इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी हिन्दी विज्ञापन संख्या 01/2022) भर्ती परीक्षा के विवादित प्रश्नों को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए छह अक्टूबर की तारीख लगाई है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने ज्ञान सिंह यादव व 28 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर उनके अधिवक्ता व आयोग के अधिवक्ता को सुनकर दिया। सुनवाई में क्या हुआ जानिये सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शॉर्ट काउंटर एफिडेविट दाखिल कर बताया कि तीन सदस्यीय विषय विशेषज्ञ समिति ने आपत्तियों का निस्तारण करते हुए अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें प्रश्न संख्या 102 के दो विकल्पों को सही माना गया है। चयन आयोग द्वारा कोर्ट में पेश किए गए हलफनामे के अनुसार, हिन्दी विषय में अभ्यर्थियों की आपत्तियों के निस्तारण के लिए आयोग अध्यक्ष के निर्देश पर तीन वरिष्ठ विषय-विशेषज्ञों की समिति बनाई गई थी। विशेषज्ञ समिति ने गत सात सितंबर को विवादित प्रश्नों की गहन पड़ताल के बाद अपनी आख्या दी।
इनमें प्रश्न संख्या 17, 91, 98, 104 व 105 का आयोग का उत्तर सही माना गया। इसके अलावा प्रश्न संख्या 102 में आयोग ने इसका उत्तर विकल्प सी माना था लेकिन विशेषज्ञों ने अपनी आख्या में स्पष्ट किया कि विभिन्न आचार्यों ने पुनरुक्त को अर्थवदोष तथा वाक्य दोष दोनों रूपों में स्वीकार किया है।
इस आधार पर समिति ने विकल्प सी एवं डी दोनों को सही माना है। चयन आयोग के अधिवक्ता ने सभी संबद्ध याचिकाओं के वकीलों को रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध कराने के लिए समय की मांग की। आयोग से जानकारी मांगी थी कोर्ट ने टीजीटी हिंदी के प्रश्न संख्या 102 को लेकर दाखिल संजीत सिंह की याचिका पर पूर्व में हो चयन आयोग से जानकारी मांगी थी। याची के अधिवक्ता प्रफुल्ल देव शुक्ल ने कोर्ट को बताया था कि प्रश्न संख्या 102 था कि पुनरुक्ति दोष किस श्रेणी का दोष है?(A) रस दोष (B) छंद दोष (C) वाक्य दोष (D) अर्थ दोष। इस प्रश्न को लेकर उत्तर कुंजी पर आपत्ति की गई है। एडवोकेट प्रफुल्ल देव शुक्ल का कहना था कि याची के अनुसार अर्थ दोष सही है जबकि आयोग ने पहले अर्थ दोष को सही माना और बाद में वाक्य दोष को।

