पटनाइट्स CA ने ‘हसीनाओं’ के विदेश में खपाए 457 करोड़:’बंटी-बबली’ संग मिलकर 11 देशों में बनाई फर्जी कंपनियां, बॉलीवुड के काले कारनामे एक्सपोज

पटनाइट्स CA ने ‘हसीनाओं’ के विदेश में खपाए 457 करोड़:’बंटी-बबली’ संग मिलकर 11 देशों में बनाई फर्जी कंपनियां, बॉलीवुड के काले कारनामे एक्सपोज

457 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन… 11 देश… फर्जी कंपनियां… । यह कहानी सिर्फ टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच और बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की पड़ताल में अब इस पूरे खेल की कड़ी मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचती दिख रही है। जांच में पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन के साथ दो और नाम सामने आए हैं। दोनों मुंबई में रहते हैं, लेकिन मूल रूप से पटना के हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों टैक्स चोरी करने वालों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के बीच की कड़ी के तौर पर काम कर रहे थे। दोनों की तलाश चल रही है। सवाल बड़ा है-फर्जी कंपनियों के जरिए देश से 457 करोड़ रुपए विदेश कैसे भेजे गए, इसमें फिल्म इंडस्ट्री का कनेक्शन क्या है? संडे बिग स्टोरी में आइए, पूरी कहानी समझते हैं…। जांच में सामने आए प्रेम झा और श्वेता दत्ता इनकम टैक्स की इंवेस्टिगेशन टीम ने जब इस पूरे मामले की जांच शुरू की तो पटना के सीए गौरव गुंजन के संपर्कों और दस्तावेजों से दो नाम सामने आए। पहला नाम प्रेम कुमार झा का है। दूसरा नाम श्वेता दत्ता का। श्वेता कंकड़बाग इलाके की रहने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों आपस में रिश्तेदार हैं। जांच के मुताबिक, प्रेम कुमार झा ने ही श्वेता की मुलाकात चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन से करवाई थी। अब दोनों की तलाश चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में दोनों की भूमिका कितनी बड़ी थी और किस-किस व्यक्ति से उनका संपर्क था। एक इनवॉयस ने खोला फिल्म इंडस्ट्री का रास्ता इस केस की जांच करते हुए इनकम टैक्स की टीम जब गौरव गुंजन के ठिकाने पर पहुंची, तो कुछ ऐसे दस्तावेज मिले, जिन्होंने जांच की दिशा ही बदल दी। छापेमारी में कुछ इनवॉयस जब्त किए गए। ये इनवॉयस फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े थे। इन दस्तावेजों में विदेशों में खर्च दिखाया गया था। जांच के मुताबिक, इन्हीं के आधार पर पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने गलत तरीके से फॉर्म 15CB का सर्टिफिकेट जारी किया। इसके बाद अलग-अलग कंपनियों के जरिए पिछले दो सालों में 457 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। यहीं से जांच की कड़ी मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंची। कमीशन लेकर चल रहा था खेल सूत्रों के मुताबिक, प्रेम झा और श्वेता दत्ता की मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में गहरी पैठ है। जांच में यह बात सामने आई है कि टैक्स चोरी कर इंडस्ट्री की ब्लैकमनी को खपाने में दोनों की अहम भूमिका थी। इसके बदले दोनों ने कमीशन के तौर पर मोटी रकम ली। गलत सर्टिफिकेट जारी करने वाले गौरव गुंजन ने भी अलग से कमीशन लिया। हालांकि, किसने कितना कमीशन लिया, यह अभी जांच में स्पष्ट नहीं हुआ है। इनकम टैक्स की टीम ने गौरव गुंजन से तीन दिनों तक पूछताछ की थी। इस दौरान कमीशन से जुड़े सवालों के जवाब जानने की कोशिश की गई, लेकिन टीम को सही जवाब नहीं मिल पाया। अब EOU इस कड़ी को जोड़ने में जुटी है। 