शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन आश्विन शुक्ल दशमी को धनिष्ठा नक्षत्र और रवियोग के सुयोग में देवी दुर्गा की विदाई होगी। माता की विदाई के बाद जयंती धारण कर श्रद्धालु विजयादशमी का पर्व मनाएंगे। जयंती धारण से मानसिक शांति, आरोग्यता, सुख-समृद्धि, पारिवारिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। दशमी पर हवन-पूजन के साथ संपन्न होगा नवरात्र शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक चले पूजा-अर्चना का समापन हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु मां दुर्गा के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा करेंगे और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करेंगे। मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रहेगी। हवन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। दशमी पर हवन संपन्न होने के साथ पूजा समिति नवरात्र उत्सव के समापन की तैयारी पूरी करेंगे। श्रद्धालु मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करेंगे। नौ दिनों तक भक्ति और उल्लास से गुलजार रहे पंडालों में अब प्रतिमा विसर्जन की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। विसर्जन के साथ शारदीय दुर्गा पूजा उत्सव का समापन होगा। मूर्ति विसर्जन के लिए घाटों पर बने आर्टिफिशियल तालाब दुर्गापूजा के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर पटना नगर निगम ने तैयारियां की हैं। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए घाटों पर आर्टिफिशियल तालाबों का निर्माण किया गया है। जहां पहले से तालाब हैं, उनकी सफाई और मरम्मत की गई है। विसर्जन के तुरंत बाद पानी से मूर्तियों के अवशेष और पूजन सामग्री निकालने के लिए अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए पाटलिपुत्र अंचल में 30 और अजीमाबाद अंचल में 140 अतिरिक्त मैनपावर लगाए गए हैं। प्रमुख घाटों पर गोताखोर तैनात रहेंगे। सभी विसर्जन स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग, पर्याप्त प्रकाश और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन आश्विन शुक्ल दशमी को धनिष्ठा नक्षत्र और रवियोग के सुयोग में देवी दुर्गा की विदाई होगी। माता की विदाई के बाद जयंती धारण कर श्रद्धालु विजयादशमी का पर्व मनाएंगे। जयंती धारण से मानसिक शांति, आरोग्यता, सुख-समृद्धि, पारिवारिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है। दशमी पर हवन-पूजन के साथ संपन्न होगा नवरात्र शारदीय नवरात्र के नौ दिनों तक चले पूजा-अर्चना का समापन हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु मां दुर्गा के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा करेंगे और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करेंगे। मंदिरों और पूजा पंडालों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रहेगी। हवन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो जाएगा। दशमी पर हवन संपन्न होने के साथ पूजा समिति नवरात्र उत्सव के समापन की तैयारी पूरी करेंगे। श्रद्धालु मां दुर्गा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करेंगे। नौ दिनों तक भक्ति और उल्लास से गुलजार रहे पंडालों में अब प्रतिमा विसर्जन की तैयारियां शुरू हो जाएंगी। विसर्जन के साथ शारदीय दुर्गा पूजा उत्सव का समापन होगा। मूर्ति विसर्जन के लिए घाटों पर बने आर्टिफिशियल तालाब दुर्गापूजा के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर पटना नगर निगम ने तैयारियां की हैं। गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए घाटों पर आर्टिफिशियल तालाबों का निर्माण किया गया है। जहां पहले से तालाब हैं, उनकी सफाई और मरम्मत की गई है। विसर्जन के तुरंत बाद पानी से मूर्तियों के अवशेष और पूजन सामग्री निकालने के लिए अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती की गई है। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के दबाव को देखते हुए पाटलिपुत्र अंचल में 30 और अजीमाबाद अंचल में 140 अतिरिक्त मैनपावर लगाए गए हैं। प्रमुख घाटों पर गोताखोर तैनात रहेंगे। सभी विसर्जन स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग, पर्याप्त प्रकाश और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

