फर्रुखाबाद पुलिस को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार:एफआईआर में एक साल बाद रिपोर्ट नहीं, एसपी को हाजिर होने का निर्देश

फर्रुखाबाद पुलिस को हाईकोर्ट ने लगाई फटकार:एफआईआर में एक साल बाद रिपोर्ट नहीं, एसपी को हाजिर होने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्रुखाबाद के एक अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक, सर्किल ऑफिसर और विवेचना अधिकारी को मूल केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है। अधिवक्ता याची अवधेश मिश्रा ने याचिका दायर कर 11 अक्टूबर 2025 को थाना कोतवाली फतेहगढ़, फर्रुखाबाद में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। याची के अधिवक्ता प्रशांत सिंह रिंकू व अन्य अधिवक्ताओं ने बहस की। जानिये क्या है मामला
अजय चौहान ने बी एन एस की धाराओं 55, 111(2), 230, 232, 248(बी), 308(6), 61(2)(ए), 351(3) और 356(1) में एफआईआर दर्ज कराई थी। अधिवक्ता पर आरोप है कि उन्होंने एक मामले में अभियुक्त से 5 लाख रुपये मांगे, ताकि उस मामले की अभियोक्त्री अभियुक्त के पक्ष में गवाही दे। याची की ओर से कहा गया कि एफआईआर, एस पी फर्रुखाबाद आरती सिंह के इशारे पर द्वेष पूर्ण ढंग से दर्ज कराई गई। दलील थी कि हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2025 को एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में एस पी को बुलाया था और उसके केवल दो दिन बाद एफआईआर दर्ज हो गई। याचिका के अनुसार, 11 अक्टूबर की रात करीब 8:30 बजे एस पी ने लगभग 100 सिपाहियों के साथ याची के घर पर छापा मारा, याची की पत्नी, बेटे और नौकर के साथ मारपीट की तथा घरेलू सामान क्षतिग्रस्त किया। विशेष पीठ का गठन हुआ था
मामले की तात्कालिकता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर 19 अक्टूबर 2025 (रविवार) को विशेष पीठ गठित की गई थी। उस दिन कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रतिवादी को 29 अक्टूबर 2025 तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया और अंतरिम आदेश में याची की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। आदेश की जानकारी एस पी फर्रुखाबाद और थानाध्यक्ष को तत्काल देने के निर्देश भी दिए गए थे। कोर्ट ने पूछा है कि बी एन एस एस की धारा 193(3) के तहत अपेक्षित पुलिस रिपोर्ट दाखिल हुई या नहीं। सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि निर्देशों के अनुसार रिपोर्ट अब तक दाखिल नहीं की गई है। राज्य के अधिकारियों पर उठाए सवाल इस पर कोर्ट ने कहा, “हम राज्य अधिकारियों के आचरण से आशंकित हैं”, क्योंकि लगभग एक साल बीतने को है और रिपोर्ट अब तक नहीं दी गई। कोर्ट ने एस पी ,सी ओ और विवेचना अधिकारी को केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने और विवेचना में ढिलाई पर स्पष्टीकरण देते हुए अपने निजी शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। मामला अब 22 अक्टूबर 2026 को दोबारा सुनवाई के लिए लगेगा। तब तक याची की गिरफ्तारी पर रोक का अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

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