पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज:भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट के चुनाव को दी थी चुनौती, EVM की बैटरी में गड़बड़ी को बनाया था आधार

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज:भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट के चुनाव को दी थी चुनौती, EVM की बैटरी में गड़बड़ी को बनाया था आधार

भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी के निर्वाचन को चुनौती देने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक पीसी शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए शर्मा की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने 2 नवंबर को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिलता। इसी आधार पर विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई। लंबित आवेदन भी निपटा दिए गए। शर्मा ने हाईकोर्ट के 2 अप्रैल 2025 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उनकी चुनाव याचिका प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट में शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और सबनानी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी पैरवी कर रहे थे। 15,833 वोट से हार के बाद ईवीएम पर उठाए थे सवाल 3 दिसंबर 2023 को घोषित चुनाव परिणाम में भाजपा के भगवानदास सबनानी को 76,689 वोट मिले थे। कांग्रेस के पीसी शर्मा को 60,856 वोट मिले। सबनानी 15,833 वोटों से चुनाव जीते थे। चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए शर्मा ने जबलपुर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका क्रमांक 15/2024 दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य तंत्र की मिलीभगत से ईवीएम में हेरफेर किया गया। शर्मा की याचिका में मतगणना के समय ईवीएम की बैटरी के स्तर को गड़बड़ी का आधार बनाया गया था। उनका कहना था कि अधिकांश मशीनों में बैटरी 99 प्रतिशत चार्ज दिखाई दे रही थी, जबकि कुछ मशीनों में यह 80 प्रतिशत से कम थी। उन्होंने इस आधार पर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी याचिका 2 अप्रैल 2025 को जस्टिस विशाल धगट ने चुनाव याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका में ईवीएम तक पहुंच रखने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्ट आचरण का विशिष्ट आरोप नहीं लगाया गया है। याचिका में यह भी स्पष्ट नहीं था कि निर्वाचित प्रत्याशी के साथ मिलकर राज्य तंत्र ने क्या किया और कथित गड़बड़ी से चुनाव परिणाम किस तरह प्रभावित हुआ। कोर्ट ने माना था कि आरोप सामान्य प्रकृति के हैं और भ्रष्ट आचरण के जरूरी विवरण मौजूद नहीं हैं। हाईकोर्ट ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 81, 83 और 100 को एक साथ पढ़ने की जरूरत बताई थी। भगवानदास सबनानी की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन दिया गया था, जिसे स्वीकार करते हुए याचिका प्रारंभिक स्तर पर खारिज कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं पीसी शर्मा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया। उनकी याचिका में विचारणीय प्रश्न थे और मतगणना के सीसीटीवी फुटेज के जरिए विचारण के दौरान आवश्यक तथ्यों को साबित किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया था कि निर्वाचन अधिकारियों ने फुटेज उपलब्ध कराने से इनकार किया। सबनानी की ओर से जवाब में कहा गया कि चुनाव याचिका में जरूरी तात्विक तथ्य ही नहीं दिए गए। करीब 235 मतदान केंद्रों वाले क्षेत्र में किसी विशिष्ट मतदान केंद्र, ईवीएम, व्यक्ति, तारीख, स्थान या कथित छेड़छाड़ के तरीके का उल्लेख नहीं था। यह भी नहीं बताया गया कि 15,833 वोटों के अंतर से तय परिणाम किस तरह प्रभावित हुआ। सबनानी की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि विचारण का इस्तेमाल आरोपों का आधार खोजने के लिए नहीं किया जा सकता। सबनानी बोले- कांग्रेस का झूठ कोर्ट ने फिर उजागर किया सुप्रीम कोर्ट से पीसी शर्मा की याचिका खारिज होने के बाद भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कांग्रेस पर निशाना साधा। सबनानी ने कहा कि पीसी शर्मा पहले जनता से हारे, फिर हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट से भी हार गए। उन्होंने कहा कि एक बार फिर कांग्रेस का झूठ कोर्ट ने उजागर कर दिया है। सबनानी ने आरोप लगाया कि ईवीएम पर सवाल उठाना कांग्रेस और उसके नेताओं का काम बन गया है। जनता के जनमत का मजाक उड़ाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि विधि विशेषज्ञों से राय लेकर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट के फैसले ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है।

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