मानसून सीजन का काफी समय बीतने के बाद भी जिले में पर्याप्त बारिश नहीं होने से जलसंकट की चिंता बनी हुई है। शहर की पेयजल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत कन्हरगांव जलाशय में अब तक केवल 44 प्रतिशत जलभराव हुआ है, यानी जलाशय करीब 56 प्रतिशत खाली है। हालांकि जलस्तर लोएस्ट स्टोरेज लेवल (एलएसएल) से ऊपर पहुंच चुका है, लेकिन जलाशय अभी भी पर्याप्त जलभराव से काफी दूर है। जिले में 1 जून से 31 अगस्त 2026 तक औसतन 675.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 152.1 मिलीमीटर कम है। सामान्य बारिश से 383 मिलीमीटर पीछे जिले में इस मानसून सीजन में अब तक 675.9 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज हुई है। पिछले वर्ष 31 अगस्त तक 828 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। इस तरह इस बार पिछले साल की तुलना में 152.1 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। जिले की सामान्य औसत बारिश 1059 मिलीमीटर है। सामान्य बारिश के मुकाबले अब तक करीब 383 मिलीमीटर की कमी बनी हुई है। कई जलाशयों में जलस्तर कम कम बारिश का असर जिले के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। नगरीय क्षेत्रों और समूह जल प्रदाय योजनाओं से जुड़े कई जलस्रोतों में अभी अपेक्षित जलभराव नहीं हो पाया है। सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले कई जलाशयों का जलस्तर भी एलएसएल के आसपास या उससे नीचे बताया जा रहा है। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। हर्रई में सबसे ज्यादा बारिश 31 अगस्त तक तहसीलवार बारिश के आंकड़ों में हर्रई सबसे आगे है। यहां 973.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद उमरेठ में 845 मिलीमीटर, तामिया में 824.2, चांद में 714.9, जुन्नारदेव में 693.8 और चौरई में 692.6 मिलीमीटर बारिश हुई है। छिंदवाड़ा तहसील में सबसे कम बारिश छिंदवाड़ा तहसील में इस सीजन अब तक सबसे कम 392.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा परासिया में 489.8, मोहखेड़ में 492.1, बिछुआ में 555.1 और अमरवाड़ा में 632.6 मिलीमीटर बारिश हुई है। तहसीलवार आंकड़ों से जिले में बारिश के असमान वितरण की स्थिति भी सामने आ रही है। आने वाले दिनों की बारिश पर नजर अब प्रशासन और किसानों की नजर आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो छिंदवाड़ा शहर की पेयजल आपूर्ति के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचाई व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने से आने वाले समय में पानी की उपलब्धता को लेकर चुनौती बढ़ने की आशंका है।

