हरदोई के पिहानी क्षेत्र स्थित हरियाली किसान सेवा केंद्र पर STF की छापेमारी के मामले में प्रशासन ने रविवार को दुकानदार का लाइसेंस निरस्त कर दिया। 16 अक्टूबर को STF, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने करीब 14 घंटे तक छापेमारी कर नकली डीएपी खाद की सप्लाई से जुड़े कथित सिंडिकेट का खुलासा किया था। जांच में राजस्थान में बनी संदिग्ध खाद की हरियाणा के हिसार के रास्ते सप्लाई किए जाने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, जिप्सम से तैयार 50 किलोग्राम की नकली डीएपी खाद की लागत करीब 250 रुपये बताई जा रही है, जबकि इसे किसानों को 1,350 रुपये में बेचे जाने का आरोप है। मामले में रजनीश को कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने अपने परिचित कुलदीप के नाम पर हरियाली किसान सेवा केंद्र का लाइसेंस बनवा रखा था। मौके पर मौजूद अखिलेश खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर माल उतरवा रहा था। कार्रवाई के दौरान जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक अमीनुद्दीन अंसारी और एसटीएफ निरीक्षक शैलेंद्र कुमार की अगुवाई में संयुक्त टीम ने ट्रेलर ट्रक से 820 बोरियों में लदी करीब 41 मीट्रिक टन संदिग्ध खाद जब्त की। इनमें 600 हरी बोरियां भारत डीएपी की और 220 पीली बोरियां थीं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, खाद की बोरियां राजस्थान में निर्मित थीं और खेप हिसार की फैक्ट्री से भेजी गई थी। टैक्स इनवॉइस पर खाद की पहचान छिपाने के लिए ‘दाना’ अंकित किए जाने की बात भी सामने आई है। आठ नमूने जांच के लिए भेजे संयुक्त टीम ने खाद और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स के कुल 8 नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे हैं। जब्त माल को सील कर लिया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक ने रविवार शाम 7:18 बजे मामले में कार्रवाई की जानकारी दी। संदिग्ध खाद की गुणवत्ता और वास्तविक संरचना की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद होगी।

