नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार की नदियों के जलस्तर को लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर है। हालांकि, पिछले 24 घंटे में गंडक-गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में मामूली गिरावट हुई है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। बिहार के 5 जिल बाढ़ से प्रभावित हैं, यहां 5600 लोगों को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है। 2,327 पॉलीथीन शीट बांटे गए हैं। खासकर पूर्वी-पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश है। गोपालगंज में गंडक से संभावित प्रभाव को देखते हुए आपदा विभाग अलर्ट है। पटना में गंगा का जलस्तर कुछ जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर है, पर पानी घटने का सिलसिला जारी है, लेकिन दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के प्रभारी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि कंट्रोल रूम से 24 घंटे स्थिति की निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन से पंचायत स्तर तक लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिया गया है। दियारा और निचले इलाकों पर विशेष नजर पटना के दियारा और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की ओर से लगातार माइकिंग कर लोगों को नदी के आसपास नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत शिविरों में पहुंचने की अपील की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मुखिया और वार्ड पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल प्रशासन तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में NDRF और SDRF वर्तमान में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी को सबसे अधिक प्रभावित और संवेदनशील जिलों में रखा गया है। इन जिलों में प्रशासन को विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। गोपालगंज में गंडक नदी के संभावित प्रभाव को देखते हुए भी सतर्कता बढ़ाई गई है। सभी संवेदनशील क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ते ही रेस्क्यू शुरू किया जा सकता है।
2,327 पॉलीथीन शीट का वितरण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री की व्यवस्था की गई है। राज्य के पांच जिलों में अब तक 2,327 पॉलीथीन शीट वितरित की गई हैं। पश्चिमी चंपारण में प्रभावित लोगों के बीच सूखा राशन भी वितरित किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सूखा राशन, पॉलीथीन शीट और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजने की तैयारी है। विस्थापितों के लिए 7 जगहों पर सामुदायिक रसोई प्रभावित इलाकों में फिलहाल 7 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। यहां बाढ़ प्रभावित और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। जरूरत बढ़ने पर सामुदायिक रसोई की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
NDRF-SDRF की टीमें तैनात बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य के लिए SDRF और 8 NDRF टीमों को तैनात किया गया है। सभी संवेदनशील जिलों में बचाव दलों को तैयार रखा गया है, ताकि पानी बढ़ने या लोगों को तत्काल निकालने की जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के प्रभारी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को जरूरत के अनुसार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया गया है। प्रशासन का फोकस फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाने पर है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए हर 3 किलोमीटर पर इंजीनियर गंडक, गंगा और अन्य संवेदनशील नदियों के तटबंधों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। तटबंधों पर होमगार्ड, इंजीनियर और अन्य कर्मियों को लगभग हर 3 किलोमीटर पर तैनात किया गया है। अधिकारियों को रातभर अलर्ट मोड में रहने और जलस्तर के साथ-साथ तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
कंट्रोल रूम 24 घंटे एक्टिव उमेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र का कंट्रोल रूम 24/7 काम कर रहा है। जिलों से लगातार जानकारी ली जा रही है और उसी के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आम लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र जिलाधिकारी स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर तक लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में जुटा है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
माइकिंग कर लोगों को किया जा रहा जागरूक निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार माइकिंग कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। लोगों को नदी के किनारे, तटबंधों और जलमग्न क्षेत्रों में जाने से भी बचने की सलाह दी गई है। नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार की नदियों के जलस्तर को लेकर प्रशासन हाई अलर्ट पर है। हालांकि, पिछले 24 घंटे में गंडक-गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में मामूली गिरावट हुई है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। बिहार के 5 जिल बाढ़ से प्रभावित हैं, यहां 5600 लोगों को सुरक्षित जगह पर ले जाया गया है। 2,327 पॉलीथीन शीट बांटे गए हैं। खासकर पूर्वी-पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश है। गोपालगंज में गंडक से संभावित प्रभाव को देखते हुए आपदा विभाग अलर्ट है। पटना में गंगा का जलस्तर कुछ जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर है, पर पानी घटने का सिलसिला जारी है, लेकिन दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के प्रभारी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि कंट्रोल रूम से 24 घंटे स्थिति की निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन से पंचायत स्तर तक लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिया गया है। दियारा और निचले इलाकों पर विशेष नजर पटना के दियारा और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ी हुई है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की ओर से लगातार माइकिंग कर लोगों को नदी के आसपास नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत शिविरों में पहुंचने की अपील की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मुखिया और वार्ड पार्षदों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल प्रशासन तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में NDRF और SDRF वर्तमान में पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण और सीतामढ़ी को सबसे अधिक प्रभावित और संवेदनशील जिलों में रखा गया है। इन जिलों में प्रशासन को विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। गोपालगंज में गंडक नदी के संभावित प्रभाव को देखते हुए भी सतर्कता बढ़ाई गई है। सभी संवेदनशील क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ते ही रेस्क्यू शुरू किया जा सकता है।
2,327 पॉलीथीन शीट का वितरण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री की व्यवस्था की गई है। राज्य के पांच जिलों में अब तक 2,327 पॉलीथीन शीट वितरित की गई हैं। पश्चिमी चंपारण में प्रभावित लोगों के बीच सूखा राशन भी वितरित किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सूखा राशन, पॉलीथीन शीट और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजने की तैयारी है। विस्थापितों के लिए 7 जगहों पर सामुदायिक रसोई प्रभावित इलाकों में फिलहाल 7 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। यहां बाढ़ प्रभावित और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। जरूरत बढ़ने पर सामुदायिक रसोई की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
NDRF-SDRF की टीमें तैनात बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य के लिए SDRF और 8 NDRF टीमों को तैनात किया गया है। सभी संवेदनशील जिलों में बचाव दलों को तैयार रखा गया है, ताकि पानी बढ़ने या लोगों को तत्काल निकालने की जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के प्रभारी उमेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को जरूरत के अनुसार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया गया है। प्रशासन का फोकस फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाने पर है। तटबंधों की सुरक्षा के लिए हर 3 किलोमीटर पर इंजीनियर गंडक, गंगा और अन्य संवेदनशील नदियों के तटबंधों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। तटबंधों पर होमगार्ड, इंजीनियर और अन्य कर्मियों को लगभग हर 3 किलोमीटर पर तैनात किया गया है। अधिकारियों को रातभर अलर्ट मोड में रहने और जलस्तर के साथ-साथ तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
कंट्रोल रूम 24 घंटे एक्टिव उमेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र का कंट्रोल रूम 24/7 काम कर रहा है। जिलों से लगातार जानकारी ली जा रही है और उसी के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आम लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र जिलाधिकारी स्तर से लेकर स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर तक लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में जुटा है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
माइकिंग कर लोगों को किया जा रहा जागरूक निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार माइकिंग कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। लोगों को नदी के किनारे, तटबंधों और जलमग्न क्षेत्रों में जाने से भी बचने की सलाह दी गई है।