11 देशों तक पहुंचा 457 करोड़ का ट्रांजेक्शन जांच में सामने आया है कि सेल कंपनियों के जरिए पिछले दो सालों में 457 करोड़ रुपए 11 देशों में भेजे गए। इनमें सबसे ज्यादा पैसा हांगकांग, मलेशिया, इंडोनेशिया और USA भेजा गया। यानी मामला सिर्फ बिहार या देश के भीतर का नहीं है। पैसे का ट्रांजेक्शन कई देशों तक पहुंचा है। इसी वजह से आगे इस केस की जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मामले में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) को भी जोड़ा जाएगा। आगे चलकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू (DRI) की एंट्री हो सकती है। 6 कंपनियां और एक NRI नामजद पटना में दर्ज FIR में भारत से विदेशी अकाउंट्स में रुपए भेजने वाली 6 कंपनियों और एक NRI का नाम शामिल है। इन कंपनियों के लिए पटना के सीए ने सर्टिफिकेट जारी किया था। इनमें एक कंपनी है धर्मेश टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड। यह कंपनी अब तक 12 करोड़ रुपए विदेश भेज चुकी है। कागज पर इसका एड्रेस मुंबई के अंधेरी ईस्ट स्थित जेबी नगर का है। हालांकि, इनकम टैक्स के सूत्रों के अनुसार यह कंपनी पटना की है। अकेले इस कंपनी ने 2024 में 9.68 करोड़ रुपए विदेशी अकाउंट में भेजे। आखिर फर्जीवाड़ा सामने कैसे आया? इसकी कहानी बैंकों से शुरू होती है। जिन कंपनियों के जरिए भारत से विदेश पैसा भेजा गया, उनके बैंक अकाउंट्स में लंबे समय तक कोई रेगुलर ट्रांजेक्शन नहीं हो रहा था। कभी-कभार ही कोई लेन-देन होता था। फिर अचानक कुछ अकाउंट्स में बड़े स्तर पर रुपए आए और विदेश भेजे गए। बैंकों को यह ट्रांजेक्शन असामान्य लगा। उन्होंने ऐसे कई अकाउंट्स की डिटेल रिपोर्ट तैयार की और उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेजा। यहीं से इनकम टैक्स की इंवेस्टिगेशन टीम एक्टिव हुई। कंपनियों की कुंडली खंगाली तो खुला राज इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने विदेश रुपए भेजने वाली कंपनियों की पूरी लिस्ट तैयार की। कंपनियों की जांच शुरू हुई तो पता चला कि ये अलग-अलग पते पर रजिस्टर्ड थीं, लेकिन कई कंपनियां पूरी तरह एक्टिव नहीं थीं। जांच में यह भी सामने आया कि पिछले 5 सालों में कई कंपनियों ने रेगुलर तौर पर ITR फाइल नहीं किया था। किसी ने एक बार तो किसी ने दो बार ही ITR भरा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये कंपनियां फर्जी थीं और टैक्स चोरी कर ब्लैक मनी को विदेश भेजने का जरिया बनाई गई थीं। अब अगला सवाल था—इन कंपनियों के लिए सर्टिफिकेट किसने जारी किया? जांच इसी सवाल से पटना के सीए गौरव गुंजन तक पहुंची। 18 अगस्त को पटना में सीए के घर छापा इनकम टैक्स की इंवेस्टिगेशन टीम ने जब यह पता लगाया कि विदेश रुपए भेजने वाली कंपनियों के लिए सर्टिफिकेट किस चार्टर्ड अकाउंटेंट ने जारी किए, तो पटना के गौरव गुंजन का नाम सामने आया। गौरव अपने परिवार के साथ पटना के दानापुर स्थित मिथिला कॉलोनी के दुलार इन्क्लेव अपार्टमेंट के सी ब्लॉक के फ्लैट नंबर 208 में रहते हैं। अब 5 साल के बैंक ट्रांजेक्शन की जांच FIR दर्ज होने के बाद जांच का अगला फोकस बैंक अकाउंट्स पर है। FIR में नामजद हर कंपनी और NRI के बैंक अकाउंट्स की डिटेल खंगाली जा रही है। दोनों एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बैंकों से पूछा गया है कि इन कंपनियों और NRI के किस-किस भारतीय बैंक में कितने अकाउंट हैं। पिछले 5 साल में इन अकाउंट्स में कब-कब कितना ट्रांजेक्शन हुआ, इसकी डिटेल भी मांगी गई है। दूसरी तरफ EOU ने इस पूरे मामले की जांच के लिए DIG डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लो की अगुवाई में SIT बनाई है। केस का इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ASP प्रवीन्द्र भारती को बनाया गया है। अब तक EOU की जांच में भी इस फर्जीवाड़े का कनेक्शन मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री से मिला है। फोन कॉल से जुड़ रही पूरी कड़ी EOU अब गौरव गुंजन, श्वेता दत्ता और प्रेम कुमार झा समेत सामने आए सभी लोगों के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाल रही है। 