पंजाब सरकार की नीतियों के खिलाफ राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का गुस्सा बढ़ गया है। पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल सर्विसेज यूनियन (PSMSU) और साझा मुलजिम मंच के आह्वान पर मिनी सचिवालय में जारी कलम छोड़ हड़ताल को बढ़ाकर 21 अगस्त तक कर दिया गया है। इसके बाद 22 और 23 अगस्त को शनिवार-रविवार की दो साप्ताहिक छुट्टी होने के कारण अब सरकारी दफ्तरों में कामकाज सीधे 24 अगस्त को ही हो सकेगा। युनियन पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों के उग्र रुख की मुख्य वजह पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा द्वारा कर्मचारियों और पेंशनरों को ‘एंटी स्टेट’ कहा जाना बताया जा रहा है। यूनियन की आपातकालीन ऑनलाइन बैठक में इस बयान और सरकार द्वारा डीए पर रोक लगाने के नोटिफिकेशन का कड़ा विरोध किया गया। कर्मचारियों ने मिनी सचिवालय परिसर में अपने कंप्यूटर बंद रखकर पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया। लंबा खिंच सकता है कर्मचारियों का संघर्ष युनियन अध्यक्ष विशालवीर ने बताया कि 22 को सांझा मुलाजिम और पीएसएमएसयू की स्टेट बॉडी की ऑनलाइन मीटिंग तय की गई है। इसमें अगले संघर्ष के बारे में रणनीति बनाई जाएगी। विशालवीर ने कहा कि कर्मचारियों का उद्देश्य लोगों को तंग करना नहीं है। सरकार ने कर्मचारियों और पैंशनरों को संघर्ष के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर 21 अगस्त तक कर्मचारियों और पैंशनरों का मांगों पर कोई फैसला ना आया तो हड़ताल को आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें लोगों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदार सरकार खुद होगी। 27 अगस्त को पूरा पंजाब बंद करने की चेतावनी
यूनियन नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें जल्द न मानीं, तो 27 अगस्त को ‘पंजाब बंद’ का आह्वान किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य की सरकारी मशीनरी पूरी तरह ठप हो जाएगी। यूनियन नेताओं ने कहा कि कोर्ट के स्पष्ट फैसलों के बावजूद सरकार महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान नहीं कर रही है। कर्मचारियों की मुख्य मांगें: महंगाई भत्ता (DA): पेंडिंग डीए की किश्तें तुरंत जारी कर इसे वर्तमान 31% से बढ़ाकर 48% किया जाए। पुरानी पेंशन योजना (OPS): चुनावी वादे के मुताबिक पुरानी पेंशन योजना को बिना किसी शर्त के तुरंत बहाल किया जाए। कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: विभिन्न विभागों में सालों से कार्यरत आउटसोर्स व कच्चे कर्मचारियों को सेवा में पक्का किया जाए। पुराने समझौतों का क्रियान्वयन: वर्ष 2023 में कर्मचारियों के साथ हुए लिखित समझौतों और आश्वासनों को अमलीजामा पहनाया जाए। आम जनता बेहाल, फाइलों की आवाजाही रुकी हड़ताल के कारण दफ्तरों से निकलने वाली केवल पठानकोट में ही 3000 के करीब फाइलें पूरी तरह फंस गई हैं। दूर-दराज के गांवों से प्रशासनिक कार्यों के लिए मिनी सचिवालय पहुंच रहे आम लोगों को बिना काम कराए निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। यूनियन नेताओं जगदीप काटल और गुरदीप कुमार सफरी ने कहा कि आम जनता को हो रही असुविधा की पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की बेरुखी की है। यूनियन की अगली राज्यस्तरीय बैठक 22 अगस्त को होगी, जिसमें संघर्ष को और तेज करने के लिए बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

