बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में फर्जी प्रमाण पत्रों पर 20 साल से नौकरी करने का मामला सामने आया है। पदचर के पद पर तैनात तीन कर्मचारियों ने सेवा नियमित कराने के लिए स्कूलों के जाली ट्रांसफर सर्टिफिकेट जमा किए थे। आंतरिक जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद तीनों के खिलाफ कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी कर्मी शिवकुमार यादव, माधव यादव और हरिमोहन यादव की प्रारंभिक नियुक्ति 1994 और 1995 में दैनिक/संविदा आधार पर हुई थी। वर्ष 2005 में सेवा समायोजन के लिए तीनों से शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे गए। इसके बाद समिति ने 3 अक्टूबर 2016 को अन्य कर्मियों के साथ इनकी सेवा स्थायी कर दी थी। टीसी का सत्यापन संबंधित स्कूलों से कराया गया, तो पूरा खेल उजागर हो गया। ऐसे खुली पोल शिवकुमार यादव ने उच्च विद्यालय कौरा (भोजपुर) का 9वीं कक्षा का टीसी लगाया था। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने रिपोर्ट दी कि 1970 से 1989 तक की प्रवेश पंजी में इनका नाम नहीं है और टीसी पर हेडमास्टर के दस्तखत भी फर्जी हैं। माधव यादव ने दियारा +2 उच्च विद्यालय करनामेपुर (भोजपुर) का 10वीं का टीसी दिया था। स्कूल ने इसे फर्जी करार दिया। जांच शुरू हुई तो माधव ने उसी स्कूल से दूसरा टीसी पेश कर दिया, जिसमें पहली बार से अलग जन्मतिथि दर्ज थी।
हरिमोहन यादव ने डीबीआरके जालान स्कूल (पटना सिटी) का 8वीं का टीसी लगाया था। स्कूल रिकॉर्ड की जांच में वर्ष 1992 की प्रवेश पंजी में इनका नाम नहीं मिला। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में फर्जी प्रमाण पत्रों पर 20 साल से नौकरी करने का मामला सामने आया है। पदचर के पद पर तैनात तीन कर्मचारियों ने सेवा नियमित कराने के लिए स्कूलों के जाली ट्रांसफर सर्टिफिकेट जमा किए थे। आंतरिक जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद तीनों के खिलाफ कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया है। प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी कर्मी शिवकुमार यादव, माधव यादव और हरिमोहन यादव की प्रारंभिक नियुक्ति 1994 और 1995 में दैनिक/संविदा आधार पर हुई थी। वर्ष 2005 में सेवा समायोजन के लिए तीनों से शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे गए। इसके बाद समिति ने 3 अक्टूबर 2016 को अन्य कर्मियों के साथ इनकी सेवा स्थायी कर दी थी। टीसी का सत्यापन संबंधित स्कूलों से कराया गया, तो पूरा खेल उजागर हो गया। ऐसे खुली पोल शिवकुमार यादव ने उच्च विद्यालय कौरा (भोजपुर) का 9वीं कक्षा का टीसी लगाया था। स्कूल के प्रधानाध्यापक ने रिपोर्ट दी कि 1970 से 1989 तक की प्रवेश पंजी में इनका नाम नहीं है और टीसी पर हेडमास्टर के दस्तखत भी फर्जी हैं। माधव यादव ने दियारा +2 उच्च विद्यालय करनामेपुर (भोजपुर) का 10वीं का टीसी दिया था। स्कूल ने इसे फर्जी करार दिया। जांच शुरू हुई तो माधव ने उसी स्कूल से दूसरा टीसी पेश कर दिया, जिसमें पहली बार से अलग जन्मतिथि दर्ज थी।
हरिमोहन यादव ने डीबीआरके जालान स्कूल (पटना सिटी) का 8वीं का टीसी लगाया था। स्कूल रिकॉर्ड की जांच में वर्ष 1992 की प्रवेश पंजी में इनका नाम नहीं मिला।