100 करोड़ की फिल्म और टैक्स चोरी का खेल ऐसे समझिए मान लीजिए कोई फिल्म 100 करोड़ रुपए के बजट पर बनी। फिल्म ने उतना ही प्रॉफिट भी कमा लिया। अब प्रोडक्शन हाउस अपना प्रॉफिट कम दिखाना चाहता है। इसके लिए वह अपने खर्च को बढ़ाकर दिखाता है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके लिए फर्जी कंपनियों के इनवॉयस का इस्तेमाल किया गया। इनवॉयस के जरिए विदेशों से सामान खरीदने का खर्च दिखाया गया। यानी कागज पर खर्च बढ़ा और मुनाफा कम दिखाई दिया। अब तक की जांच में इसी तरह का खेल सामने आया है। आने वाले दिनों में जांच के लिए बिहार से टीम मुंबई भी जा सकती है। आखिर फॉर्म 15CB इतना महत्वपूर्ण क्यों है? भारत से विदेश पैसा भेजने के लिए RBI के निर्देशों के तहत मास्टर डायरेक्शन बना हुआ है। अब जांच के अगले पड़ाव पर नजर एक सीए से शुरू हुई जांच अब मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच चुकी है। प्रेम कुमार झा और श्वेता दत्ता की भूमिका की जांच चल रही है। गौरव गुंजन से पूछताछ हो चुकी है। कंपनियों के बैंक अकाउंट्स की 5 साल की डिटेल खंगाली जा रही है। EOU की SIT अब फोन कॉल, बैंक ट्रांजेक्शन, कंपनियों के दस्तावेज और विदेश भेजे गए पैसों की कड़ियों को जोड़ रही है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ होगा कि 457 करोड़ रुपए के इस पूरे नेटवर्क में कौन किससे जुड़ा था, किसने क्या भूमिका निभाई और कमीशन का पैसा आखिर किस-किस तक पहुंचा? 457 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन… 11 देश… फर्जी कंपनियां… । यह कहानी सिर्फ टैक्स चोरी तक सीमित नहीं है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच और बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की पड़ताल में अब इस पूरे खेल की कड़ी मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंचती दिख रही है। जांच में पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन के साथ दो और नाम सामने आए हैं। दोनों मुंबई में रहते हैं, लेकिन मूल रूप से पटना के हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों टैक्स चोरी करने वालों और चार्टर्ड अकाउंटेंट के बीच की कड़ी के तौर पर काम कर रहे थे। दोनों की तलाश चल रही है। सवाल बड़ा है-फर्जी कंपनियों के जरिए देश से 457 करोड़ रुपए विदेश कैसे भेजे गए, इसमें फिल्म इंडस्ट्री का कनेक्शन क्या है? संडे बिग स्टोरी में आइए, पूरी कहानी समझते हैं…। जांच में सामने आए प्रेम झा और श्वेता दत्ता इनकम टैक्स की इंवेस्टिगेशन टीम ने जब इस पूरे मामले की जांच शुरू की तो पटना के सीए गौरव गुंजन के संपर्कों और दस्तावेजों से दो नाम सामने आए। पहला नाम प्रेम कुमार झा का है। दूसरा नाम श्वेता दत्ता का। श्वेता कंकड़बाग इलाके की रहने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों आपस में रिश्तेदार हैं। जांच के मुताबिक, प्रेम कुमार झा ने ही श्वेता की मुलाकात चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन से करवाई थी। अब दोनों की तलाश चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में दोनों की भूमिका