जमुई जिले के बरहट प्रखंड के मलयपुर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट पर चस्पा एक नोटिस ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। नोटिस पर साफ लिखा है- डॉक्टर नहीं है, इलाज कराना है तो बरहट जाइए। ग्रामीणों को घर के पास इलाज देने के सरकारी दावों के बीच मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। उन्हें करीब 10 किलोमीटर दूर बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) जाने को कहा जा रहा है। सोमवार से गुरुवार तक ही मिलते हैं डॉक्टर नोटिस के मुताबिक, मलयपुर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार शर्मा सोमवार से गुरुवार तक ही ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते हैं। इन तीन दिनों में बीमार होने पर मरीजों को बरहट पीएचसी जाने की सलाह दी गई है। नोटिस में डॉक्टरों की कमी के कारण रोस्टर में बदलाव की बात भी लिखी गई है। साथ ही बताया गया है कि बरहट पीएचसी 24 घंटे खुला रहता है। इस व्यवस्था का असर मरीजों पर पड़ रहा है। इलाज की उम्मीद में मलयपुर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले कई मरीजों को बिना दिखाए ही लौटना पड़ रहा है। एक लाख से ज्यादा की आबादी, सिर्फ दो डॉक्टरों पर जिम्मेदारी बरहट प्रखंड की आबादी एक लाख से ज्यादा है, लेकिन यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। बरहट पीएचसी में डॉ. विवेक कुमार सिंह और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ही तैनात हैं। प्रखंड मुख्यालय में ही डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित इलाज की व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौती बन गया है। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। मौसम बदलने के साथ बढ़ रहे मरीज, इलाज के लिए भटक रहे लोग मौसम बदलने के साथ सर्दी-खांसी, बुखार, वायरल संक्रमण और पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे समय में अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलने से मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार छोटे अस्पताल इसलिए खोलती है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े। लेकिन मलयपुर में अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को इलाज के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है। तीन डॉक्टरों के इस्तीफे से बिगड़ी स्थिति इस मामले में प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि प्रखंड में डॉक्टरों की भारी कमी है। इसकी लिखित सूचना विभाग को दी गई है। हाल ही में यहां पदस्थापित तीन डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे स्थिति और खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि मजबूरी में रोस्टर में बदलाव कर स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। फिलहाल बरहट पीएचसी 24 घंटे मरीजों के लिए खुला है। जमुई जिले के बरहट प्रखंड के मलयपुर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट पर चस्पा एक नोटिस ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। नोटिस पर साफ लिखा है- डॉक्टर नहीं है, इलाज कराना है तो बरहट जाइए। ग्रामीणों को घर के पास इलाज देने के सरकारी दावों के बीच मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद भी डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। उन्हें करीब 10 किलोमीटर दूर बरहट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) जाने को कहा जा रहा है। सोमवार से गुरुवार तक ही मिलते हैं डॉक्टर नोटिस के मुताबिक, मलयपुर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार शर्मा सोमवार से गुरुवार तक ही ओपीडी में मरीजों को देखते हैं। शुक्रवार, शनिवार और रविवार को अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते हैं। इन तीन दिनों में बीमार होने पर मरीजों को बरहट पीएचसी जाने की सलाह दी गई है। नोटिस में डॉक्टरों की कमी के कारण रोस्टर में बदलाव की बात भी लिखी गई है। साथ ही बताया गया है कि बरहट पीएचसी 24 घंटे खुला रहता है। इस व्यवस्था का असर मरीजों पर पड़ रहा है। इलाज की उम्मीद में मलयपुर अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाले कई मरीजों को बिना दिखाए ही लौटना पड़ रहा है। एक लाख से ज्यादा की आबादी, सिर्फ दो डॉक्टरों पर जिम्मेदारी बरहट प्रखंड की आबादी एक लाख से ज्यादा है, लेकिन यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ दो डॉक्टरों के भरोसे चल रही है। बरहट पीएचसी में डॉ. विवेक कुमार सिंह और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ही तैनात हैं। प्रखंड मुख्यालय में ही डॉक्टरों की कमी है। ऐसे में अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित इलाज की व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौती बन गया है। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। मौसम बदलने के साथ बढ़ रहे मरीज, इलाज के लिए भटक रहे लोग मौसम बदलने के साथ सर्दी-खांसी, बुखार, वायरल संक्रमण और पेट दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे समय में अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलने से मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार छोटे अस्पताल इसलिए खोलती है, ताकि ग्रामीणों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े। लेकिन मलयपुर में अस्पताल होने के बावजूद मरीजों को इलाज के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्र का चक्कर लगाना पड़ रहा है। तीन डॉक्टरों के इस्तीफे से बिगड़ी स्थिति इस मामले में प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार ने बताया कि प्रखंड में डॉक्टरों की भारी कमी है। इसकी लिखित सूचना विभाग को दी गई है। हाल ही में यहां पदस्थापित तीन डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे स्थिति और खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि मजबूरी में रोस्टर में बदलाव कर स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। फिलहाल बरहट पीएचसी 24 घंटे मरीजों के लिए खुला है।

