लखीसराय सदर अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात के साथ घर लौट रही महिला को ले जाने पहुंची 102 एंबुलेंस ही रास्ते में रुकने की स्थिति में आ गई। अस्पताल परिसर में चालक ने चाबी लगाकर एंबुलेंस स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वाहन चालू नहीं हुआ। काफी प्रयास के बाद भी जब इंजन स्टार्ट नहीं हुआ तो अस्पताल के दूसरे चालक, सहायक और प्रसूता के परिजनों को एंबुलेंस में धक्का लगाना पड़ा। धक्का देने के बाद एंबुलेंस स्टार्ट हुई, जिसके बाद प्रसूता चिंता देवी को नवजात के साथ घर पहुंचाया गया। मामला टाउन थाना क्षेत्र के जोकमेला गांव का है। चाबी लगाई, लेकिन एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई जोकमेला गांव की चिंता देवी का सदर अस्पताल में प्रसव हुआ था। प्रसव के बाद उन्हें नवजात के साथ घर ले जाने के लिए परिजनों ने 102 एंबुलेंस बुलाई थी। एंबुलेंस अस्पताल पहुंची तो चालक ने वाहन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वह चालू नहीं हुई। चालक ने कई बार प्रयास किया। इसके बावजूद एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई तो वहां मौजूद दूसरे चालक और सहायक के साथ प्रसूता के परिजन भी मदद के लिए आगे आए। सभी ने मिलकर एंबुलेंस को धक्का लगाया। इसके बाद वाहन चालू हुआ और महिला को नवजात के साथ घर ले जाया गया। 102 एंबुलेंस पर हर महीने खर्च, फिर भी रखरखाव पर सवाल सदर अस्पताल में मरीजों के लिए 102 एंबुलेंस सेवा संचालित है। इस सेवा पर हर महीने लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद मरीज को घर पहुंचाने आई एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में ही धक्का देकर स्टार्ट कराने की स्थिति सामने आई है। इस घटना ने एंबुलेंस के रखरखाव और उसकी नियमित जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर प्रसव के बाद नवजात के साथ घर लौट रही महिला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। डीपीएम बोले- जानकारी नहीं, जांच के बाद होगी कार्रवाई मामले को लेकर सदर अस्पताल के डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ने कहा कि उन्हें एंबुलेंस खराब होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लखीसराय सदर अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात के साथ घर लौट रही महिला को ले जाने पहुंची 102 एंबुलेंस ही रास्ते में रुकने की स्थिति में आ गई। अस्पताल परिसर में चालक ने चाबी लगाकर एंबुलेंस स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वाहन चालू नहीं हुआ। काफी प्रयास के बाद भी जब इंजन स्टार्ट नहीं हुआ तो अस्पताल के दूसरे चालक, सहायक और प्रसूता के परिजनों को एंबुलेंस में धक्का लगाना पड़ा। धक्का देने के बाद एंबुलेंस स्टार्ट हुई, जिसके बाद प्रसूता चिंता देवी को नवजात के साथ घर पहुंचाया गया। मामला टाउन थाना क्षेत्र के जोकमेला गांव का है। चाबी लगाई, लेकिन एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई जोकमेला गांव की चिंता देवी का सदर अस्पताल में प्रसव हुआ था। प्रसव के बाद उन्हें नवजात के साथ घर ले जाने के लिए परिजनों ने 102 एंबुलेंस बुलाई थी। एंबुलेंस अस्पताल पहुंची तो चालक ने वाहन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन वह चालू नहीं हुई। चालक ने कई बार प्रयास किया। इसके बावजूद एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई तो वहां मौजूद दूसरे चालक और सहायक के साथ प्रसूता के परिजन भी मदद के लिए आगे आए। सभी ने मिलकर एंबुलेंस को धक्का लगाया। इसके बाद वाहन चालू हुआ और महिला को नवजात के साथ घर ले जाया गया। 102 एंबुलेंस पर हर महीने खर्च, फिर भी रखरखाव पर सवाल सदर अस्पताल में मरीजों के लिए 102 एंबुलेंस सेवा संचालित है। इस सेवा पर हर महीने लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद मरीज को घर पहुंचाने आई एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में ही धक्का देकर स्टार्ट कराने की स्थिति सामने आई है। इस घटना ने एंबुलेंस के रखरखाव और उसकी नियमित जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर प्रसव के बाद नवजात के साथ घर लौट रही महिला को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। डीपीएम बोले- जानकारी नहीं, जांच के बाद होगी कार्रवाई मामले को लेकर सदर अस्पताल के डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ने कहा कि उन्हें एंबुलेंस खराब होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी। अगर एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

