नीतीश ने देवेश चंद्र को राज्यसभा भेजने से मना किया:JDU को कह के हराया, सबसे अमीर MLC ने बगावत कर BJP को पटखनी दी

नीतीश ने देवेश चंद्र को राज्यसभा भेजने से मना किया:JDU को कह के हराया, सबसे अमीर MLC ने बगावत कर BJP को पटखनी दी

‘हम पुदीना सिंह हैं न.. 23 अक्टूबर को नीरज का गैस निकाल देंगे। जनता मालिक है और हम सबसे अपील कर रहे हैं कि चुनाव में अनुज सिंह को जीताएं और बाकी सबका जमानत जब्त करा दें।’ ये कहना है, मोकामा से विधायक और JDU के बाहुबली नेता अनंत सिंह का। अनंत सिंह बोल रहे हैं, हम बागी भी नहीं हैं और पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवार को हराएंगे भी। लगातार पटना स्नातक सीट से JDU कैंडिडेट नीरज कुमार के खिलाफ रोड शो कर रहे हैं। जनसुराज के कैंडिडेट अनुज सिंह को अपना कैंडिडेट बता रहे हैं। MLC चुनाव के किस्से में आज पढ़िए और देखिए पार्टी से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले 3 दिग्गज नेताओं की कहानी। कैसे देवेश चंद्र ठाकुर ने राज्यसभा नहीं भेजे जाने पर अपनी ही पार्टी के नेता को हरा दिया। बिहार विधान परिषद के सबसे अमीर नेता ने अपनी ही पार्टी के नेता को निर्दलीय लड़कर पटखनी दी। बात सबसे पहले दे‌वेश चंद्र ठाकुर की कभी नीतीश के सबसे भरोसेमंद थे, पार्टी को किराए का घर बताया बात 2014 की है। नीतीश कुमार BJP से अलग हो गए थे। BJP गुजरात के तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी को अपना PM कैंडिडेट घोषित कर चुकी थी। इस दौरान देवेश चंद्र ठाकुर टीवी पर JDU का चेहरा थे। नीतीश कुमार ने इन्हें पार्टी के प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी । जितनी स्पष्ट हिन्दी, उतनी ही फर्राटेदार अंग्रेजी। सभी जगह नीतीश कुमार का पक्ष देवेश चंद्र ठाकुर मजबूती से रख रहे थे। कांग्रेस के रास्ते JDU में आए देवेश चंद्र नीतीश कुमार के सबसे खास नेता बन गए थे। तब कई बड़े कार्यक्रम में नीतीश उन्हें अपने बगल में बैठा रहे थे। देवेश की इच्छा बिहार से निकलकर केंद्र की सियासत करने की थी। वे राज्यसभा की खाली हुई 2 सीटों में अपना मौका तलाश रहे थे। नीतीश कुमार इस बात के लिए राजी नहीं हुए। एक चर्चा इस बात की भी है कि वे शिवहर से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार इसके लिए भी तैयार नहीं हुए। फरवरी 2014 में ठाकुर ने JDU छोड़ने का ऐलान किया टिकट नहीं मिलने से देवेश चंद्र ठाकुर के स्वाभिमान को ठेस पहुंचा। उन्होंने ऐलान कर दिया कि तिरहुत स्नातक सीट से विधान परिषद का चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले JDU की सदस्यता और JDU कोटे से विधान परिषद की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा था, ‘JDU मेरे लिए किराए के घर जैसा था। विधान परिषद चुनाव जीतने के बाद ही किसी अन्य दल में जाने की सोचूंगा। किसी की औकात नहीं है जो परिषद चुनाव में हरा दे।’ देवेश चंद्र ठाकुर विधान परिषद का चुनाव लड़े और जीते भी। महाराष्ट्र के छात्र नेता से बिहार के सांसद तक का सफर तय किया सीतामढ़ी के डुमरा में 3 जुलाई 1953 को जन्मे देवेश चंद्र ठाकुर की राजनीतिक यात्रा कई पड़ावों से होकर गुजरी है। छात्र राजनीति से शुरुआत, महाराष्ट्र युवा कांग्रेस में सक्रियता, बिहार लौटकर विधानसभा चुनाव लड़ना, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद पहुंचना और फिर नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनने तक का उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। करीब दो दशक तक विधान परिषद की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद वे इसके सभापति बने। 2024 में JDU के टिकट पर सीतामढ़ी से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। JDU में MLC, मंत्री अब MP बने 2004 में देवेश चंद्र ठाकुर जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए। JDU से जुड़ने के बाद उनका राजनीतिक सफर एक नए चरण में पहुंचा। 2008 में वे तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से फिर विधान परिषद पहुंचे। इसी दौर में उन्हें नीतीश कुमार की सरकार में आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी मिली। 2. महाचंद्र प्रसाद सिंह; सांसद-विधायक बनने की चाह में दो बार गंवाया MLC पद बिहार की सियासत में नेताओं की चाह हमेशा ऊपरी सदन में बैठने की जगह निचले सदन का नेता बनने की होती है। ऐसे ही एक उदाहरण महाचंद्र प्रसाद सिंह हैं। इन्होंने दो बार विधान परिषद की अपनी सदस्यता गंवाई। एक बार सांसद बनने के लिए और दूसरी बार विधायक बनने के लिए। दोनों बार अपनी पार्टी से बागी हुए। BJP से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले अरबपति MLC को जानिए बागी होकर चुनाव लड़ने और पार्टी के कैंडिडेट को हराने वाले नेता में एक नाम सच्चिदानंद राय भी शामिल हैं। बात 2015 की है। सच्चिदानंद सारण स्थानीय निकाय कोटे से सिटिंग MLC थे। 2022 में जब टिकट देने की बारी आई तो पार्टी ने इनका टिकट काट दिया। इनकी जगह पर धर्मेंद्र कुमार को पार्टी का कैंडिडेट बनाया गया। सच्चिदानंद बहुत पहले से यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। टिकट कटने के बाद इन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। न केवल चुनाव लड़े, बल्कि NDA के कैंडिडेट को हराया भी। इस चुनाव में NDA के कैंडिडेट अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। अप्रैल 2022 में आए नतीजों में सच्चिदानंद राय को 2,819 वोट मिले थे। इन्होंने RJD के प्रत्याशी सुधांशु रंजन को हराया था। इन्हें 1,982 वोट मिले थे। BJP के कैंडिडेट धर्मेंद्र सिंह को मात्र 254 वोट मिले। वह तीसरे स्थान पर रहे। जनसुराज के रास्ते BJP में वापस लौटे विधान परिषद चुनाव जीतने के बाद सच्चिदानंद प्रशांत किशोर से प्रभावित होकर जन सुराज में शामिल हो गए थे। 2019 का लोकसभा चुनाव महाराजगंज से लड़ना चाहते थे। हालांकि आखिरी समय में इन्होंने अपना फैसला वापस लिया। 2024 के चुनाव में इनकी घर वापसी हुई और वापस BJP में लौट आए। अभी ये विधान परिषद में BJP को समर्थन दे रहे हैं।

