अब अमेरिका में बच्चों व टीनेजर्स रात के समय फेसबुक और इंस्ट्राग्राम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। उनके लिए रोजाना एप चलाने की डेली लिमिट भी लागू होगी। मेटा पर आरोप था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम से बच्चों और टीनेजर्स के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और कंपनी ने इस नुकसान को लोगों से छुपाया। यह बदलाव अमेरिका में मेटा और 29 राज्यों के बीच हुए 16.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.59 लाख करोड़ रुपए के एक बड़े कानूनी समझौते के बाद लागू किए जा रहे हैं। यह नियम पूरी दुनिया में नहीं केवल अमेरिका में लागू होंगे। मेटा को 4 बड़े बदलाव करने होंगे बच्चों का डेटा चुराकर AI को ट्रेन करने का आरोप कंपनी पर आरोप लगे थे कि उसने माता-पिता को बिना बताए उनके बच्चों का पर्सनल डेटा जुटाया। इस डेटा का इस्तेमाल AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए किया। मेटा बोला- सोशल मीडिया की लत कोई बीमारी नहीं मेटा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया था। कंपनी का कहना है कि उसने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। मेटा ने कोर्ट में तर्क दिया कि वो यूजर्स को गुमराह नहीं कर रही है, क्योंकि ‘सोशल मीडिया की लत’ कोई मान्यता प्राप्त मानसिक बीमारी नहीं है। एप से बांधकर रखने के लिए डिजाइन होता है एल्गोरिदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का एल्गोरिदम इस तरह बनाया जाता है कि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक एप पर बना रहे और यही धीरे-धीरे लत में बदल जाता है। इन टेक कंपनियों पर भी चल रहे हैं मुकदमे मेटा के अलावा स्नैपचैट, यूट्यूब और टिकटॉक भी अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने एप्स में ऐसे फीचर्स जोड़े जो बच्चों और युवाओं को लत लगा रहे हैं।
अमेरिकी बच्चे रात में नहीं चला पाएंगे फेसबुक-इंस्टाग्राम:डेली लिमिट भी तय होगी; मेटा और अमेरिकी राज्यों के बीच ₹1.59 लाख करोड़ का समझौता

