिला अध्यक्ष:53% यादव-मुस्लिम, सवर्ण 2, नए कमेटी में क्या बदलने जा रहे तेजस्वी यादव

बदलेंगे राजद के 43 में से 20 जिला अध्यक्ष:53% यादव-मुस्लिम, सवर्ण 2, नए कमेटी में क्या बदलने जा रहे तेजस्वी यादव

बांकीपुर में जमानत जब्त होने के बाद तेजस्वी यादव ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक राजद नेतृत्व बदलने जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी के सभी प्रकोष्ठों सहित जिला कमिटियों से लेकर पंचायत कमिटियों तक को भंग कर दिया है। भंग किए जाने से पहले राजद के करीब 43 जिला अध्यक्ष थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार इनमें से करीब 20 को बदला जा सकता है। तेजस्वी युवाओं को ज्यादा जगह देने जा रहे हैं, 60 साल से अधिक उम्र वालों को संगठन की बड़ी जिम्मेदारी से हटाया जाएगा। इन सबके अलावा विवादों में रहने वाले जिला अध्यक्षों को भी हटाया जा सकता है। तेजस्वी यादव जिला अध्यक्ष के चुनाव में किन बातों का ध्यान रखेंगे? क्या आधार होगा? पहले इस पद पर कौन थे? पढ़िए रिपोर्ट…। समर्पित कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष पद देंगे तेजस्वी नए नेतृत्व के चुनाव में तेजस्वी पार्टी के कोर वोट बैंक (यादव-मुस्लिम) के साथ अन्य समाज के लोगों को भी जोड़ने की कोशिश करेंगे। कमेटी भंग किए जाने से पहले राजद के 43 जिला अध्यक्ष में से यादव 16 और मुसलमान 7 थे। वहीं, गैर यादव OBC-EBC 9, SC 6, सवर्ण 2 वैश्य 1 और ST समाज से आने वाले 1 नेता जिला अध्यक्ष थे। किसे नया जिला अध्यक्ष बनाना है? यह फैसला राजद के नेताओं ने तेजस्वी के हाथों में छोड़ा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, समर्पित कार्यकर्ताओं को यह पद मिलेगा। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि युवाओं को मौका मिले। क्षेत्रीय सामाजिक समीकरण का भी ख्याल रखा जाएगा। तेजस्वी सभी जाति, वर्ग, धर्म को जोड़कर पार्टी A टू Z का फार्मूला फिट करने पर फोकस रखेंगे। तीन आधार पर चुने जाएंगे नए जिला अध्यक्ष करीब 20 जिला अध्यक्षों को नहीं मिलेगा मौका बिहार में 38 जिले हैं, लेकिन राजद के जिलाध्यक्षों की संख्या करीब 43 है। इसकी वजह कई जिलों में एक से अधिक जिला अध्यक्ष होना है। पार्टी ने सभी कमेटी भंग की है। इसलिए वर्तमान में राजद का कोई जिला अध्यक्ष नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब 20 पूर्व जिला अध्यक्षों को फिर से यह पद नहीं मिलने वाला। करीब 15 नेताओं को यह पद अधिक उम्र के चलते वापस नहीं मिलेगा। वहीं, विवादों में रहने के चलते 5-6 नेताओं को वापस जिला अध्यक्ष बनाए जाने की उम्मीद कम है। उम्र 60 साल या अधिक तो नहीं मिलेगा जिला अध्यक्ष पद पार्टी सूत्रों के अनुसार तेजस्वी का फोकस युवा नेतृत्व को आगे लाने पर है। इसके चलते 60 साल या इससे अधिक उम्र वाले पूर्व जिला अध्यक्षों को फिर से यह पद मिलना मुश्किल है। लखीसराय के कालीचरण दास ने तो अधिक उम्र के चलते पहले ही इस्तीफा दे दिया था। विवाद में फंसे, नाराजगी दिखाई, पद मिलना मुश्किल जिन जिलों के अध्यक्ष विवाद में रहे हैं या पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी दिखाई है वहां पुराने जिला अध्यक्ष को फिर से पद मिलना मुश्किल है। उनकी जगह नए नेता को मौका दिया जा सकता है। ऐसे जिले हैं… अब जानिए अन्य जिलों का हाल पार्टी नेतृत्व क्यों बदल रहे तेजस्वी यादव, 5 पॉइंट पहले 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन और अब बांकीपुर चुनाव में हार के चलते तेजस्वी यादव का नेतृत्व सवालों के घेरे में है। पार्टी में अनुशासन की कमी है। ऐसे में राजद नेतृत्व में नई जान फूंकने के लिए तेजस्वी ने संगठन में बड़े बदलाव का फैसला किया है। इसकी 5 वजहें हैं… 1- बीजेपी और जन सुराज से मिल रही चुनौती राजद का मुकाबला सीधे भाजपा सरकार से है। पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार थी तो स्थिति अलग थी। सम्राट सरकार में राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करना पड़ा। भाजपा की चुनौती का सामना करने के लिए तेजस्वी को जमीन पर उतरने और आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने की जरूरत है। इसके लिए वह पार्टी में युवाओं को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर बांकीपुर सीट जीतकर जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने तेजस्वी के सामने विपक्ष के नेता के नए विकल्प के रूप में चुनौती दी है। 