कितनी बड़ी थी और किस-किस व्यक्ति से उनका संपर्क था। एक इनवॉयस ने खोला फिल्म इंडस्ट्री का रास्ता इस केस की जांच करते हुए इनकम टैक्स की टीम जब गौरव गुंजन के ठिकाने पर पहुंची, तो कुछ ऐसे दस्तावेज मिले, जिन्होंने जांच की दिशा ही बदल दी। छापेमारी में कुछ इनवॉयस जब्त किए गए। ये इनवॉयस फिल्म प्रोडक्शन से जुड़े थे। इन दस्तावेजों में विदेशों में खर्च दिखाया गया था। जांच के मुताबिक, इन्हीं के आधार पर पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने गलत तरीके से फॉर्म 15CB का सर्टिफिकेट जारी किया। इसके बाद अलग-अलग कंपनियों के जरिए पिछले दो सालों में 457 करोड़ रुपए विदेश भेजे गए। यहीं से जांच की कड़ी मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंची। कमीशन लेकर चल रहा था खेल सूत्रों के मुताबिक, प्रेम झा और श्वेता दत्ता की मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में गहरी पैठ है। जांच में यह बात सामने आई है कि टैक्स चोरी कर इंडस्ट्री की ब्लैकमनी को खपाने में दोनों की अहम भूमिका थी। इसके बदले दोनों ने कमीशन के तौर पर मोटी रकम ली। गलत सर्टिफिकेट जारी करने वाले गौरव गुंजन ने भी अलग से कमीशन लिया। हालांकि, किसने कितना कमीशन लिया, यह अभी जांच में स्पष्ट नहीं हुआ है। इनकम टैक्स की टीम ने गौरव गुंजन से तीन दिनों तक पूछताछ की थी। इस दौरान कमीशन से जुड़े सवालों के जवाब जानने की कोशिश की गई, लेकिन टीम को सही जवाब नहीं मिल पाया। अब EOU इस कड़ी को जोड़ने में जुटी है। 11 देशों तक पहुंचा 457 करोड़ का ट्रांजेक्शन जांच में सामने आया है कि सेल कंपनियों के जरिए पिछले दो सालों में 457 करोड़ रुपए 11 देशों में भेजे गए। इनमें सबसे ज्यादा पैसा हांगकांग, मलेशिया, इंडोनेशिया और USA भेजा गया। यानी मामला सिर्फ बिहार या देश के भीतर का नहीं है। पैसे का ट्रांजेक्शन कई देशों तक पहुंचा है। इसी वजह से आगे इस केस की जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मामले में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) को भी जोड़ा जाएगा। आगे चलकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू (DRI) की एंट्री हो सकती है। 6 कंपनियां और एक NRI नामजद पटना में दर्ज FIR में भारत से विदेशी अकाउंट्स में रुपए भेजने वाली 6 कंपनियों और एक NRI का नाम शामिल है। इन कंपनियों के लिए पटना के सीए ने सर्टिफिकेट जारी किया था। इनमें एक कंपनी है धर्मेश टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड। यह कंपनी अब तक 12 करोड़ रुपए विदेश भेज चुकी है। कागज पर इसका एड्रेस मुंबई के अंधेरी ईस्ट स्थित जेबी नगर का है। हालांकि, इनकम टैक्स के सूत्रों के अनुसार यह कंपनी पटना की है। अकेले इस कंपनी ने 2024 में 9.68 करोड़ रुपए विदेशी अकाउंट में भेजे। आखिर फर्जीवाड़ा सामने कैसे आया? इसकी कहानी बैंकों से शुरू होती है। जिन कंपनियों के जरिए भारत से विदेश पैसा भेजा गया, उनके बैंक अकाउंट्स में लंबे समय तक कोई रेगुलर ट्रांजेक्शन नहीं हो रहा था। कभी-कभार ही कोई लेन-देन होता था। फिर अचानक कुछ अकाउंट्स में बड़े स्तर पर रुपए आए और विदेश भेजे गए। बैंकों को यह ट्रांजेक्शन असामान्य लगा। उन्होंने ऐसे कई अकाउंट्स की डिटेल रिपोर्ट तैयार की और उसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेजा। यहीं से इनकम टैक्स की इंवेस्टिगेशन टीम एक्टिव हुई। कंपनियों की कुंडली खंगाली तो खुला राज इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने विदेश रुपए भेजने वाली कंपनियों की पूरी लिस्ट तैयार की। कंपनियों की जांच शुरू हुई तो पता चला कि ये अलग-अलग