बांका जिले के सभी 11 प्रखंडों में फाइलेरिया (हाथीपांव) खत्म करने और माइक्रो फाइलेरिया पहचानने के लिए ‘नाइट ब्लड सर्वे’ अभियान तेजी से चल रहा है। नेतृत्व सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह और DVBDCO डॉ. एस. दास कर रहे हैं। नीमा गांव में तीन दिन के शिविर के बाद रजौन के पुनसिया बाजार स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) में सोमवार रात 10 बजे से सर्वे शुरू हुआ। वीबीडीसीओ रोहित सुमन, DCM नंदन कुमार झा, बीसीएम विष्णुदेव कापरी, सीएचओ दिव्या भारती, जीएनएम राजेश कुमार, एएनएम कंचन कुमारी, पूजा कुमारी, लैब तकनीशियन राजेश रंजन और पीरामल फाउंडेशन से सुमित कुमार पूरी रात मौजूद रहे। खबर लिखे जाने तक करीब 40 ग्रामीणों के रक्त के नमूने लिए गए, लक्ष्य 100 से अधिक सैंपल का था। बीसीएम विष्णुदेव कापरी ने बताया, तीन चयनित गांवों से 300-300 सैंपल लेने का लक्ष्य है। पुनसिया बाजार HWC के बाद मंगलवार रात 10 बजे से मध्य विद्यालय पुनसिया में कैंप लगेगा। यह शिविर पुनसिया में 300 का लक्ष्य पूरा होने तक चलेगा, फिर टीम तीसरे गांव लहोरिया जाएगी। अधिकारियों ने अपील की है कि फाइलेरिया के छोटे परजीवी रात में ही सक्रिय होते हैं और लक्षण दिखने में कई साल लगते हैं। 20 वर्ष से अधिक उम्र के सभी ग्रामीण समय पर जांच करवाएं। बांका जिले के सभी 11 प्रखंडों में फाइलेरिया (हाथीपांव) खत्म करने और माइक्रो फाइलेरिया पहचानने के लिए ‘नाइट ब्लड सर्वे’ अभियान तेजी से चल रहा है। नेतृत्व सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह और DVBDCO डॉ. एस. दास कर रहे हैं। नीमा गांव में तीन दिन के शिविर के बाद रजौन के पुनसिया बाजार स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) में सोमवार रात 10 बजे से सर्वे शुरू हुआ। वीबीडीसीओ रोहित सुमन, DCM नंदन कुमार झा, बीसीएम विष्णुदेव कापरी, सीएचओ दिव्या भारती, जीएनएम राजेश कुमार, एएनएम कंचन कुमारी, पूजा कुमारी, लैब तकनीशियन राजेश रंजन और पीरामल फाउंडेशन से सुमित कुमार पूरी रात मौजूद रहे। खबर लिखे जाने तक करीब 40 ग्रामीणों के रक्त के नमूने लिए गए, लक्ष्य 100 से अधिक सैंपल का था। बीसीएम विष्णुदेव कापरी ने बताया, तीन चयनित गांवों से 300-300 सैंपल लेने का लक्ष्य है। पुनसिया बाजार HWC के बाद मंगलवार रात 10 बजे से मध्य विद्यालय पुनसिया में कैंप लगेगा। यह शिविर पुनसिया में 300 का लक्ष्य पूरा होने तक चलेगा, फिर टीम तीसरे गांव लहोरिया जाएगी। अधिकारियों ने अपील की है कि फाइलेरिया के छोटे परजीवी रात में ही सक्रिय होते हैं और लक्षण दिखने में कई साल लगते हैं। 20 वर्ष से अधिक उम्र के सभी ग्रामीण समय पर जांच करवाएं।

