मुंबई, पांच अक्टूबर चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में निजी बैंकों द्वारा जमा जुटाने की रफ्तार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में अधिक रही। इससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रियायती स्वैप सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा प्रवासी बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा के असर का पता चलता है। जुलाई-सितंबर के लिए बैंकों द्वारा जारी अस्थायी आंकड़ों से पीटीआई-द्वारा संकलित जानकारी के मुताबिक, निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं की जमा वृद्धि दर सालाना आधार पर 17 से 34 प्रतिशत के बीच रही, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की वृद्धि दर 6.87 से 17.01 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई।
आंकड़ों के अनुसार, निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक ने दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर जमा में 18.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके अलावा कोटक महिंद्रा बैंक (23.2 प्रतिशत), यस बैंक (19.5 प्रतिशत), एक्सिस बैंक (20.7 प्रतिशत), आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (17 प्रतिशत), आरबीएल बैंक (34 प्रतिशत) और साउथ इंडियन बैंक (18.70 प्रतिशत) ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में घरेलू जमा में सालाना आधार पर 17.01 प्रतिशत और वैश्विक जमा में 16.75 प्रतिशत की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की।
इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (14.43 प्रतिशत), यूको बैंक (14.05 प्रतिशत) और पंजाब एंड सिंध बैंक (12.98 प्रतिशत) का स्थान रहा। पंजाब नेशनल बैंक ने वैश्विक जमा में सालाना आधार पर 9.90 प्रतिशत और घरेलू जमा में 9.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। केनरा बैंक की वैश्विक जमा 13.13 प्रतिशत और घरेलू जमा 10.96 प्रतिशत बढ़ी।
इंडियन बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की कुल जमा में क्रमशः 12.4 प्रतिशत और 6.87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने एक रिपोर्ट में कहा, प्रणालीगत जमा वृद्धि मजबूत एफसीएनआर (बी) प्रवाह के साथ 11-12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत सालाना हो गई, जो कुल प्रणालीगत जमा का 4.5 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, बैंकों ने 31 अगस्त तक विशेष विदेशी मुद्रा प्रवासी (एफसीएनआर-बी) जमा योजना के जरिये 133 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं।

