अलवर शहर के जिला अस्पताल, जनाना अस्पताल व शिशु अस्पताल के सफाइकर्मियों ने शनिवार सुबह हड़ताल कर दी। सफाई नहीं करने से भर्ती वार्डों के अंदर कचरा पड़ा है। सफाइकर्मियों का कहना है कि पहले की चेतावनी के बावजूद हर महीने की 7 तारीख तक वेतन नहीं मिलता है। हड़ताल के पहले ही दिन अस्पतालों के वार्डों, गैलरी और परिसर में कचरे के ढेर लगने लगे हैं, जिससे मरीजों और उनके तिमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ‘महज 6-7 हजार की तनख्वाह, वो भी समय पर नहीं’ सफाईकर्मी राजू ने बताया कि उन्हें हर महीने केवल 6 से 7 हजार रुपए का मामूली वेतन मिलता है। इतने कम पैसों में परिवार का गुजर-बसर करना पहले ही चुनौतीपूर्ण है, उस पर भी ठेकेदार की मनमानी के कारण भुगतान में लगातार देरी की जाती है। नियमानुसार भुगतान 7 तारीख तक हो जाना चाहिए, लेकिन हर बार वेतन 10 तारीख या उसके भी बाद मिलता है। ठोस आश्वासन मिलने तक काम बंद सफाईकर्मियों का कहना है कि वेतन में देरी को लेकर वे पहले भी विरोध दर्ज करा चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक ठेकेदार की मनमानी पर रोक नहीं लगती और समय पर वेतन भुगतान का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक तीनों अस्पतालों में सफाई कार्य पूरी तरह बंद रहेगा।

