बरेली दंगे की पहली बरसी, तौकीर रजा जेल में कैद:365 दिन से सलाखों के पीछे आईएमसी प्रमुख, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की जमानत

बरेली दंगे की पहली बरसी, तौकीर रजा जेल में कैद:365 दिन से सलाखों के पीछे आईएमसी प्रमुख, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की जमानत

ठीक एक साल पहले 26 सितंबर 2025 को मजहबी उन्माद की आड़ में नाथ नगरी नगरी बरेली को दंगों की भट्टी में झोंकने की पूरी तैयारी थी। जुमे की नमाज के नाम पर हजारों की भीड़ इस्लामिया ग्राउंड की तरफ तमंचे और पत्थरों के साथ बढ़ी, खाकी पर हमला बोला और दर्जनों चौराहों पर पथराव किया। शहर को राख करने की इस साजिश का सूत्रधार मौलाना तौकीर रजा आज पूरे 365 दिन बाद भी फतहगढ़ सेंट्रल जेल की कालकोठरी में बंद है। सुप्रीम कोर्ट तक से जमानत खारिज होने और 100 से अधिक गुर्गों के सलाखों के पीछे जाने के बाद अब सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय तौकीर के घर हाजिरी लगाने पहुंचे हैं। जुमे की नमाज के बाद शहर को सुलगाने की रची गई थी गहरी साजिश
26 सितंबर 2025 को बरेली की फिजा में जहर घोलने की एक सोची-समझी साजिश नाकाम कर दी गई थी। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा ने बड़े धरने का ऐलान कर जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय को इस्लामिया ग्राउंड में जुटने का आह्वान किया था। पुलिस जांच में यह सच सामने आया कि जिले में दंगा भड़काने की तैयारी कई दिनों से चल रही थी। भीड़ को जुटाने के लिए न केवल भड़काऊ भाषण दिए गए, बल्कि उपद्रवियों को पत्थर और अवैध तमंचों से लैस कर मैदान की ओर भेजा गया था ताकि बरेली को एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा की आग में झोंका जा सके। चौराहों पर पथराव और फायरिंग, पुलिस की मुस्तैदी से बैकफुट पर आए उपद्रवी
इस्लामिया ग्राउंड की तरफ बढ़ रही हजारों की उन्मादी भीड़ को जब पुलिस ने रोकने का प्रयास किया, तो उपद्रवियों ने कानून के रखवालों पर धावा बोल दिया। धक्का-मुक्की के बाद सीधी फायरिंग और जमकर पथराव शुरू कर दिया गया। देखते ही देखते नोवेल्टी चौराहा, नौमहला मस्जिद, रोडवेज बस स्टैंड, जिला अस्पताल रोड, श्यामगंज चौराहा, पुराना शहर, कैंट, किला और प्रेमनगर इलाके में हिंसा फैलाने की कोशिश की गई। पुलिस ने उपद्रवियों पर लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया। अधिकारियों की त्वरित रणनीति और कड़े रुख के चलते शहर को बड़ी तबाही से बचा लिया गया। सोशल मीडिया पर भड़काऊ तकरीरें, ‘सर तन से जुदा’ के नारों की गूंज
जांच में उजागर हुआ कि तौकीर रजा उपद्रव से कई दिन पहले से संवेदनशील मुस्लिम बस्तियों में बैठकें कर रहे थे। कानपुर के एक विवाद की आड़ में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे हमले किए और माहौल गरमाया। तौकीर ने खुलेआम चेतावनी दी थी कि उनके समर्थकों को रोका गया तो अंजाम भुगतना होगा। उपद्रव के दौरान लगे ‘सर तन से जुदा’ के नारों और वायरल वीडियो फुटेज ने अदालत में पुलिस के पक्ष को मजबूत किया, जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट तक ने हिंसा की गंभीरता को देखते हुए मौलाना की जमानत याचिका खारिज कर दी।
फतेहगढ़ जेल में कटे 365 दिन, 10 मुकदमों में 100 आरोपी बंद
26 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा कारणों से तौकीर रजा को कुछ ही घंटों में बरेली से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया था। आज पूरे एक साल यानी 365 दिन बीत जाने के बाद भी वह जेल की चारदीवारी से बाहर नहीं आ सके हैं। उनकी सभी पेशियां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जा रही हैं। बरेली के कोतवाली, किला, कैंट, बारादरी और प्रेमनगर थानों में कुल 10 संगीन मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। आईएमसी के कई पदाधिकारियों समेत 100 से अधिक उपद्रवी इस समय जेल में बंद हैं। दंगाइयों के ठिकानों पर चला बुलडोजर, अवैध संपत्तियां सील
उपद्रव के बाद जिला प्रशासन ने उपद्रवियों और साजिशकर्ताओं के खिलाफ आर्थिक चोट की रणनीति अपनाई। बवाल में शामिल लोगों और उनके संरक्षकों के अवैध बारात घरों, होटलों, मकानों और गेस्ट हाउसों को चिह्नित कर बुलडोजर चलाया गया। दर्जनों व्यावसायिक संपत्तियों को सील कर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुले मंचों से चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले हर तत्व का हश्र तौकीर रजा जैसा ही होगा। एडीजी, डीआईजी, एसएसपी और डीएम की अगुवाई में हुई सख्त कार्रवाई ने उपद्रवियों के हौसले पस्त कर दिए। एक साल बाद अचानक सियासी सरगर्मी, अजय राय पहुंचे तौकीर के घर
घटना की पहली बरसी से ठीक पहले पिछले दो-तीन दिनों में बरेली का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मौलाना तौकीर रजा के सौदागरान स्थित आवास पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की। बंद कमरे में हुई इस बातचीत के बाद अजय राय ने इसे केवल पारिवारिक और शिष्टाचार मुलाकात बताया, लेकिन एक साल बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का तौकीर के दरवाजे पहुंचना सीधे तौर पर मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कवायद माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रोफाइल: आला हजरत खानदान से लेकर जेल की सलाखों तक का सफर
मौलाना तौकीर रजा खां सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के सबसे बड़े मरकज ‘दरगाह आला हजरत’ के संस्थापक इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के परपोते हैं। इसी रसूख के दम पर उन्होंने साल 2001 में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) का गठन कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। बरेली की राजनीति में तौकीर रजा हमेशा एक विवादास्पद चेहरे रहे हैं। वे सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों ही दलों के साथ समय-समय पर सियासी समझौते करते रहे हैं। सपा सरकार में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिला था, लेकिन उनके तीखे और भड़काऊ बयानों ने उन्हें लगातार विवादों के केंद्र में बनाए रखा। आज धार्मिक और सियासी दोनों ही मोर्चों पर तौकीर रजा का प्रभाव अपने सबसे कमजोर दौर में पहुंच चुका है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *