Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों की आंतरिक ऑडिट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए राज्य शासन ने नए निर्देश जारी किए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ऑडिट कार्यों की नियमित समीक्षा और चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) फर्मों से मासिक रिपोर्ट लेना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही, अनुबंध की शर्तों के अनुसार ऑडिट कार्य संतोषजनक पाए जाने के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस व्यवस्था की जिम्मेदारी संभागीय संयुक्त संचालकों को सौंपी गई है।
Urban Local Bodies Audit: ऑडिट व्यवस्था को लेकर जारी किए गए नए निर्देश
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ नगर पालिका आंतरिक अंकेक्षण (मानक प्रक्रिया) नियम, 2017 के तहत अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, नगरीय निकायों में आंतरिक ऑडिट के लिए चयनित सीए फर्मों के साथ संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक अनुबंध करेंगे। इसके बाद ही फर्म को ऑडिट कार्य के लिए कार्यादेश जारी किया जाएगा।
CA फर्मों से हर महीने लेनी होगी रिपोर्ट
शासन ने संभागीय संयुक्त संचालकों को निर्देश दिया है कि वे ऑडिट करने वाली चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों से अनुबंध में तय प्रारूप के अनुसार मासिक प्रतिवेदन प्राप्त करें। इससे ऑडिट कार्यों की नियमित निगरानी की जा सकेगी और फर्मों द्वारा किए जा रहे काम की प्रगति का आकलन भी होगा।
कार्य संतुष्टि प्रमाणपत्र के बाद ही होगा भुगतान
आदेश में निविदा की कंडिका 5.4 और 6 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। संभागीय संयुक्त संचालक क्षेत्रीय कार्यालयों को निविदा और अनुबंध की शर्तों के अनुरूप ऑडिट कार्यों की समीक्षा कर भुगतान की कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया है।
इसके तहत संबंधित सीए फर्म को कार्य संतुष्टि प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इसके बाद ही भुगतान के लिए आवश्यक राशि की मांग राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) से की जाएगी। यानी ऑडिट का काम संतोषजनक पाए जाने और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भुगतान किया जा सकेगा।
तत्काल प्रभाव से लागू होंगे निर्देश
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि नए निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। आदेश की प्रतिलिपि नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, संचालक नगरीय प्रशासन, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सभी जिला कलेक्टरों और संभागीय संयुक्त संचालकों को भेजी गई है। इसके अलावा नगर निगमों के महापौर और आयुक्तों तथा नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के अध्यक्षों एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है।

