ahmedabad शहर के सिविल अस्पताल के बालरोग विभाग की नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआइसीयू) टीम ने गंभीर स्थिति में पहुंचे दो नवजातों को सघन उपचार और लगातार निगरानी के बाद स्वस्थ कर घर भेजा। इनमें एक बच्चा महज 26 सप्ताह में 1 किलो वजन के साथ पैदा हुआ था और जन्म से ही सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहा था। वहीं दूसरे नवजात को जन्म के बाद गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के साथ मस्तिष्क में रक्त का थक्का और दौरे जैसी जटिलताएं हो गई थीं। दोनों बच्चों को लंबे उपचार के बाद स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दी गई।
इनमें से पहले बच्चे के फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंग पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण जन्म के तुरंत बाद कृत्रिम सांस की जरूरत पड़ी। उसे एनआइसीयू में भर्ती कर शुरू में नस के जरिए पोषण दिया गया। हालत में सुधार होने पर चम्मच-कटोरी से मां का दूध देना शुरू किया गया। उपचार के 81वें दिन बच्चे ने बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सांस लेना शुरू किया। 84 दिन बाद उसका वजन 1.8 किलो हो गया। आवश्यक जांच के बाद उसे घर भेज दिया गया। दूसरा बच्चा 39 सप्ताह के पूर्ण गर्भकाल के बाद पैदा हुआ था, लेकिन जन्म के साथ सांस लेने में परेशानी होने पर एनआइसीयू में भर्ती किया गया। स्थिति बिगड़ने पर उसे वेंटिलेटर के सहारे ट्रीट किया। जांच में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई। कल्चर रिपोर्ट के आधार पर एंटीबायोटिक उपचार दिया गया।
शुरुआत में नस के जरिए पोषण देने के बाद राइल्स ट्यूब से दूध और फिर मां का दूध शुरू किया गया। लगातार उपचार से उसकी सांस की स्थिति सामान्य हुई और वह बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के सांस लेने लगा।
समय पर उपचार, लगातार निगरानी से मिली सफलता
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि दोनों मामलों में नवजातों की स्थिति बेहद गंभीर थी। समय पर बीमारी का निदान, आधुनिक उपचार और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी के कारण दोनों बच्चों को गंभीर स्थिति से बाहर निकालकर स्वस्थ अवस्था में घर भेजना संभव हुआ। एनआइसीयू प्रभारी डॉ. चारुल मेहता के अनुसार बेहद कम वजन वाले प्रीमैच्योर बच्चों और गंभीर संक्रमण वाले नवजातों के उपचार में हर क्षण महत्वपूर्ण होता है। श्वास और पोषण का संतुलित प्रबंधन तथा टीम के समन्वित प्रयास से दोनों मामलों में सफलता मिली। डॉ. अनुआ चौहान ने बताया कि गंभीर संक्रमण के मामले में कल्चर रिपोर्ट के आधार पर सही एंटीबायोटिक का चयन, सांस को स्थिर रखना और पर्याप्त पोषण देना उपचार का अहम हिस्सा रहा। सिविल अस्पताल में यह पूरा उपचार निशुल्क किया गया।

