भारत और पराग्वे के बीच उच्च शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय और पराग्वे के प्रतिष्ठित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ असुन्सियोन ने आपसी शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह हस्ताक्षर समारोह एक वर्चुअल मंच के माध्यम से संपन्न हुआ। वर्चुअल मंच पर हुआ ऐतिहासिक हस्ताक्षर इस ऐतिहासिक अवसर पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ असुन्सियोन की रेक्टर प्रो. जुली कॉन्सेप्सिओन वेरा डी मोलिनास ने दोनों संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हुए समझौते पर औपचारिक मुहर लगाई। इस कार्यक्रम में पराग्वे में भारत के राजदूत डॉ. पीयूष सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा, दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संकाय सदस्य और पराग्वे स्थित भारतीय दूतावास के राजनयिक भी इस डिजिटल समारोह में शामिल हुए। ज्ञान के वैश्विक प्रसार और संवाद की ओर कदम समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस साझेदारी को लैटिन अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते बौद्धिक संबंधों का प्रतीक बताया। प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की सदियों पुरानी परंपरा ज्ञान के साझा प्रसार और वैश्विक संवाद की रही है। यह साझेदारी दोनों देशों के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नए दृष्टिकोण तलाशने और समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त रूप से कार्य करने का अवसर प्रदान करेगी। द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती राजदूत डॉ. पीयूष सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और पराग्वे के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ेगा, जिससे दोनों देशों के युवाओं के बीच परस्पर समझ और शैक्षणिक रिश्ते गहरे होंगे। संयुक्त शोध और आदान-प्रदान पर रहेगा जोर इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शिक्षकों एवं छात्रों के आदान-प्रदान, सम्मेलनों के आयोजन और ज्ञान साझा करने के कार्यक्रमों पर मिलकर काम करेंगे। यह सहयोग नालंदा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक समन्वय स्थापित करने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनने की प्रतिबद्धता को नई मजबूती प्रदान करता है। भारत और पराग्वे के बीच उच्च शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय और पराग्वे के प्रतिष्ठित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ असुन्सियोन ने आपसी शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह हस्ताक्षर समारोह एक वर्चुअल मंच के माध्यम से संपन्न हुआ। वर्चुअल मंच पर हुआ ऐतिहासिक हस्ताक्षर इस ऐतिहासिक अवसर पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ असुन्सियोन की रेक्टर प्रो. जुली कॉन्सेप्सिओन वेरा डी मोलिनास ने दोनों संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हुए समझौते पर औपचारिक मुहर लगाई। इस कार्यक्रम में पराग्वे में भारत के राजदूत डॉ. पीयूष सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा, दोनों विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, संकाय सदस्य और पराग्वे स्थित भारतीय दूतावास के राजनयिक भी इस डिजिटल समारोह में शामिल हुए। ज्ञान के वैश्विक प्रसार और संवाद की ओर कदम समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस साझेदारी को लैटिन अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते बौद्धिक संबंधों का प्रतीक बताया। प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की सदियों पुरानी परंपरा ज्ञान के साझा प्रसार और वैश्विक संवाद की रही है। यह साझेदारी दोनों देशों के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को नए दृष्टिकोण तलाशने और समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त रूप से कार्य करने का अवसर प्रदान करेगी। द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई मजबूती राजदूत डॉ. पीयूष सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और पराग्वे के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ेगा, जिससे दोनों देशों के युवाओं के बीच परस्पर समझ और शैक्षणिक रिश्ते गहरे होंगे। संयुक्त शोध और आदान-प्रदान पर रहेगा जोर इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शिक्षकों एवं छात्रों के आदान-प्रदान, सम्मेलनों के आयोजन और ज्ञान साझा करने के कार्यक्रमों पर मिलकर काम करेंगे। यह सहयोग नालंदा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक समन्वय स्थापित करने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनने की प्रतिबद्धता को नई मजबूती प्रदान करता है।

