नरसिंहपुर में सोयाबीन की खराब फसल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान:बोले- बीमा कार्यालय जिले में खुले, सम्मान निधि की राशि 10 हजार की जाए

नरसिंहपुर में सोयाबीन की खराब फसल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान:बोले- बीमा कार्यालय जिले में खुले, सम्मान निधि की राशि 10 हजार की जाए

नरसिंहपुर जिले में भारतीय किसान संघ, महाकोशल प्रांत की जिला इकाई ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को 17 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। किसान अपनी बर्बाद हुई सोयाबीन फसल और दूसरी समस्याओं को लेकर पहुंचे थे। उन्होंने खराब फसल का प्रदर्शन किया और सरकार से कृषि लागत कम करने, फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाने और किसानों के हित में नीतियां बनाने की मांग की। संघ ने ज्ञापन में सरकार को विदेशी डेयरी उत्पाद और जीएम फसलों को देश में आने से रोकने के लिए धन्यवाद दिया। इसके साथ ही कृषि से जुड़े सामान और कृषि यंत्रों से जीएसटी खत्म करने की मांग की गई। संघ ने यह भी कहा कि सभी फसलों का लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य तय हो और समर्थन मूल्य पर सालभर खरीदी सुनिश्चित की जाए। किसानों ने क्या कहा? किसानों ने फसल बीमा योजना को सरल बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि खेत को इकाई माना जाए और हर जिले में फसल बीमा कार्यालय और अधिकारियों की नियुक्ति हो। संघ ने सैटेलाइट सर्वे में सुधार होने तक नेत्रांकन सर्वे कराने की भी मांग रखी। इसके अलावा, कृषि योग्य जमीन के अधिग्रहण पर रोक लगाने और विशेष हालात में मौजूदा कीमत का चार गुना मुआवजा देने की मांग भी की गई। क्या मांगें की गईं? किसानों ने कृषि में इस्तेमाल होने वाले यंत्रों, रासायनिक दवाइयों और बीज पर जीएसटी दर कम करने की मांग की। उन्होंने जीएम फसलों के बीजों को भारत में आने की अनुमति न देने और किसान हितैषी आयात-निर्यात नीति बनाने को भी कहा। किसानों ने बैंकों की कर्ज प्रक्रिया को पारदर्शी और ऑनलाइन करने की मांग भी रखी। साथ ही, पात्र किसानों को तुरंत कृषि कर्ज मिले और परेशान करने वाले बैंक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। ज्ञापन में हर ग्राम पंचायत में बारिश मापने वाले यंत्र लगाने की मांग की गई। सभी जिलों में कृषि कॉलेज खोलने, छोटी कक्षाओं से कृषि विज्ञान की पढ़ाई शुरू करने और किसानों के लिए प्रधानमंत्री कृषि दवा केंद्र बनाने की बात भी कही गई। किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर करने की मांग भी की गई। जैविक किसानों को रासायनिक खाद पर मिलने वाली सब्सिडी के बराबर प्रोत्साहन देने और पिछली बजट घोषणा के अनुसार किसानों को 5 लाख रुपए तक ऋण उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी।

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