जहानाबाद में संस्कृत दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके बचाव के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने बताया कि संस्कृत भारत की प्राचीन और समृद्ध भाषा है, जिसका देश की संस्कृति, परंपरा, शिक्षा और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हालांकि, बदलते समय के साथ संस्कृत भाषा के प्रति लोगों की रुचि में कमी आई है, जिससे इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। संस्कृत भाषा और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े मुद्दों को उठाया कार्यक्रम में मुख्य रूप से एमएलसी जीवेश कुमार ने कहा कि संस्कृत भाषा के विकास और संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रुचि कम होने के कारण यह भाषा धीरे-धीरे लुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही है। इसे बचाने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। एमएलसी जीवेश कुमार ने जानकारी दी कि उन्होंने विधानसभा में भी लगातार संस्कृत भाषा और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उन्होंने सरकार से संस्कृत विद्यालयों को पुनर्जीवित करने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को संस्कृत की शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल सकें। विद्यालयों को मजबूत करने की आवश्यकता पर दिया बल उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। एमएलसी ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को बेहतर संसाधन, शिक्षकों की व्यवस्था और विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना आवश्यक है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी इस महत्वपूर्ण भाषा और इसकी समृद्ध विरासत से दूर हो सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य लोगों ने भी संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और विद्यालयों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि संस्कृत को केवल धार्मिक या पारंपरिक भाषा तक सीमित न रखकर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भी इसके अध्ययन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। जहानाबाद में संस्कृत दिवस के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसके बचाव के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने बताया कि संस्कृत भारत की प्राचीन और समृद्ध भाषा है, जिसका देश की संस्कृति, परंपरा, शिक्षा और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हालांकि, बदलते समय के साथ संस्कृत भाषा के प्रति लोगों की रुचि में कमी आई है, जिससे इसके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। संस्कृत भाषा और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े मुद्दों को उठाया कार्यक्रम में मुख्य रूप से एमएलसी जीवेश कुमार ने कहा कि संस्कृत भाषा के विकास और संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रुचि कम होने के कारण यह भाषा धीरे-धीरे लुप्त होने की स्थिति में पहुंच रही है। इसे बचाने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। एमएलसी जीवेश कुमार ने जानकारी दी कि उन्होंने विधानसभा में भी लगातार संस्कृत भाषा और संस्कृत विद्यालयों से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उन्होंने सरकार से संस्कृत विद्यालयों को पुनर्जीवित करने की मांग की है, ताकि विद्यार्थियों को संस्कृत की शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर मिल सकें। विद्यालयों को मजबूत करने की आवश्यकता पर दिया बल उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। एमएलसी ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों को बेहतर संसाधन, शिक्षकों की व्यवस्था और विद्यार्थियों को संस्कृत शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना आवश्यक है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी इस महत्वपूर्ण भाषा और इसकी समृद्ध विरासत से दूर हो सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य लोगों ने भी संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और विद्यालयों को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि संस्कृत को केवल धार्मिक या पारंपरिक भाषा तक सीमित न रखकर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भी इसके अध्ययन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण का संकल्प भी लिया गया।