2- राजद संगठन को मजबूती देने की कोशिश तेजस्वी यादव संगठन में बड़े बदलाव कर पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में हैं। युवाओं को अहम पद देकर वे संगठन में नई ऊर्जा भरना चाहते हैं। 60 साल से अधिक उम्र के नेताओं या कम सक्रिय नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका देने वाले हैं। 3- पार्टी में अनुशासन लाने की कवायद राजद में अनुशासन की कमी है। तेजस्वी की कोशिश नाराजगी जताने वाले और असंतुष्ट नेताओं की जगह नए लोगों को आगे लाने की है। कर्मठ और विश्वासी नेताओं को तरजीह देने वाले हैं। 4- चुनावी हार का असर विधानसभा चुनाव 2025 में राजद को सिर्फ 25 सीटें मिलीं। इसके बाद पार्टी ने समीक्षा की। पता किया कि कहां उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ठीक तरह काम नहीं किया। अब तेजस्वी इन कमजोरियों को दूर करने की कोशिश में हैं। 5- हर क्षेत्र के लिए अलग सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस बीजेपी और जन सुराज की सोशल इंजीनियरिंग देखते हुए तेजस्वी यादव अपने कोर वोट बैंक को बरकरार रखते हुए नए वोट बैंक की तलाश में लगे हैं। इसके लिए वे A टू Z की बात तो कर रहे हैं, लेकिन जिला अध्यक्षों के मामले में हर क्षेत्र के लिए अलग सोशल इंजीनियरिंग अपनाने वाले हैं। तेजस्वी यादव नए जिला अध्यक्षों के चुनाव पर कर रहे काम RJD के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा, ‘प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के समय तकनीकी रूप से सभी कमेटी भंग हो जाती है। उसके बाद कई कार्यक्रम थे। विधानसभा चुनाव था। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र जारी किया था। इसमें लिखा था कि अगली कमेटी बनने तक पहले से मौजूद कमेटी काम करेंगी। अब उस पत्र को उन्होंने रद्द कर दिया है।’ ‘नए जिला अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक संतुलन, पार्टी के प्रति निष्ठा, पिछले काम, सबको साथ लेकर चलने की क्षमता, इन बातों के आधार पर कमेटी के लोगों का चुनाव होगा।’ बांकीपुर में जमानत जब्त होने के बाद तेजस्वी यादव ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक राजद नेतृत्व बदलने जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी के सभी प्रकोष्ठों सहित जिला कमिटियों से लेकर पंचायत कमिटियों तक को भंग कर दिया है। भंग किए जाने से पहले राजद के करीब 43 जिला अध्यक्ष थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार इनमें से करीब 20 को बदला जा सकता है। तेजस्वी युवाओं को ज्यादा जगह देने जा रहे हैं, 60 साल से अधिक उम्र वालों को संगठन की बड़ी जिम्मेदारी से हटाया जाएगा। इन सबके अलावा विवादों में रहने वाले जिला अध्यक्षों को भी हटाया जा सकता है। तेजस्वी यादव जिला अध्यक्ष के चुनाव में किन बातों का ध्यान रखेंगे? क्या आधार होगा? पहले इस पद पर कौन थे? पढ़िए रिपोर्ट…। समर्पित कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष पद देंगे तेजस्वी नए नेतृत्व के चुनाव में तेजस्वी पार्टी के कोर वोट बैंक (यादव-मुस्लिम) के साथ अन्य समाज के लोगों को भी जोड़ने की कोशिश करेंगे। कमेटी भंग किए जाने से पहले राजद के 43 जिला अध्यक्ष में से यादव 16 और मुसलमान 7 थे। वहीं, गैर यादव OBC-EBC 9, SC 6, सवर्ण 2 वैश्य 1 और ST समाज से आने वाले 1 नेता जिला अध्यक्ष थे। किसे नया जिला अध्यक्ष बनाना है? यह फैसला राजद के नेताओं ने तेजस्वी के हाथों में छोड़ा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, समर्पित कार्यकर्ताओं को यह पद मिलेगा। