झज्जर के नागरिक अस्पताल में गुरुवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। अस्पताल की लिफ्ट में ढाई साल के मासूम का हाथ फंस गया। बच्चा करीब 20 मिनट तक दर्द से चीखता रहा, जबकि अपने बेटे को तड़पता देखकर गर्भवती मां रोती-बिलखती रही। बच्चे की चीखें सुनकर अस्पताल के मेडिकल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्चे को सुरक्षित निकालने के प्रयास शुरू किए। काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोलकर मासूम को बाहर निकाला गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्चे के हाथ में हल्का फ्रैक्चर होने की बात सामने आई है। घटना के दौरान सबसे बड़ी चिंता इस बात की थी कि लिफ्ट चालू थी और बच्चे का हाथ दरवाजे के पीछे वाले हिस्से में फंसा हुआ था। ऐसे में लिफ्ट के चलने से बच्चे को गंभीर चोट लगने का खतरा था। मेडिकल स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पहले लिफ्ट बंद कराई और फिर रॉड की मदद से दरवाजा खोलने की कोशिश की। समय रहते उठाए गए कदमों से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मां के साथ वार्ड में जा रहा था मासूम, अचानक लिफ्ट में फंसा हाथ जानकारी के अनुसार, बच्चे की मां पिछले दो दिनों से झज्जर के नागरिक अस्पताल में भर्ती है। वह गर्भवती है और उसके साथ उसका ढाई साल का बेटा भी था। मां अपने बेटे के साथ लिफ्ट से ऊपर वार्ड में जाना चाहती थी। इसी दौरान उसने लिफ्ट का दरवाजा खोलने के लिए बटन दबाया। दरवाजा खुलने लगा तो बच्चा मां का हाथ छोड़कर लिफ्ट की तरफ बढ़ गया। इसी दौरान उसका हाथ दरवाजे के पीछे वाले हिस्से में फंस गया। अचानक हाथ फंसने से बच्चा दर्द के मारे जोर-जोर से चीखने लगा। बेटे को इस हालत में देखकर मां घबरा गई। वह अपने बच्चे को बचाने के लिए मदद मांगती रही और रो-रोकर उसका बुरा हाल हो गया। बच्चे की चीखें सुनकर आसपास मौजूद लोग और अस्पताल के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर में वहां लोगों की भीड़ जुट गई और सभी मासूम को सुरक्षित निकालने की कोशिश में लग गए। लिफ्ट चालू होने से बढ़ा खतरा, पहले बंद कराई गई मशीन घटना के दौरान लिफ्ट का चालू होना सबसे बड़ी चिंता का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक, बच्चे का हाथ ग्राउंड फ्लोर पर फंसा हुआ था, जबकि लिफ्ट का कंट्रोल तीसरी मंजिल पर था। ऐसी स्थिति में यदि लिफ्ट ऊपर की ओर चल पड़ती तो बच्चे को गंभीर चोट लग सकती थी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मेडिकल स्टाफ के एक सदस्य ने तुरंत ऊपर जाकर लिफ्ट बंद कराई। इसके बाद नीचे मौजूद कर्मचारियों ने बच्चे का हाथ सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास शुरू किए। दरवाजे को खोलने के लिए रॉड की मदद ली गई। काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला जा सका और बच्चे को बाहर निकाल लिया गया। इस दौरान बच्चा लगातार दर्द से परेशान रहा। राहत की बात यह रही कि उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रिपोर्टर ने तुरंत दी सूचना, डीसी ने सीएमओ को किया अलर्ट घटना के समय दैनिक भास्कर के रिपोर्टर संजीत कबलाना भी नियमित कार्य के सिलसिले में नागरिक अस्पताल पहुंचे हुए थे। लिफ्ट में बच्चे का हाथ फंसा होने और उसके चीखने की आवाज सुनने के बाद उन्होंने तुरंत मेडिकल स्टाफ को इसकी सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी झज्जर वर्षा खांगवाल को भी जानकारी दी गई। डीसी ने तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को मामले से अवगत कराते हुए अलर्ट किया। इसके बाद डॉक्टर अचल त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और बच्चे की जांच कराई गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्चे के हाथ में हल्का फ्रैक्चर होने की बात सामने आई है। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उसकी चोट का आकलन किया गया। गर्भवती मां के सामने तड़पता रहा बेटा, अस्पताल की सुरक्षा पर सवाल यह घटना बच्चे की मां के लिए बेहद भयावह रही। एक ओर वह खुद गर्भवती होने के कारण अस्पताल में भर्ती है, वहीं दूसरी ओर उसकी आंखों के सामने उसका छोटा बेटा दर्द से चीखता रहा। बेबस मां अपने बच्चे को इस हालत में देखकर रोती-बिलखती रही। मौके पर मौजूद मेडिकल स्टाफ ने बच्चे को निकालने के लिए प्रयास किए और आखिरकार उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। हालांकि, इस घटना ने नागरिक अस्पताल की लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में मरीजों के साथ बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों की आवाजाही भी होती है। ऐसे में लिफ्ट के दरवाजे में एक छोटे बच्चे का हाथ फंस जाना सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जरूरत को सामने लाता है। अब सवाल यह है कि लिफ्ट के दरवाजे में बच्चे का हाथ कैसे फंसा? क्या लिफ्ट में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा सेंसर और अन्य जरूरी इंतजाम मौजूद हैं? क्या लिफ्ट की नियमित जांच और रखरखाव किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। समय रहते बच्चे को बाहर निकाल लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन नागरिक अस्पताल में हुई इस घटना ने मरीजों और उनके साथ आने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल प्रशासन के लिए जरूरी है कि लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराई जाए और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

