डॉ. संजीव कुमार पटना शिक्षक चुनाव जीते:बोले- ‘पटना अभी झांकी है, परबत्ता अभी बाकी है’

डॉ. संजीव कुमार पटना शिक्षक चुनाव जीते:बोले- ‘पटना अभी झांकी है, परबत्ता अभी बाकी है’

खगड़िया में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद प्रत्याशी और परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार जीत गए। उनकी जीत का जश्न परबत्ता में भी मनाया गया। मतगणना के दौरान उनकी बढ़त की खबर मिलते ही समर्थक जुटने लगे। देर रात जीत की घोषणा के बाद समर्थकों ने पटाखे फोड़े।

जश्न के बीच डॉ. संजीव कुमार के बयान, ‘पटना अभी झांकी है, परबत्ता अभी बाकी है’, की चर्चा शुरू हो गई। इस बयान को उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। नवल किशोर यादव को हराया

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत को डॉ. संजीव कुमार की राजनीतिक वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एनडीए समर्थित प्रत्याशी प्रो. नवल किशोर यादव को हराया। अब परबत्ता में उनके अगले कदम को लेकर चर्चा है।

डॉ. संजीव कुमार के पिता आरएन सिंह परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे हैं। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2020 में डॉ. संजीव कुमार जदयू के टिकट पर परबत्ता से विधायक चुने गए थे।

साल 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी के तौर पर उन्हें लोजपा (रामविलास) के बाबूलाल शौर्य से हार मिली थी। इसके बाद उन्होंने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया।

इस जीत के बाद उनके समर्थक इसे उनकी राजनीतिक सक्रियता और मेहनत का नतीजा बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर है कि वे इस जीत को परबत्ता की राजनीति में कैसे आगे बढ़ाते हैं। बयान को लेकर समर्थकों में उत्साह है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद विधान परिषद चुनाव में मिली जीत ने इस बयान को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, डॉ. संजीव कुमार की भावी राजनीतिक रणनीति क्या होगी और वह परबत्ता में अपनी राजनीतिक पकड़ को किस तरह मजबूत करेंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनकी जीत ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें…
परबत्ता की राजनीति में 5 जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी परबत्ता की राजनीति में अलग-अलग दलों से जुड़े पांच जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी चर्चा का विषय है। इनमें भाजपा से दिलीप जायसवाल और चंदन चौधरी, लोजपा (रामविलास) से बाबूलाल शौर्य तथा राजद से डॉ. संजीव कुमार शामिल हैं। वहीं, डॉ. संजीव कुमार के बड़े भाई राजीव कुमार कांग्रेस से जुड़े हैं और विधान पार्षद हैं। नयागांव सतखुट्टी निवासी दिवंगत पूर्व मंत्री आरएन सिंह के परिवार से जुड़े इन दोनों विधान पार्षदों की राजनीतिक मौजूदगी भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों के बीच परबत्ता के राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, इस पर अब सबकी नजर है। अब परबत्ता की अगली सियासी पारी पर निगाहें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत ने डॉ. संजीव कुमार को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है। समर्थकों में उत्साह है, तो विरोधी खेमे में भी उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पटना की जीत के बाद डॉ. संजीव कुमार परबत्ता की राजनीति में भी अपनी मजबूत वापसी दर्ज करा पाएंगे? फिलहाल उनके बयान और जीत ने क्षेत्र की सियासत में भावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। खगड़िया में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राजद प्रत्याशी और परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार जीत गए। उनकी जीत का जश्न परबत्ता में भी मनाया गया। मतगणना के दौरान उनकी बढ़त की खबर मिलते ही समर्थक जुटने लगे। देर रात जीत की घोषणा के बाद समर्थकों ने पटाखे फोड़े।

जश्न के बीच डॉ. संजीव कुमार के बयान, ‘पटना अभी झांकी है, परबत्ता अभी बाकी है’, की चर्चा शुरू हो गई। इस बयान को उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। नवल किशोर यादव को हराया

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत को डॉ. संजीव कुमार की राजनीतिक वापसी के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने एनडीए समर्थित प्रत्याशी प्रो. नवल किशोर यादव को हराया। अब परबत्ता में उनके अगले कदम को लेकर चर्चा है।

डॉ. संजीव कुमार के पिता आरएन सिंह परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे हैं। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2020 में डॉ. संजीव कुमार जदयू के टिकट पर परबत्ता से विधायक चुने गए थे।

साल 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी के तौर पर उन्हें लोजपा (रामविलास) के बाबूलाल शौर्य से हार मिली थी। इसके बाद उन्होंने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला किया।

इस जीत के बाद उनके समर्थक इसे उनकी राजनीतिक सक्रियता और मेहनत का नतीजा बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर है कि वे इस जीत को परबत्ता की राजनीति में कैसे आगे बढ़ाते हैं। बयान को लेकर समर्थकों में उत्साह है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद विधान परिषद चुनाव में मिली जीत ने इस बयान को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, डॉ. संजीव कुमार की भावी राजनीतिक रणनीति क्या होगी और वह परबत्ता में अपनी राजनीतिक पकड़ को किस तरह मजबूत करेंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनकी जीत ने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। जनप्रतिनिधियों की तस्वीरें…
परबत्ता की राजनीति में 5 जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी परबत्ता की राजनीति में अलग-अलग दलों से जुड़े पांच जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी चर्चा का विषय है। इनमें भाजपा से दिलीप जायसवाल और चंदन चौधरी, लोजपा (रामविलास) से बाबूलाल शौर्य तथा राजद से डॉ. संजीव कुमार शामिल हैं। वहीं, डॉ. संजीव कुमार के बड़े भाई राजीव कुमार कांग्रेस से जुड़े हैं और विधान पार्षद हैं। नयागांव सतखुट्टी निवासी दिवंगत पूर्व मंत्री आरएन सिंह के परिवार से जुड़े इन दोनों विधान पार्षदों की राजनीतिक मौजूदगी भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों के बीच परबत्ता के राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, इस पर अब सबकी नजर है। अब परबत्ता की अगली सियासी पारी पर निगाहें पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत ने डॉ. संजीव कुमार को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है। समर्थकों में उत्साह है, तो विरोधी खेमे में भी उनके अगले कदम को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पटना की जीत के बाद डॉ. संजीव कुमार परबत्ता की राजनीति में भी अपनी मजबूत वापसी दर्ज करा पाएंगे? फिलहाल उनके बयान और जीत ने क्षेत्र की सियासत में भावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।  

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