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि युवाओं को मौका मिले। क्षेत्रीय सामाजिक समीकरण का भी ख्याल रखा जाएगा। तेजस्वी सभी जाति, वर्ग, धर्म को जोड़कर पार्टी A टू Z का फार्मूला फिट करने पर फोकस रखेंगे। तीन आधार पर चुने जाएंगे नए जिला अध्यक्ष करीब 20 जिला अध्यक्षों को नहीं मिलेगा मौका बिहार में 38 जिले हैं, लेकिन राजद के जिलाध्यक्षों की संख्या करीब 43 है। इसकी वजह कई जिलों में एक से अधिक जिला अध्यक्ष होना है। पार्टी ने सभी कमेटी भंग की है। इसलिए वर्तमान में राजद का कोई जिला अध्यक्ष नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब 20 पूर्व जिला अध्यक्षों को फिर से यह पद नहीं मिलने वाला। करीब 15 नेताओं को यह पद अधिक उम्र के चलते वापस नहीं मिलेगा। वहीं, विवादों में रहने के चलते 5-6 नेताओं को वापस जिला अध्यक्ष बनाए जाने की उम्मीद कम है। उम्र 60 साल या अधिक तो नहीं मिलेगा जिला अध्यक्ष पद पार्टी सूत्रों के अनुसार तेजस्वी का फोकस युवा नेतृत्व को आगे लाने पर है। इसके चलते 60 साल या इससे अधिक उम्र वाले पूर्व जिला अध्यक्षों को फिर से यह पद मिलना मुश्किल है। लखीसराय के कालीचरण दास ने तो अधिक उम्र के चलते पहले ही इस्तीफा दे दिया था। विवाद में फंसे, नाराजगी दिखाई, पद मिलना मुश्किल जिन जिलों के अध्यक्ष विवाद में रहे हैं या पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नाराजगी दिखाई है वहां पुराने जिला अध्यक्ष को फिर से पद मिलना मुश्किल है। उनकी जगह नए नेता को मौका दिया जा सकता है। ऐसे जिले हैं… अब जानिए अन्य जिलों का हाल पार्टी नेतृत्व क्यों बदल रहे तेजस्वी यादव, 5 पॉइंट पहले 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन और अब बांकीपुर चुनाव में हार के चलते तेजस्वी यादव का नेतृत्व सवालों के घेरे में है। पार्टी में अनुशासन की कमी है। ऐसे में राजद नेतृत्व में नई जान फूंकने के लिए तेजस्वी ने संगठन में बड़े बदलाव का फैसला किया है। इसकी 5 वजहें हैं… 1- बीजेपी और जन सुराज से मिल रही चुनौती राजद का मुकाबला सीधे भाजपा सरकार से है। पहले नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार थी तो स्थिति अलग थी। सम्राट सरकार में राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करना पड़ा। भाजपा की चुनौती का सामना करने के लिए तेजस्वी को जमीन पर उतरने और आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाने की जरूरत है। इसके लिए वह पार्टी में युवाओं को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर बांकीपुर सीट जीतकर जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर ने तेजस्वी के सामने विपक्ष के नेता के नए विकल्प के रूप में चुनौती दी है। 2- राजद संगठन को मजबूती देने की कोशिश तेजस्वी यादव संगठन में बड़े बदलाव कर पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में हैं। युवाओं को अहम पद देकर वे संगठन में नई ऊर्जा भरना चाहते हैं। 60 साल से अधिक उम्र के नेताओं या कम सक्रिय नेताओं की जगह नए चेहरों को मौका देने वाले हैं। 3- पार्टी में अनुशासन लाने की कवायद राजद में अनुशासन की कमी है। तेजस्वी की कोशिश नाराजगी जताने वाले और असंतुष्ट नेताओं की जगह नए लोगों को आगे लाने की है। कर्मठ और विश्वासी नेताओं को तरजीह देने वाले हैं। 4- चुनावी हार का असर विधानसभा चुनाव 2025 में राजद को सिर्फ 25 सीटें मिलीं। इसके बाद पार्टी ने समीक्षा की। पता किया कि कहां उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ठीक तरह काम नहीं किया। अब तेजस्वी इन कमजोरियों को दूर करने की कोशिश में हैं। 5- हर क्षेत्र के लिए अलग सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस बीजेपी और जन सुराज की सोशल इंजीनियरिंग देखते हुए तेजस्वी यादव अपने कोर वोट बैंक को बरकरार रखते हुए नए वोट बैंक की तलाश में लगे हैं। इसके लिए वे A टू Z की बात तो कर रहे हैं, लेकिन जिला अध्यक्षों के मामले में हर क्षेत्र के लिए अलग सोशल इंजीनियरिंग अपनाने वाले हैं। तेजस्वी यादव नए जिला अध्यक्षों के चुनाव पर कर रहे काम RJD के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा, ‘प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के समय तकनीकी रूप से सभी कमेटी भंग हो जाती है। उसके बाद कई कार्यक्रम थे। विधानसभा चुनाव था। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र जारी किया था। इसमें लिखा था कि अगली कमेटी बनने तक पहले से मौजूद कमेटी काम करेंगी। अब उस पत्र को उन्होंने रद्द कर दिया है।’ ‘नए जिला अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक संतुलन, पार्टी के प्रति निष्ठा, पिछले काम, सबको साथ लेकर चलने की क्षमता, इन बातों के आधार पर कमेटी के लोगों का चुनाव होगा।’  

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