भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनमोहन ने शनिवार को अपनी धर्मपत्नी के साथ ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान न्यायमूर्ति ने कुलपति, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के साथ शैक्षणिक, शोध और सामाजिक सहभागिता से जुड़े विषयों पर संवाद किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेट-जीरो परिसर और पर्यावरण अनुकूल पहलों की सराहना करते हुए इसे देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए उदाहरण बताया। कुलपति ने शैक्षणिक और शोध गतिविधियों की जानकारी दी विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने न्यायमूर्ति मनमोहन को परिसर में चल रही शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय आसपास के ग्रामीण समुदायों और विद्यालयों के साथ मिलकर सतत विकास लक्ष्यों पर जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। कुलपति ने बताया कि बिहार सरकार के सहयोग से आसपास के गांवों के विकास को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की गई है। इस दौरान न्यायमूर्ति को विश्वविद्यालय की विशेष पहल ‘शास्त्रार्थ’ की प्रति भी भेंट की गई। नेट-जीरो परिसर की सराहना न्यायमूर्ति मनमोहन ने विश्वविद्यालय के नेट-जीरो परिसर और पर्यावरण अनुकूल पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशभर के शिक्षण संस्थानों को नालंदा विश्वविद्यालय के इस मॉडल का अध्ययन करना चाहिए। उनके अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। सामाजिक सहभागिता को बताया प्रशंसनीय न्यायमूर्ति ने कहा कि विश्वविद्यालय में लोग समाज के प्रति विशेष उद्देश्य और समर्पण की भावना के साथ काम कर रहे हैं, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने परिसर के स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण की भी सराहना की। न्यायमूर्ति मनमोहन ने नालंदा विश्वविद्यालय की अपनी पहली यात्रा पर प्रसन्नता जताई और जल्द दोबारा आने की इच्छा व्यक्त की। परिवार के साथ परिसर की पहल देखी संवाद के बाद न्यायमूर्ति मनमोहन ने सपरिवार विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने सतत आधारभूत संरचना और सामुदायिक पहलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनमोहन ने शनिवार को अपनी धर्मपत्नी के साथ ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया। विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान न्यायमूर्ति ने कुलपति, विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के साथ शैक्षणिक, शोध और सामाजिक सहभागिता से जुड़े विषयों पर संवाद किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नेट-जीरो परिसर और पर्यावरण अनुकूल पहलों की सराहना करते हुए इसे देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए उदाहरण बताया। कुलपति ने शैक्षणिक और शोध गतिविधियों की जानकारी दी विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने न्यायमूर्ति मनमोहन को परिसर में चल रही शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय आसपास के ग्रामीण समुदायों और विद्यालयों के साथ मिलकर सतत विकास लक्ष्यों पर जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। कुलपति ने बताया कि बिहार सरकार के सहयोग से आसपास के गांवों के विकास को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की गई है। इस दौरान न्यायमूर्ति को विश्वविद्यालय की विशेष पहल ‘शास्त्रार्थ’ की प्रति भी भेंट की गई। नेट-जीरो परिसर की सराहना न्यायमूर्ति मनमोहन ने विश्वविद्यालय के नेट-जीरो परिसर और पर्यावरण अनुकूल पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशभर के शिक्षण संस्थानों को नालंदा विश्वविद्यालय के इस मॉडल का अध्ययन करना चाहिए। उनके अनुसार, नालंदा विश्वविद्यालय अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण बन रहा है। सामाजिक सहभागिता को बताया प्रशंसनीय न्यायमूर्ति ने कहा कि विश्वविद्यालय में लोग समाज के प्रति विशेष उद्देश्य और समर्पण की भावना के साथ काम कर रहे हैं, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने परिसर के स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण की भी सराहना की। न्यायमूर्ति मनमोहन ने नालंदा विश्वविद्यालय की अपनी पहली यात्रा पर प्रसन्नता जताई और जल्द दोबारा आने की इच्छा व्यक्त की। परिवार के साथ परिसर की पहल देखी संवाद के बाद न्यायमूर्ति मनमोहन ने सपरिवार विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने सतत आधारभूत संरचना और सामुदायिक पहलों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

