फरीदाबाद नगर निगम के सफाई कर्मचारी अब आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में हैं। सफाई कर्मचारी 1 सितंबर से 3 सितंबर तक कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के घर का लगातार तीन दिन घेराव करेंगे। इससे पहले 30 अगस्त को राज्यव्यापी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें आंदोलन को और तेज करने की अगली रणनीति तय की जाएगी। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है। नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को 22 दिन पूरे हो चुके हैं। गुरुवार को प्रेस वार्ता में राज्य प्रधान नगर पालिका कर्मचारी संघ हरियाणा नरेश कुमार शास्त्री ने कहा कि 31 अगस्त तक सभी सफाई कर्मचारी धरने पर बैठे रहेंगे। इसके बाद 1 से 3 सितंबर तक रोजाना कुछ घंटे कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के घर पहुंचकर घेराव किया जाएगा। इस दौरान कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करेंगे। 13 मई के समझौते को सरकार स्वीकार लेती तो नहीं होती हड़ताल : नरेश नरेश शास्त्री ने कहा कि कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से हड़ताल पर नहीं बैठता, बल्कि सरकार की अनदेखी और मांगों पर ठोस फैसला नहीं होने के कारण कर्मचारियों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उनका कहना है कि यदि 13 मई को हुई बातचीत में सरकार कर्मचारियों की सभी मांगों को गंभीरता से स्वीकार कर लेती तो आज सफाई कर्मचारियों को सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की ओर से कर्मचारियों की मांगों को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए कई बार दूसरे मंत्रियों और प्रतिनिधियों को भेजा गया, लेकिन इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। 22 अगस्त की वार्ता में उपस्थित नहीं हुए निकायम मंत्री विपुल गोयल नरेश शास्त्री ने बताया कि 22 अगस्त को हुई बैठक में भी विपुल गोयल मौजूद नहीं थे। उनकी जगह कृष्ण बेदी ने कर्मचारियों के साथ बातचीत की। हालांकि, यह वार्ता भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बैठक में कुछ मांगों पर केवल सैद्धांतिक सहमति की बात की गई, लेकिन सैद्धांतिक सहमति से कर्मचारियों की समस्या हल नहीं होती। कर्मचारियों को लिखित और लागू होने वाला फैसला चाहिए। नरेश शास्त्री के अनुसार उनकी प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, ठेका प्रथा समाप्त करना और सफाई कर्मचारियों तथा सीवरमैन की नियमित भर्ती करना शामिल है। नरेश शास्त्री ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि सफाई कर्मचारियों की मांगें मान ली गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मीडिया के माध्यम से यह बताया गया कि कर्मचारियों की मांगें पूरी कर दी गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। उनका कहना है कि करीब 10 वर्ष पुरानी कुछ मांगों पर जरूर काम हुआ है, लेकिन वर्तमान समय में कर्मचारियों की जो प्रमुख मांगें हैं, वे अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। दूसरे संगठनों के कर्मचारी भी साथ खड़े होने को तैयार आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए अब हरियाणा के दूसरे कर्मचारी संगठन भी सफाई कर्मचारियों के साथ खड़े होने की तैयारी में हैं। कर्मचारी नेताओं के अनुसार बिजली विभाग, रोडवेज, मैकेनिकल वर्कर, हुडा विभाग, क्लर्क यूनियन, शिक्षक संगठनों सहित करीब 150 विभागों से जुड़े कर्मचारी अलग-अलग दिनों में आंदोलन में शामिल होंगे। स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी भी आंदोलन का समर्थन करेंगे। सरकारी और अर्द्धसरकारी विभागों के कर्मचारियों को जिला स्तर पर आंदोलन से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। 1 से 3 सितंबर तक होने वाले मंत्री आवास घेराव में फरीदाबाद के अग्निकांड में जान गंवाने वाले फायर कर्मचारी के परिवार के सदस्य भी शामिल होंगे। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि मृतक कर्मचारी के परिवार को सरकार की ओर से दिया जाने वाला मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। परिवार भी आंदोलन के दौरान सरकार के सामने अपनी मांग रखेगा। पुलिस के जरिए आंदोलन दबाने का आरोप नरेश शास्त्री ने सरकार पर पुलिस के जरिए आंदोलन दबाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को कथित तौर पर जबरन थानों में ले जाया जाता है, धमकाया और परेशान किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिसिया दबाव से कर्मचारी पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 30 अगस्त को 87 शहरों और 103 दमकल केंद्रों के कर्मचारी तथा विभिन्न मजदूर-कर्मचारी संगठन राज्यव्यापी बैठक करेंगे। इस बैठक में सरकार के रवैये, पुलिस कार्रवाई और कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा के बाद आंदोलन को और तेज करने की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल सफाई कर्मचारियों का धरना जारी है। 31 अगस्त तक धरना चलने के बाद 1 से 3 सितंबर तक मंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि जब तक नियमित भर्ती, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और ठेका प्रथा खत्म करने सहित प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