विधान परिषद में सबसे अमीर, 890 करोड़ की संपत्ति चुनावी विश्लेषण करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिसर्च (ADR) के मुताबिक सच्चिदानंद राय बिहार विधान परिषद के सबसे अमीर सदस्य हैं। 2022 में दिए चुनावी हलफनामे के मुताबिक सच्चिदानंद राय 890 करोड़ के मालिक हैं। इन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियर की डिग्री ली है। इनका मुख्य कारोबार रियल एस्टेट का है। इसके अलावा ये आईटी कंपनी भी संचालित करते हैं। ‘हम पुदीना सिंह हैं न.. 23 अक्टूबर को नीरज का गैस निकाल देंगे। जनता मालिक है और हम सबसे अपील कर रहे हैं कि चुनाव में अनुज सिंह को जीताएं और बाकी सबका जमानत जब्त करा दें।’ ये कहना है, मोकामा से विधायक और JDU के बाहुबली नेता अनंत सिंह का। अनंत सिंह बोल रहे हैं, हम बागी भी नहीं हैं और पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवार को हराएंगे भी। लगातार पटना स्नातक सीट से JDU कैंडिडेट नीरज कुमार के खिलाफ रोड शो कर रहे हैं। जनसुराज के कैंडिडेट अनुज सिंह को अपना कैंडिडेट बता रहे हैं। MLC चुनाव के किस्से में आज पढ़िए और देखिए पार्टी से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले 3 दिग्गज नेताओं की कहानी। कैसे देवेश चंद्र ठाकुर ने राज्यसभा नहीं भेजे जाने पर अपनी ही पार्टी के नेता को हरा दिया। बिहार विधान परिषद के सबसे अमीर नेता ने अपनी ही पार्टी के नेता को निर्दलीय लड़कर पटखनी दी। बात सबसे पहले दे‌वेश चंद्र ठाकुर की कभी नीतीश के सबसे भरोसेमंद थे, पार्टी को किराए का घर बताया बात 2014 की है। नीतीश कुमार BJP से अलग हो गए थे। BJP गुजरात के तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी को अपना PM कैंडिडेट घोषित कर चुकी थी। इस दौरान देवेश चंद्र ठाकुर टीवी पर JDU का चेहरा थे। नीतीश कुमार ने इन्हें पार्टी के प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी । जितनी स्पष्ट हिन्दी, उतनी ही फर्राटेदार अंग्रेजी। सभी जगह नीतीश कुमार का पक्ष देवेश चंद्र ठाकुर मजबूती से रख रहे थे। कांग्रेस के रास्ते JDU में आए देवेश चंद्र नीतीश कुमार के सबसे खास नेता बन गए थे। तब कई बड़े कार्यक्रम में नीतीश उन्हें अपने बगल में बैठा रहे थे। देवेश की इच्छा बिहार से निकलकर केंद्र की सियासत करने की थी। वे राज्यसभा की खाली हुई 2 सीटों में अपना मौका तलाश रहे थे। नीतीश कुमार इस बात के लिए राजी नहीं हुए। एक चर्चा इस बात की भी है कि वे शिवहर से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार इसके लिए भी तैयार नहीं हुए। फरवरी 2014 में ठाकुर ने JDU छोड़ने का ऐलान किया टिकट नहीं मिलने से देवेश चंद्र ठाकुर के स्वाभिमान को ठेस पहुंचा। उन्होंने ऐलान कर दिया कि तिरहुत स्नातक सीट से विधान परिषद का चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले JDU की सदस्यता और JDU कोटे से विधान परिषद की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा था, ‘JDU मेरे लिए किराए के घर जैसा था। विधान परिषद चुनाव जीतने के बाद ही किसी अन्य दल में जाने की सोचूंगा। किसी की औकात नहीं है जो परिषद चुनाव में हरा दे।’ देवेश चंद्र ठाकुर विधान परिषद का चुनाव लड़े और जीते भी। महाराष्ट्र के छात्र नेता से बिहार के सांसद तक का सफर तय किया सीतामढ़ी के डुमरा में 3 जुलाई 1953 को जन्मे देवेश चंद्र ठाकुर की राजनीतिक यात्रा कई पड़ावों से होकर गुजरी है। छात्र राजनीति से शुरुआत, महाराष्ट्र युवा कांग्रेस में सक्रियता, बिहार लौटकर विधानसभा चुनाव लड़ना, निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधान परिषद पहुंचना और फिर नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनने तक का उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। करीब दो दशक तक विधान परिषद की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद वे इसके सभापति बने। 2024 में JDU के टिकट पर सीतामढ़ी से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। JDU में MLC, मंत्री अब MP बने 2004 में देवेश चंद्र ठाकुर जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हुए। JDU से जुड़ने के बाद उनका राजनीतिक सफर एक नए चरण में पहुंचा। 2008 में वे तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से फिर विधान परिषद पहुंचे। इसी दौर में उन्हें नीतीश कुमार की सरकार में आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेदारी मिली। 2. महाचंद्र प्रसाद सिंह; सांसद-विधायक बनने की चाह में दो बार गंवाया MLC पद बिहार की सियासत में नेताओं की चाह हमेशा ऊपरी सदन में बैठने की जगह निचले सदन का नेता बनने की होती है। ऐसे ही एक उदाहरण महाचंद्र प्रसाद सिंह हैं। इन्होंने दो बार विधान परिषद की अपनी सदस्यता गंवाई। एक बार सांसद बनने के लिए और दूसरी बार विधायक बनने के लिए। दोनों बार अपनी पार्टी से बागी हुए। BJP से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले अरबपति MLC को जानिए बागी होकर चुनाव लड़ने और पार्टी के कैंडिडेट को हराने वाले नेता में एक नाम सच्चिदानंद राय भी शामिल हैं। बात 2015 की है। सच्चिदानंद सारण स्थानीय निकाय कोटे से सिटिंग MLC थे। 2022 में जब टिकट देने की बारी आई तो पार्टी ने इनका टिकट काट दिया। इनकी जगह पर धर्मेंद्र कुमार को पार्टी का कैंडिडेट बनाया गया। सच्चिदानंद बहुत पहले से यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। टिकट कटने के बाद इन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। न केवल चुनाव लड़े, बल्कि NDA के कैंडिडेट को हराया भी। इस चुनाव में NDA के कैंडिडेट अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे। अप्रैल 2022 में आए नतीजों में सच्चिदानंद राय को 2,819 वोट मिले थे। इन्होंने RJD के प्रत्याशी सुधांशु रंजन को हराया था। इन्हें 1,982 वोट मिले थे। BJP के कैंडिडेट धर्मेंद्र सिंह को मात्र 254 वोट मिले। वह तीसरे स्थान पर रहे। जनसुराज के रास्ते BJP में वापस लौटे विधान परिषद चुनाव जीतने के बाद सच्चिदानंद प्रशांत किशोर से प्रभावित होकर जन सुराज में शामिल हो गए थे। 2019 का लोकसभा चुनाव महाराजगंज से लड़ना चाहते थे। हालांकि आखिरी समय में इन्होंने अपना फैसला वापस लिया। 2024 के चुनाव में इनकी घर वापसी हुई और वापस BJP में लौट आए। अभी ये विधान परिषद में BJP को समर्थन दे रहे हैं।

विधान परिषद में सबसे अमीर, 890 करोड़ की संपत्ति चुनावी विश्लेषण करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिसर्च (ADR) के मुताबिक सच्चिदानंद राय बिहार विधान परिषद के सबसे अमीर सदस्य हैं। 2022 में दिए चुनावी हलफनामे के मुताबिक सच्चिदानंद राय 890 करोड़ के मालिक हैं। इन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियर की डिग्री ली है। इनका मुख्य कारोबार रियल एस्टेट का है। इसके अलावा ये आईटी कंपनी भी संचालित करते हैं।  

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