प्रतापगढ़ में हत्या के दो अलग-अलग मामलों में मंगलवार को अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों मामलों में अदालत ने दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया है। जिला सत्र न्यायाधीश राजीव कमल पांडेय ने लालगंज कोतवाली के बेलहा गांव से जुड़े मामले में दोषी को उम्रकैद और 14 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं कंधई थाना क्षेत्र के पयागपुर औरिस्ता गांव के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने मोनू उर्फ बजरंगी को उम्रकैद और 25 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। खेत में शव मिलने के मामले में उम्रकैद लालगंज कोतवाली क्षेत्र के बेलहा गांव का मामला 11 नवंबर 2008 का है। अभियोजन के अनुसार गांव निवासी राम फकीरे ने बताया था कि शाम करीब 4 बजे उसकी नातिन खेत में धान काट रही थी। इसी दौरान गांव के कमलेश सिंह ने उसके साथ अभद्रता की। इसकी शिकायत करने के लिए रामराज गया था। अगले दिन सुबह रामराज का शव खेत में पड़ा मिला। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टार्जन सिंह उर्फ जितेंद्र को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं दूसरे आरोपी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 14 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। गोली मारकर हत्या के मामले में भी उम्रकैद कंधई थाना क्षेत्र के पयागपुर औरिस्ता गांव का दूसरा मामला 5 दिसंबर 2015 का है। अभियोजन के अनुसार शोभा देवी अपने पति राजेश्वर सिंह के साथ शाम करीब 5 बजे खेत देखकर घर लौट रही थीं। दोनों राकेश की दुकान के पास पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद मोनू उर्फ बजरंगी ने आवाज देकर राजेश्वर को बुलाया। आरोप के मुताबिक मोनू ने अपने पास रखे असलहे से राजेश्वर को गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। मामले में अदालत ने मोनू उर्फ बजरंगी को हत्या और शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों मामलों में अभियोजन ने की पैरवी पहले मामले में राज्य की ओर से डीजीसी योगेश कुमार शर्मा तथा एडीजीसी काशीनाथ तिवारी और विक्रम सिंह ने पैरवी की। दूसरे मामले में एडीजीसी अनिल कुमार मिश्र ने अभियोजन पक्ष रखा।

