मंदसौर के नालछा माता मंदिर में नवरात्रि की पंचमी पर गुरुवार को माता रानी का चांदी के आभूषणों से श्रृंगार हुआ। मंदिर सजाया गया है और नवरात्रि से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
मान्यता है कि माता दिन में तीन स्वरूपों में दर्शन देती हैं। सुबह बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के दर्शन होते हैं। संतान प्राप्ति के लिए श्रद्धालु उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं और मन्नत पूरी होने पर लच्छे बांधते हैं।
जय माता दी ग्रुप 25 अक्टूबर को मंदिर में 3333 कन्याओं का पूजन करेगा। इसके लिए पंजीयन जारी है और कन्याओं को उपहार भी दिए जाएंगे।
नालछा माता मंदिर में भेरू और भवानी एक ही गादी पर विराजमान हैं, जो इसकी खास पहचान है। पुजारी गोविंद नागदा के अनुसार, मंदिर राजा दशरथ के समय का माना जाता है।
गर्भगृह में कई सालों से अखंड ज्योत जल रही है। यहां चूल की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसमें भक्त धधकते अंगारों पर चलते हैं।