पते पर रजिस्टर्ड थीं, लेकिन कई कंपनियां पूरी तरह एक्टिव नहीं थीं। जांच में यह भी सामने आया कि पिछले 5 सालों में कई कंपनियों ने रेगुलर तौर पर ITR फाइल नहीं किया था। किसी ने एक बार तो किसी ने दो बार ही ITR भरा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, ये कंपनियां फर्जी थीं और टैक्स चोरी कर ब्लैक मनी को विदेश भेजने का जरिया बनाई गई थीं। अब अगला सवाल था—इन कंपनियों के लिए सर्टिफिकेट किसने जारी किया? जांच इसी सवाल से पटना के सीए गौरव गुंजन तक पहुंची। 18 अगस्त को पटना में सीए के घर छापा इनकम टैक्स की इंवेस्टिगेशन टीम ने जब यह पता लगाया कि विदेश रुपए भेजने वाली कंपनियों के लिए सर्टिफिकेट किस चार्टर्ड अकाउंटेंट ने जारी किए, तो पटना के गौरव गुंजन का नाम सामने आया। गौरव अपने परिवार के साथ पटना के दानापुर स्थित मिथिला कॉलोनी के दुलार इन्क्लेव अपार्टमेंट के सी ब्लॉक के फ्लैट नंबर 208 में रहते हैं। अब 5 साल के बैंक ट्रांजेक्शन की जांच FIR दर्ज होने के बाद जांच का अगला फोकस बैंक अकाउंट्स पर है। FIR में नामजद हर कंपनी और NRI के बैंक अकाउंट्स की डिटेल खंगाली जा रही है। दोनों एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बैंकों से पूछा गया है कि इन कंपनियों और NRI के किस-किस भारतीय बैंक में कितने अकाउंट हैं। पिछले 5 साल में इन अकाउंट्स में कब-कब कितना ट्रांजेक्शन हुआ, इसकी डिटेल भी मांगी गई है। दूसरी तरफ EOU ने इस पूरे मामले की जांच के लिए DIG डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लो की अगुवाई में SIT बनाई है। केस का इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ASP प्रवीन्द्र भारती को बनाया गया है। अब तक EOU की जांच में भी इस फर्जीवाड़े का कनेक्शन मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री से मिला है। फोन कॉल से जुड़ रही पूरी कड़ी EOU अब गौरव गुंजन, श्वेता दत्ता और प्रेम कुमार झा समेत सामने आए सभी लोगों के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाल रही है। 100 करोड़ की फिल्म और टैक्स चोरी का खेल ऐसे समझिए मान लीजिए कोई फिल्म 100 करोड़ रुपए के बजट पर बनी। फिल्म ने उतना ही प्रॉफिट भी कमा लिया। अब प्रोडक्शन हाउस अपना प्रॉफिट कम दिखाना चाहता है। इसके लिए वह अपने खर्च को बढ़ाकर दिखाता है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके लिए फर्जी कंपनियों के इनवॉयस का इस्तेमाल किया गया। इनवॉयस के जरिए विदेशों से सामान खरीदने का खर्च दिखाया गया। यानी कागज पर खर्च बढ़ा और मुनाफा कम दिखाई दिया। अब तक की जांच में इसी तरह का खेल सामने आया है। आने वाले दिनों में जांच के लिए बिहार से टीम मुंबई भी जा सकती है। आखिर फॉर्म 15CB इतना महत्वपूर्ण क्यों है? भारत से विदेश पैसा भेजने के लिए RBI के निर्देशों के तहत मास्टर डायरेक्शन बना हुआ है। अब जांच के अगले पड़ाव पर नजर एक सीए से शुरू हुई जांच अब मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री तक पहुंच चुकी है। प्रेम कुमार झा और श्वेता दत्ता की भूमिका की जांच चल रही है। गौरव गुंजन से पूछताछ हो चुकी है। कंपनियों के बैंक अकाउंट्स की 5 साल की डिटेल खंगाली जा रही है। EOU की SIT अब फोन कॉल, बैंक ट्रांजेक्शन, कंपनियों के दस्तावेज और विदेश भेजे गए पैसों की कड़ियों को जोड़ रही है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ होगा कि 457 करोड़ रुपए के इस पूरे नेटवर्क में कौन किससे जुड़ा था, किसने क्या भूमिका निभाई और कमीशन का पैसा आखिर किस-किस तक पहुंचा?  

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