नीतीश कुमार के 7 निश्चय योजना के तहत शुरू हुए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में सम्राट सरकार ने बदलाव किया है। अब बिहार के छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 4 लाख की जगह 2 लाख ही मिलेंगे। सरकार ने एक तरफ योजना को 2026 से 2031 तक जारी रखने और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 950 करोड़ रुपए मंजूर किया है। वहीं स्टडी लोन आधा हो गया है। सरकार के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने X पर पोस्ट किया- सरकार का खजाना खाली है। बिहार में उच्च घाटे के साथ-साथ भारी कर्ज का बोझ अत्यधिक चिंता का विषय है। खर्च के अनुपात में राज्य की अपनी कोई राजस्व प्राप्ति नहीं है। 2 लाख से अधिक के लिए PM-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पहले जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों (DRCC) के जरिए छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ मिलता था। इसके तहत 4 लाख रुपये तक का ऋण ब्याज-मुक्त था। अब 2 लाख रुपये से अधिक की राशि की जरूरत होने पर छात्रों को बैंक या प्रधानमंत्री विद्या-लक्ष्मी पोर्टल के जरिए स्टडी लोन के लिए जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने इस संबंध में पत्र जारी किया है। सरकार की नई व्यवस्था के तहत दो लाख रुपये से अधिक के शिक्षा लोन के लिए विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से अपनी सुविधा के अनुसार बैंक का चयन करना होगा। रेगुलर लोन चुकाने वालों को मिलेगी छूट बैंक से मिलने वाले अतिरिक्त शिक्षा ऋण पर ब्याज लगेगा। हालांकि, समय पर लोन चुकाने वाले विद्यार्थियों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन के तौर पर ब्याज में कुछ छूट दी जाएगी। नियमित रूप से और समय पर लोन की किस्त चुकाने वाले विद्यार्थियों को ब्याज में 30 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। छात्राओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेडर कैंडिडेट्स के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त छूट का भी प्रावधान है। तेजस्वी बोले- बिहार में आर्थिक संकट है पूरे मामले को लेकर नेचा प्रतिपक्ष ने सम्राट सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने X पर लिखा- ‘बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि सारा खजाना खाली है। वित्तीय दबाव इतना अधिक है कि सरकारी विभागों के कर्मचारियों, पेंशनधारकों को ससमय सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ठेकेदारों के बकाये भुगतान और अन्य विकासात्मक कार्यों के लिए राशि उपलब्ध नहीं है। अब तो छात्रों के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि भी घटा दी गयी है। छात्रवृत्ति को समाप्त किया जा रहा है।’ घाटे को लेकर भी सरकार पर निशाना तेजस्वी ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा देश के प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक रहा। यह GSDP का 5.8 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि राज्य में राजस्व घाटा बढ़ रहा है और कर्ज उससे भी तेज गति से बढ़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने राजस्व संग्रह बढ़ाने, बजटीय प्रबंधन सुधारने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार से दीर्घकालिक योजना की मांग की। जन सुराज बोली- 4 लाख भी पर्याप्त नहीं, अब आधी राशि क्यों? जन सुराज नेता कुमार सौरभ ने सरकार के फैसले को छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा, ‘मौजूदा समय में उच्च शिक्षा की फीस, हॉस्टल, किताब और दूसरे खर्च काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में 4 लाख रुपए की सीमा भी कई छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं थी। अब इसे घटाकर 2 लाख रुपए करने से गरीब छात्रों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।’ कुमार सौरभ ने नए संशोधन पत्र को दिखाते हुए सवाल उठाया कि जब सरकार योजना को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा रही है तो फिर छात्रों को मिलने वाली ऋण राशि में कटौती क्यों की जा रही है। ‘नीतीश मॉडल’ के दावे पर भी सवाल जन सुराज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘नीतीश मॉडल’ पर सरकार चलाने के दावे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह योजना 2016 में नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत शुरू हुई थी। कुमार सौरभ ने आरोप लगाया कि योजना की ऋण सीमा कम करना उसी योजना को कमजोर करने की दिशा में कदम है। उन्होंने पूछा, अगर सरकार वास्तव में युवाओं और उच्च शिक्षा को लेकर गंभीर है तो छात्रों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में कटौती क्यों की जा रही है? जन सुराज ने सवाल उठाया कि अगर सरकार की अपनी योजना छात्रों की पूरी जरूरत पूरी नहीं कर पाएगी तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र महंगी उच्च शिक्षा का खर्च कैसे उठा पाएंगे। नीतीश कुमार के 7 निश्चय योजना के तहत शुरू हुए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में सम्राट सरकार ने बदलाव किया है। अब बिहार के छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 4 लाख की जगह 2 लाख ही मिलेंगे। सरकार ने एक तरफ योजना को 2026 से 2031 तक जारी रखने और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 950 करोड़ रुपए मंजूर किया है। वहीं स्टडी लोन आधा हो गया है। सरकार के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने X पर पोस्ट किया- सरकार का खजाना खाली है। बिहार में उच्च घाटे के साथ-साथ भारी कर्ज का बोझ अत्यधिक चिंता का विषय है। खर्च के अनुपात में राज्य की अपनी कोई राजस्व प्राप्ति नहीं है। 