खगड़िया में शनिवार को वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रभारी प्रधान जिला जज संजय सिंह ने कहा कि आपसी बातचीत और समझौते से विवादों का समाधान करने पर धन, समय और प्रतिष्ठा तीनों की बचत होती है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने का बेहतर मौका देती है। पक्षकारों को इस अवसर का लाभ उठाकर आपसी सहमति से मामलों का निपटारा करना चाहिए। समाधान की ओर ले जाने का एक मंच लोक अदालत कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया गया। राष्ट्रगान के दौरान न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता और पक्षकार सम्मान में खड़े रहे। इसके बाद राष्ट्रीय लोक अदालत का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया। प्रभारी प्रधान जिला जज ने आगे कहा कि लोक अदालत विवादों को टकराव से हटाकर बातचीत और समाधान की ओर ले जाने का एक मंच है। ”लोक अदालत में कोई पक्ष हारता नहीं” यहां आपसी सहमति से विवादों का निपटारा होने से पक्षकारों का समय और पैसा बचता है। साथ ही, सामाजिक रिश्तों और प्रतिष्ठा पर भी बुरा असर नहीं पड़ता। उन्होंने लोक अदालत में आए पक्षकारों से खुले मन से समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। फैमिली जज पवन कुमार द्विवेदी ने बताया कि लोक अदालत वास्तव में जनता की अदालत है। यहां विवादों का समाधान आपसी सहमति और समझौते के आधार पर होता है। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोक अदालत में कोई पक्ष हारता नहीं है, बल्कि समझौते के बाद दोनों पक्ष जीतकर जाते हैं। ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने की अपील उन्होंने यह भी कहा कि समाज में विवाद होना सामान्य है। लेकिन, आपसी बातचीत, विचार-विमर्श और जिम्मेदारियों को निभाने से कई विवादों को आसानी से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने पक्षकारों से अपील की कि वे लोक अदालत से अपने विवाद का समाधान कराकर ही वापस जाएं। डीएम ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय के उद्देश्य पर असर डालती है। जिलाधिकारी विक्रम वीर ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को समय पर और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने “Justice delayed is justice denied” का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय में देरी होने से न्याय का उद्देश्य प्रभावित होता है। लोक अदालत लोगों को शीघ्र और सरल तरीके से विवादों के समाधान का प्रभावी मंच उपलब्ध कराती है। लोगों को इसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। मौके पर मौजूद रहे कई अधिकारी एएसपी सह एसडीपीओ सदर-1 रमेश कुमार ने कहा कि छोटे-छोटे विवाद कई बार आपसी रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर देते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय की प्रक्रिया में भी समय लगता है। लोक अदालत विवादों को खत्म कर लोगों को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में जीवन जीने का अवसर देती है। कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने सभी अतिथियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। मौके पर जिला परिवहन पदाधिकारी विजयंत, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी कौशिकी कश्यप, डीएलएसए सदस्य शंभू सहित न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में पक्षकार मौजूद थे। खगड़िया में शनिवार को वर्ष की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रभारी प्रधान जिला जज संजय सिंह ने कहा कि आपसी बातचीत और समझौते से विवादों का समाधान करने पर धन, समय और प्रतिष्ठा तीनों की बचत होती है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने का बेहतर मौका देती है। पक्षकारों को इस अवसर का लाभ उठाकर आपसी सहमति से मामलों का निपटारा करना चाहिए। समाधान की ओर ले जाने का एक मंच लोक अदालत कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया गया। राष्ट्रगान के दौरान न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता और पक्षकार सम्मान में खड़े रहे। इसके बाद राष्ट्रीय लोक अदालत का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया। प्रभारी प्रधान जिला जज ने आगे कहा कि लोक अदालत विवादों को टकराव से हटाकर बातचीत और समाधान की ओर ले जाने का एक मंच है। ”लोक अदालत में कोई पक्ष हारता नहीं” यहां आपसी सहमति से विवादों का निपटारा होने से पक्षकारों का समय और पैसा बचता है। साथ ही, सामाजिक रिश्तों और प्रतिष्ठा पर भी बुरा असर नहीं पड़ता। उन्होंने लोक अदालत में आए पक्षकारों से खुले मन से समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। फैमिली जज पवन कुमार द्विवेदी ने बताया कि लोक अदालत वास्तव में जनता की अदालत है। यहां विवादों का समाधान आपसी सहमति और समझौते के आधार पर होता है। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोक अदालत में कोई पक्ष हारता नहीं है, बल्कि समझौते के बाद दोनों पक्ष जीतकर जाते हैं। ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने की अपील उन्होंने यह भी कहा कि समाज में विवाद होना सामान्य है। लेकिन, आपसी बातचीत, विचार-विमर्श और जिम्मेदारियों को निभाने से कई विवादों को आसानी से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने पक्षकारों से अपील की कि वे लोक अदालत से अपने विवाद का समाधान कराकर ही वापस जाएं। डीएम ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय के उद्देश्य पर असर डालती है। जिलाधिकारी विक्रम वीर ने कहा कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को समय पर और सस्ता न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने “Justice delayed is justice denied” का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय में देरी होने से न्याय का उद्देश्य प्रभावित होता है। लोक अदालत लोगों को शीघ्र और सरल तरीके से विवादों के समाधान का प्रभावी मंच उपलब्ध कराती है। लोगों को इसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। मौके पर मौजूद रहे कई अधिकारी एएसपी सह एसडीपीओ सदर-1 रमेश कुमार ने कहा कि छोटे-छोटे विवाद कई बार आपसी रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर देते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायालय की प्रक्रिया में भी समय लगता है। लोक अदालत विवादों को खत्म कर लोगों को आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण माहौल में जीवन जीने का अवसर देती है। कार्यक्रम के अंत में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने सभी अतिथियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। मौके पर जिला परिवहन पदाधिकारी विजयंत, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी कौशिकी कश्यप, डीएलएसए सदस्य शंभू सहित न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में पक्षकार मौजूद थे।

