तैयारी अभी से शुरू:शहर को जलसंकट से बचाने नर्मदा के पानी से भरेंगे यशवंत सागर

तैयारी अभी से शुरू:शहर को जलसंकट से बचाने नर्मदा के पानी से भरेंगे यशवंत सागर

इस बार मानसून में सामान्य से 14 इंच कम बारिश होने से शहर में मार्च से पहले ही जल संकट की आशंका है। सीजन में कुल 23 इंच बारिश हुई है। इसका असर शहर के तालाबों पर भी पड़ा है। शहर का सबसे पुराना जलस्रोत यशवंत सागर अपनी 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 17 फीट ही भरा है। इसे नर्मदा के पानी से भरने के लिए नगर निगम और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसके लिए नर्मदा-गंभीर लिंक का उपयोग किया जाएगा। दोनों विभागों के अधिकारी इसकी गाइडलाइन तैयार करेंगे। यशवंत सागर से शहर को रोजाना 35 एमएलडी पानी मिलता है। तालाब को क्षमता के अनुसार भरने से गर्मी में भी इस आपूर्ति को नियमित बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि इसमें बड़ी चुनौती बिजली की खपत और उसका खर्च है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने बताया कि इस विषय पर प्रारंभिक चर्चा हुई है। विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। तालाबों की स्थिति 3 तालाब सूखे, भूजल स्तर गिरने की आशंका बिलावली, लिंबोदी और असरावद खुर्द तालाबों में भी इस बार पानी की कमी है। असरावद खुर्द और लिंबोदी लगभग पूरी तरह सूख गए हैं। बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले करीब 13 फीट पानी है। यानी तालाब करीब 21 फीट खाली है। इनके खाली रहने से गर्मी में भूजल स्तर गिरने और बोरिंग सूखने की आशंका है। इन तीनों तालाबों को नर्मदा-शिप्रा लिंक के जरिए भरने का प्रस्ताव भी है। इस विकल्प पर चर्चा जारी है। योजना आगे बढ़ती है तो तालाबों के आसपास 5 से 7 किमी के क्षेत्र में भूजल स्तर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे गर्मी में बोरिंग चालू रखने और नर्मदा के पानी पर अतिरिक्त निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। आगे क्या?

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