दरभंगा में 11 तटबंधों की हो रही निगरानी:नदियों का जलस्तर खतरे से नीचे, सैंड बैग-जियोबैग के साथ प्रशासन तैयार

दरभंगा में 11 तटबंधों की हो रही निगरानी:नदियों का जलस्तर खतरे से नीचे, सैंड बैग-जियोबैग के साथ प्रशासन तैयार

नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने के बाद नदियों में बढ़े जलप्रवाह और बिहार में संभावित बाढ़ की आशंका के बीच दरभंगा जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन के अनुसार दरभंगा में फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है और जिले की सभी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों के संबंध में एडीएम ने बताया कि जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर जून से अक्टूबर तक लगातार काम किया जाता है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए दिन के साथ रात में भी पेट्रोलिंग की व्यवस्था है। तटबंधों पर सैंड बैग और जियोबैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा स्लुइस गेट के रखरखाव और पुल-पुलियों के वेंट की सफाई भी कराई जा रही है। जिले में जल संसाधन विभाग की पांच इकाइयां कार्यरत हैं और कुल 11 तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही जिला जनसंपर्क पदाधिकारी आशीष अमन के साथ अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन सलीम अख्तर ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क और सचेत रहने की अपील की। एडीएम ने बताया कि ग्लेशियर झील फटने का प्रभाव गंडक नदी से जुड़े कुछ जिलों में पड़ने की बात सामने आई है। पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर के कुछ हिस्से और वैशाली के कुछ इलाकों में इसका प्रभाव संभावित बताया गया है। हालांकि, दरभंगा जिले में फिलहाल इसका कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि जून से अक्टूबर तक जिले की नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाती है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट पर प्रतिदिन नजर रखी जा रही है। बागमती और अधवारा समूह की नदियों समेत विभिन्न स्थानों पर जलस्तर की स्थिति की निगरानी हो रही है। प्रशासन खतरे के निशान के साथ पिछले वर्षों में दर्ज उच्चतम प्रवाह स्तर को भी ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है।
जिले में SDRF की टीम तैनात
एडीएम ने बताया कि फिलहाल NDRF की टीम दरभंगा में मौजूद नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से NDRF उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। वहीं, SDRF के करीब 28 से 30 जवानों का दल जिले में मौजूद है। यह टीम पैठान कवई, मनीगाछी में आवासित है और जरूरत के अनुसार इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
190 निजी नावों का निबंधन
बाढ़ की पूर्व तैयारियों के तहत प्रशासन हर साल अनुदेश पुस्तिका तैयार करता है। इसमें बाढ़ आने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना शामिल रहती है। वृद्ध, दिव्यांग और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित निकासी के लिए भी विशेष योजना बनाई जाती है।
एडीएम के अनुसार निजी नाव मालिकों से करीब 190 नावों का निबंधन कराया जा चुका है। 2024 की बाढ़ के दौरान 137 नावों का संचालन किया गया था। फिलहाल भी तीन-चार प्रखंडों में जरूरत के अनुसार नावों का परिचालन किया जा रहा है, ताकि पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में आवागमन बाधित न हो।
वर्षा की स्थिति के बारे में एडीएम ने बताया कि जिले में सामान्य वर्षापात की तुलना में करीब 53 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की जा रही है। फिलहाल दरभंगा कम वर्षापात वाले जिलों में शामिल है। नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने के बाद नदियों में बढ़े जलप्रवाह और बिहार में संभावित बाढ़ की आशंका के बीच दरभंगा जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन के अनुसार दरभंगा में फिलहाल बाढ़ का कोई खतरा नहीं है और जिले की सभी नदियां खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों के संबंध में एडीएम ने बताया कि जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर जून से अक्टूबर तक लगातार काम किया जाता है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए दिन के साथ रात में भी पेट्रोलिंग की व्यवस्था है। तटबंधों पर सैंड बैग और जियोबैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा स्लुइस गेट के रखरखाव और पुल-पुलियों के वेंट की सफाई भी कराई जा रही है। जिले में जल संसाधन विभाग की पांच इकाइयां कार्यरत हैं और कुल 11 तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही जिला जनसंपर्क पदाधिकारी आशीष अमन के साथ अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन सलीम अख्तर ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क और सचेत रहने की अपील की। एडीएम ने बताया कि ग्लेशियर झील फटने का प्रभाव गंडक नदी से जुड़े कुछ जिलों में पड़ने की बात सामने आई है। पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर के कुछ हिस्से और वैशाली के कुछ इलाकों में इसका प्रभाव संभावित बताया गया है। हालांकि, दरभंगा जिले में फिलहाल इसका कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि जून से अक्टूबर तक जिले की नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जाती है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट पर प्रतिदिन नजर रखी जा रही है। बागमती और अधवारा समूह की नदियों समेत विभिन्न स्थानों पर जलस्तर की स्थिति की निगरानी हो रही है। प्रशासन खतरे के निशान के साथ पिछले वर्षों में दर्ज उच्चतम प्रवाह स्तर को भी ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है।
जिले में SDRF की टीम तैनात
एडीएम ने बताया कि फिलहाल NDRF की टीम दरभंगा में मौजूद नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से NDRF उपलब्ध कराने का आश्वासन मिला है। वहीं, SDRF के करीब 28 से 30 जवानों का दल जिले में मौजूद है। यह टीम पैठान कवई, मनीगाछी में आवासित है और जरूरत के अनुसार इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
190 निजी नावों का निबंधन
बाढ़ की पूर्व तैयारियों के तहत प्रशासन हर साल अनुदेश पुस्तिका तैयार करता है। इसमें बाढ़ आने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना शामिल रहती है। वृद्ध, दिव्यांग और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित निकासी के लिए भी विशेष योजना बनाई जाती है।
एडीएम के अनुसार निजी नाव मालिकों से करीब 190 नावों का निबंधन कराया जा चुका है। 2024 की बाढ़ के दौरान 137 नावों का संचालन किया गया था। फिलहाल भी तीन-चार प्रखंडों में जरूरत के अनुसार नावों का परिचालन किया जा रहा है, ताकि पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में आवागमन बाधित न हो।
वर्षा की स्थिति के बारे में एडीएम ने बताया कि जिले में सामान्य वर्षापात की तुलना में करीब 53 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की जा रही है। फिलहाल दरभंगा कम वर्षापात वाले जिलों में शामिल है।  

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