2 लाख से अधिक के लिए PM-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पहले जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों (DRCC) के जरिए छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ मिलता था। इसके तहत 4 लाख रुपये तक का ऋण ब्याज-मुक्त था। अब 2 लाख रुपये से अधिक की राशि की जरूरत होने पर छात्रों को बैंक या प्रधानमंत्री विद्या-लक्ष्मी पोर्टल के जरिए स्टडी लोन के लिए जाना पड़ेगा। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने इस संबंध में पत्र जारी किया है। सरकार की नई व्यवस्था के तहत दो लाख रुपये से अधिक के शिक्षा लोन के लिए विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से अपनी सुविधा के अनुसार बैंक का चयन करना होगा। रेगुलर लोन चुकाने वालों को मिलेगी छूट बैंक से मिलने वाले अतिरिक्त शिक्षा ऋण पर ब्याज लगेगा। हालांकि, समय पर लोन चुकाने वाले विद्यार्थियों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन के तौर पर ब्याज में कुछ छूट दी जाएगी। नियमित रूप से और समय पर लोन की किस्त चुकाने वाले विद्यार्थियों को ब्याज में 30 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। छात्राओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेडर कैंडिडेट्स के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त छूट का भी प्रावधान है। तेजस्वी बोले- बिहार में आर्थिक संकट है पूरे मामले को लेकर नेचा प्रतिपक्ष ने सम्राट सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाए हैं। तेजस्वी ने X पर लिखा- ‘बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि सारा खजाना खाली है। वित्तीय दबाव इतना अधिक है कि सरकारी विभागों के कर्मचारियों, पेंशनधारकों को ससमय सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ठेकेदारों के बकाये भुगतान और अन्य विकासात्मक कार्यों के लिए राशि उपलब्ध नहीं है। अब तो छात्रों के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि भी घटा दी गयी है। छात्रवृत्ति को समाप्त किया जा रहा है।’ घाटे को लेकर भी सरकार पर निशाना तेजस्वी ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा देश के प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक रहा। यह GSDP का 5.8 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि राज्य में राजस्व घाटा बढ़ रहा है और कर्ज उससे भी तेज गति से बढ़ रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने राजस्व संग्रह बढ़ाने, बजटीय प्रबंधन सुधारने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार से दीर्घकालिक योजना की मांग की। जन सुराज बोली- 4 लाख भी पर्याप्त नहीं, अब आधी राशि क्यों? जन सुराज नेता कुमार सौरभ ने सरकार के फैसले को छात्रों के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा, ‘मौजूदा समय में उच्च शिक्षा की फीस, हॉस्टल, किताब और दूसरे खर्च काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में 4 लाख रुपए की सीमा भी कई छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं थी। अब इसे घटाकर 2 लाख रुपए करने से गरीब छात्रों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।’ कुमार सौरभ ने नए संशोधन पत्र को दिखाते हुए सवाल उठाया कि जब सरकार योजना को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा रही है तो फिर छात्रों को मिलने वाली ऋण राशि में कटौती क्यों की जा रही है। ‘नीतीश मॉडल’ के दावे पर भी सवाल जन सुराज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ‘नीतीश मॉडल’ पर सरकार चलाने के दावे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह योजना 2016 में नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत शुरू हुई थी। कुमार सौरभ ने आरोप लगाया कि योजना की ऋण सीमा कम करना उसी योजना को कमजोर करने की दिशा में कदम है। उन्होंने पूछा, अगर सरकार वास्तव में युवाओं और उच्च शिक्षा को लेकर गंभीर है तो छात्रों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में कटौती क्यों की जा रही है? जन सुराज ने सवाल उठाया कि अगर सरकार की अपनी योजना छात्रों की पूरी जरूरत पूरी नहीं कर पाएगी तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र महंगी उच्च शिक्षा का खर्च कैसे उठा पाएंगे।

