दिवाली में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन इस बार मिठाई बाजार में त्योहार जैसी रौनक नजर नहीं आ रही है। आमतौर पर दिवाली से डेढ़ से दो महीने पहले ही मिठाई की दुकानों पर ऑर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं, लेकिन इस बार दुकानदार बड़े ऑर्डर का इंतजार कर रहे हैं। मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाले घी, दूध, मावा, चीनी और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ने से लागत में इजाफा हुआ है। इसका असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है। दुकानदारों का कहना है कि महंगाई के चलते लोग कम मिठाई खरीदने की योजना बना रहे हैं। हफ्ते भर पहले भी नहीं मिले बड़े ऑर्डर साकेत स्थित कैलाश डेरी एंड स्वीट के संचालक राजा ने बताया कि इस बार दिवाली को लेकर अभी तक बाजार में कोई खास उत्साह नहीं दिख रहा है। करवाचौथ पर कारोबार अच्छा रहा, लेकिन दिवाली के लिए अब तक एक भी बड़ा ऑर्डर नहीं मिला है। पहले दिवाली से डेढ़ से दो महीने पहले ही दुकानों पर ऑर्डर आने शुरू हो जाते थे। इस बार त्योहार नजदीक होने के बावजूद कारोबार की रफ्तार धीमी है। 300 की मिठाई बनाने की लागत 400 रुपए तक पहुंची राजा के अनुसार, पिछले साल जिस मिठाई की कीमत 300 से 350 रुपए प्रति किलो थी, उसकी लागत इस बार करीब 100 रुपए प्रति किलो तक बढ़ गई है। घी, दूध, चीनी और ड्राई फ्रूट्स महंगे होने से मिठाई तैयार करना महंगा हो गया है। पहले जिस ग्राहक का दिवाली का बजट एक लाख रुपए होता था, उसे अब उतनी ही खरीदारी के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं। दुकानदारों का कहना है कि लोग महंगाई के चलते हर कोई खर्च सोच-समझकर कर रहे है। शुद्ध मिठाइयों पर जोर, फूड कलर का नहीं करते इस्तेमाल दुकानदारों का कहना है कि महंगाई के बावजूद उन्होंने दिवाली की तैयारियां पूरी कर ली हैं। शुद्ध मावे से बनी मिठाइयां तैयार की जा रही हैं। संचालक के अनुसार, मिठाइयों में किसी तरह के रंग या फूड कलर का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यहां मिल्क केक, मलाई बर्फी, छेना, रस मलाई, रसगुल्ले, गाय के दूध की रबड़ी और आटे के लड्डू जैसी मिठाइयां उपलब्ध हैं। देसी घी और ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट पैक की नई रेंज दिवाली को देखते हुए दुकान पर देसी घी और ड्राई फ्रूट्स से तैयार गिफ्ट पैक की नई रेंज भी तैयार की गई है। दुकानदारों को उम्मीद है कि दिवाली नजदीक आने के साथ ग्राहकों की आवाजाही और ऑर्डर बढ़ेंगे। फिलहाल बाजार में खरीदारी की रफ्तार धीमी बनी हुई है।

