मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या के 17 दिन बाद भी उनके शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है। शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में फ्रीजर में रखा हुआ है। परिवार की सहमति नहीं मिलने के कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया अटकी हुई है। वहीं, जांच अपने हाथ में लेने के दूसरे दिन ही सीबीआई ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई ले जाने की व्यवस्था करने के संबंध में सिविल अस्पताल के एसएमओ को पत्र लिखा था। अस्पताल प्रबंधन ने शव को रेफर करने की प्रक्रिया भी पूरी कर दी थी, लेकिन परिवार के इनकार के कारण आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी। अब पोस्टमार्टम में हो रही देरी से सीबीआई की जांच रिपोर्ट तैयार करने में भी मुश्किलें आने की आशंका जताई जा रही है। सीबीआई ने परिवार को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनी
13 अक्टूबर को हुए परविंदर झोटा हत्याके सात दिन बाद ही केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। जिसके बाद 20 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे सीबीआई की एक टीम ने मानसा पहुंचकर जांच शुरू कर दी थी। जिसके बाद सीबीआई की टीम ने परिवार से संपर्क कर शव का पोस्टमार्टम पीजीआई में करवाने के लिए सहमति देने का प्रयास किया था। टीम ने परिवार को समझाया था कि पोस्टमार्टम के बाद शव में केमिकल इंजेक्ट करके उसे दोबारा सुरक्षित रखा जा सकता है। हालांकि, मृतक की पत्नी और पिता ने कमेटी के सदस्यों व अन्य लोगों से बातचीत करने के बाद पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया। इसके चलते शव का पोस्टमार्टम अब तक नहीं हो सका है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बिना जांच पूरी करने में आ सकती है दिक्कत
पुलिस के अनुसार किसी हत्या के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसमें मौत के कारण, शरीर पर चोटों की प्रकृति और अन्य चिकित्सकीय पहलुओं से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। जांच एजेंसी इन तथ्यों को केस से जुड़े अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर जांच की दिशा तय करती है। झोटा हत्याकांड में भी पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण सीबीआई को जांच के इस महत्वपूर्ण हिस्से को पूरा करने में परेशानी आ सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही जांच एजेंसी उसे अपने रिकॉर्ड में शामिल कर अन्य साक्ष्यों के साथ उसका मिलान कर सकेगी। हालांकि, जांच पर वास्तविक असर कितना पड़ेगा, यह मामले के अन्य साक्ष्यों और जांच की प्रगति पर निर्भर करेगा।
सीबीआई के पत्र के बाद एसएमओ ने पूरी की थी रेफर करने की प्रक्रिया
बताया जा रहा है कि सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लेने के दूसरे दिन यानि 21 अक्टूबर को ही मानसा सिविल अस्पताल के एसएमओ को पत्र लिखकर शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई ले जाने हेतु वाहन का प्रबंध करने को कहा था। पत्र मिलने के बाद एसएमओ डा. गुरमेल सिंह ने शव को ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने के साथ उसे रेफर करने की प्रक्रिया भी पूरी कर दी थी। इसके बावजूद परिवार की सहमति नहीं बनने से शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई नहीं भेजा जा सका। ऐसे में अब तक शव सिविल अस्पताल की मोर्चरी में ही रखा हुआ है। हर दो घंटे बाद जांचा जा रहा फ्रीजर का तापमान
मोर्चरी में लंबे समय से शव रखे होने के कारण अस्पताल प्रबंधन उसकी सुरक्षा और उचित तापमान बनाए रखने पर नजर रख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, एसएमओ ने शव की देखभाल के लिए मोर्चरी में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। फ्रीजर का तापमान हर दो घंटे बाद चेक किया जाता है, ताकि शव को निर्धारित ठंडे वातावरण में रखा जा सके। बिजली गुल होने की स्थिति में फ्रीजर का तापमान बनाए रखने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने अलग से बड़ी बैटरियों का बैकअप भी रखा है। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति बाधित होने पर फ्रीजर को चालू रखने और शव को सुरक्षित रखने की व्यवस्था बनाए रखना है। लंबे समय तक शव रखने से नमूनों की जांच प्रभावित होने की आशंका
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े डाक्टरों अनुसार शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के बावजूद समय बीतने के साथ शरीर में जैविक बदलाव होते रहते हैं। शरीर के प्रोटीन का टूटना और ऊतकों में होने वाले बदलाव पोस्टमार्टम के दौरान कुछ निष्कर्षों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, फ्रीजर में लगातार उचित तापमान बनाए रखने से इन बदलावों की गति कम हो सकती है। ऐसे में झोटा के शव का पोस्टमार्टम जितनी देर से होगा, जांच के लिए जरूरी चिकित्सकीय निष्कर्षों को दर्ज करने में उतनी ही सावधानी की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल पोस्टमार्टम को लेकर परिवार की सहमति नहीं बनने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। सीबीआई की जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भूमिका और इस प्रक्रिया में होने वाली देरी का वास्तविक प्रभाव आगे की जांच के दौरान स्पष्ट होगा।

