मैनपुरी के करहल तहसील के सिंहपुर गांव में चकरोड की पैमाइश को लेकर विवाद हो गया है। गांव के रहने वाले भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी गैरमौजूदगी में उनके खेत की जमीन में चकरोड बना दिया गया। भाजपा नेता ने लेखपाल और कानूनगो की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पैमाइश रद्द कर दोबारा निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। धर्मेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि सिंहपुर ग्राम पंचायत में चकरोड और नाली के लिए जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। उनके मुताबिक, चकबंदी के दौरान चकरोड से जुड़े कुछ गाटों में रास्ते की जमीन पर कब्जा कर उसे जोत लिया गया था। अब आरोप है कि इस रास्ते की भरपाई उनके गाटा संख्या 385 की जमीन से चकरोड निकालकर की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उनके खेत की पैमाइश कर चकरोड डाला गया, तब वह मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने बताया कि उनकी नक्शा दुरुस्ती की फाइल भी चल रही है। ऐसे में उनकी जानकारी और मौजूदगी के बिना यह कार्रवाई किए जाने पर उन्होंने आपत्ति जताई है। भाजपा नेता ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके गाटा संख्या 385 में करीब 8 कड़ी चौड़ा और 10 जरीब लंबा चकरोड बनाया गया है। उनका कहना है कि चकबंदी के दौरान जिन पांच खाताधारकों के खेतों से चकरोड जुड़ा था, उनके पास पर्याप्त जगह होने के बावजूद रास्ता उनके खेत से निकाला गया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने लेखपाल और कानूनगो पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रभाव और दबाव के चलते उनके खेत में चकरोड डलवाया गया। शिकायत में उन्होंने राजस्व कर्मियों पर रिश्वत लेने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ता ने पैमाइश की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि मौके पर दोबारा निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए और यदि नियमों के खिलाफ उनके गाटा में चकरोड डाला गया है तो उसे रद्द किया जाए।

