मिर्जापुर में पितृपक्ष की अमावस्या पर शनिवार को विंध्याचल के रामगया घाट पर कई श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने पितरों के मोक्ष के लिए विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाट पर सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। इस घाट का धार्मिक महत्व भगवान राम से जुड़ा है। मान्यता है कि रावण वध के बाद भगवान श्रीराम ने यहीं अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था। इसी वजह से यह जगह रामगया घाट के नाम से जानी जाती है। बिहार के गया की तरह यहां भी पिंडदान की खास मान्यता है। श्रद्धालु मुंडन और गंगा स्नान के बाद जौ, तिल, चावल, शहद और खोवा से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करते हैं। उनका मानना है कि इससे पितरों को शांति मिलती है।

