बक्सर में विजयादशमी पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया है। सबसे पहले बड़ी देवी पूजा समिति की प्रतिमा विसर्जित हुई। दशकों पुरानी परंपरा निभाते हुए, श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को वाहन की बजाय कंधों पर उठाकर विसर्जन स्थल तक पहुंचाया। इस अनूठी परंपरा को देखने हजारों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। शोभायात्रा में 21 सदस्यों ने मां की प्रतिमा को कंधों पर उठाया। बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह से निभाया जाता है। समिति के सदस्यों के लिए यह पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। सज-धजकर शोभायात्रा में शामिल हुई महिलाएं विसर्जन शोभायात्रा में सैकड़ों महिलाएं नए कपड़ों में सज-धजकर शामिल हुईं। वे भक्ति गीत गाते और नृत्य करते हुए मां की प्रतिमा के साथ चल रही थीं। अबीर-गुलाल से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। बड़ी देवी का विसर्जन बक्सर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, जिले की अन्य पूजा समितियों की प्रतिमाओं का विसर्जन बड़ी देवी के विसर्जन के बाद ही शुरू होता है। यही वजह है कि इस विसर्जन को देखने के लिए शहर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सड़कों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। मां की प्रतिमा को कंधे पर उठाकर ले जाते श्रद्धालुओं को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुटी रही। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए और जयकारे लगाए। बैंड-बाजे की धुन पर झूमते भक्तों के बीच पूरा शहर दुर्गा भक्ति में डूबा नजर आया।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाएं और पुरुष एक-दूसरे के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ते रहे। प्रतिमा को कंधे पर उठाने वाले सदस्य बीच-बीच में एक-दूसरे को कंधा देकर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
गंगा घाट पर नम आंखों से मां को विदाई शहर में भ्रमण के बाद विसर्जन शोभायात्रा सेंटर जेल के पास स्थित गंगा घाट पहुंची। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। मां को विदाई देने के दौरान माहौल भावुक हो गया। श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, लेकिन जुबां पर अगले साल फिर से मां के आगमन की कामना थी। महिलाओं और पुरुषों ने जयकारों के बीच मां दुर्गा को अंतिम विदाई दी। इस तरह बड़ी देवी पूजा समिति का विसर्जन संपन्न हुआ और बक्सर में अन्य प्रतिमाओं के विसर्जन का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। कंधे पर प्रतिमा उठाने की परंपरा, महिलाओं की बड़ी भागीदारी और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि बड़ी देवी का विसर्जन बक्सर के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। बक्सर में विजयादशमी पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया है। सबसे पहले बड़ी देवी पूजा समिति की प्रतिमा विसर्जित हुई। दशकों पुरानी परंपरा निभाते हुए, श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को वाहन की बजाय कंधों पर उठाकर विसर्जन स्थल तक पहुंचाया। इस अनूठी परंपरा को देखने हजारों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। शोभायात्रा में 21 सदस्यों ने मां की प्रतिमा को कंधों पर उठाया। बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और माता के जयकारों के बीच शोभायात्रा आगे बढ़ी। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह से निभाया जाता है। समिति के सदस्यों के लिए यह पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। सज-धजकर शोभायात्रा में शामिल हुई महिलाएं विसर्जन शोभायात्रा में सैकड़ों महिलाएं नए कपड़ों में सज-धजकर शामिल हुईं। वे भक्ति गीत गाते और नृत्य करते हुए मां की प्रतिमा के साथ चल रही थीं। अबीर-गुलाल से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। बड़ी देवी का विसर्जन बक्सर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, जिले की अन्य पूजा समितियों की प्रतिमाओं का विसर्जन बड़ी देवी के विसर्जन के बाद ही शुरू होता है। यही वजह है कि इस विसर्जन को देखने के लिए शहर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सड़कों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। मां की प्रतिमा को कंधे पर उठाकर ले जाते श्रद्धालुओं को देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुटी रही। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए और जयकारे लगाए। बैंड-बाजे की धुन पर झूमते भक्तों के बीच पूरा शहर दुर्गा भक्ति में डूबा नजर आया।
शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाएं और पुरुष एक-दूसरे के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ते रहे। प्रतिमा को कंधे पर उठाने वाले सदस्य बीच-बीच में एक-दूसरे को कंधा देकर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।
गंगा घाट पर नम आंखों से मां को विदाई शहर में भ्रमण के बाद विसर्जन शोभायात्रा सेंटर जेल के पास स्थित गंगा घाट पहुंची। यहां मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। मां को विदाई देने के दौरान माहौल भावुक हो गया। श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, लेकिन जुबां पर अगले साल फिर से मां के आगमन की कामना थी। महिलाओं और पुरुषों ने जयकारों के बीच मां दुर्गा को अंतिम विदाई दी। इस तरह बड़ी देवी पूजा समिति का विसर्जन संपन्न हुआ और बक्सर में अन्य प्रतिमाओं के विसर्जन का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। कंधे पर प्रतिमा उठाने की परंपरा, महिलाओं की बड़ी भागीदारी और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि बड़ी देवी का विसर्जन बक्सर के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है।

