उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण के बीच खड़े हनुमान मंदिर को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। महामुक्तेश्वरी धाम के पीठाधीश्वर पंडित शंकर लक्ष्मीनारायण जोशी ने मंदिर को हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से दूसरा रास्ता निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि जब नीलगंगा से लोटस स्कूल की ओर जाने वाले मार्ग में बीच में आ रही चिमनी को बचाकर उसके आसपास से सड़क निकाली जा सकती है, तो खड़े हनुमान मंदिर के लिए ऐसा विकल्प क्यों नहीं तलाशा जा रहा। अब देखिए, चिमनी के लिए कैसे रास्ता निकाला गया… नीलगंगा क्षेत्र में सड़क के बीच आ रही चिमनी को हटाने के बजाय उसके आसपास से सड़क निकाली गई है। इसी तरह वहां मौजूद भगवान हनुमान के मंदिर को भी बीच में रखते हुए दोनों तरफ से सड़क बनाई गई और मंदिर को डिवाइडर के बीच रखा गया है। पंडित शंकर जोशी का सवाल है कि जब चिमनी और मंदिर के मामले में ऐसा रास्ता निकाला जा सकता है, तो खड़े हनुमान मंदिर के लिए ऐसा विकल्प क्यों नहीं अपनाया जा सकता? हाथ जोड़कर अपील- बाबा को मत हटाइए पंडित जोशी ने प्रशासनिक अधिकारियों से हाथ जोड़कर और दंडवत प्रणाम करते हुए अपील की कि सिंहस्थ के लिए विकास और सड़क चौड़ीकरण का काम जरूर किया जाए, लेकिन खड़े हनुमान की प्रतिमा को हटाने के बजाय कोई दूसरा विकल्प तलाशा जाए। उन्होंने कहा कि एक मंदिर को उसकी जगह पर रखते हुए सड़क बनाने से विकास कार्य रुकने वाले नहीं हैं। ‘मंदिर को क्षति नहीं पहुंची तो ढांचा टूटा कैसे?’ पंडित शंकर जोशी ने प्रशासन के उस कथित पक्ष पर भी सवाल उठाया कि मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचाई गई। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचाया गया तो उसका ढांचा टूटा कैसे? उन्होंने सवाल किया- क्या मंदिर हवा में टूट गया या कोई आंधी-तूफान आ गया था? उन्होंने कहा कि मौके की स्थिति देखकर लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और मंदिर को हटाने के बजाय समाधान तलाशना चाहिए। विकास के विरोध में नहीं, आस्था का भी ध्यान रखें पंडित शंकर जोशी ने कहा कि संत समाज और हिंदू समाज को इस मामले में अपनी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन विकास के साथ धार्मिक स्थलों और लोगों की आस्था का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनकी मांग है कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम जारी रखते हुए खड़े हनुमान मंदिर को उसी स्थान पर बचाने का विकल्प तलाशा जाए। पुजारी बोले- 14 दिन पहले अचानक आकर हटाने लगे प्रतिमा मंदिर के पुजारी महेश बैरागी का कहना है कि “प्रशासन 14 दिन पहले अचानक आकर प्रतिमा हटाने की बात कहने लगा। हमारी शर्त यही थी कि कागजी कार्रवाई पूरी की जाए और मूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित-संरक्षित तरीके से विस्थापित किया जाए। पहले कागजात न मिलने पर विवाद बढ़ा और उज्जैन बंद जैसी स्थिति बनी। बाद में जब नगर निगम की टीम ने आसपास की दीवारें और गुंबद हटाया, तो पाया कि प्रतिमा लॉकिंग पद्धति पर टिकी है और इसे सीधे उठाने पर विग्रह के बिखरने का खतरा है। देखिए हनुमान मंदिर की शिफ्टिंग प्रोसेस… 5-6 फीट गहरे गड्ढे खुदवाकर जांच की इसके बाद इंदौर के विशेषज्ञों और आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट को बुलाया गया। उन्होंने 5-6 फीट के गड्ढे खुदवाकर जांच की और बताया कि आधुनिक इक्विपमेंट, जैसे GPR और स्कैनिंग मशीनों के बिना इसे सुरक्षित हटाना संभव नहीं है। देखिए, यहीं विराजित किए जाएंगे हनुमान… IIT की टीम भी कर चुकी दौरा SGSITS और IIT की टीम ने भी दौरा किया था और स्कैनिंग मशीनों के साथ दोबारा आने की बात कही थी, लेकिन वे अभी तक नहीं आए हैं। प्रशासन इसे हटाने की जिद पर अड़ा है, जबकि भक्तों की आस्था और भावनाएं इससे गहराई से जुड़ चुकी हैं। अब पूरा मामला प्रशासन के पाले में है कि वे आगे क्या कदम उठाते हैं।” 2 सितंबर को दी थी नगर निगम ने जमीन उज्जैन नगर निगम ने खड़े हनुमान मंदिर के लिए जगह देने का पत्र 2 सितंबर को जारी किया था। यह पत्र मंदिर के पुजारी की मांग के बाद जारी किया गया था। इसमें लिखा था कि मंदिर प्रबंधन की सहमति के आधार पर वार्ड नंबर 20 में पानी की टंकी हटाकर खाली की गई 20.90 वर्गमीटर जमीन मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए उपलब्ध कराई गई है। पूर्व सीएम लिख चुकी हैं पत्र पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भी मामले में गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि – भोपाल में कमलापति रोड को चौड़ा करते वक्त मस्जिद को नुकसान नहीं पहुंचा था। यही समाधान उज्जैयिनी के खड़े हनुमान मंदिर का हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… उज्जैन के खड़े हनुमान हिल क्यों नहीं रहे उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का पूरा ढांचा तोड़ा जा चुका है, लेकिन अंदर खड़ी प्रतिमा हिली तक नहीं । चार बार कोशिश हुई, हाइड्रोलिक क्रेन तक लगाई गई, फिर भी नाकामी हाथ लगी। अब प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी है। वहीं भक्त इसे चमत्कार मान रहे हैं और मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। आखिर प्रतिमा हट क्यों नहीं रही, जमीन के नीचे है क्या और अब आगे क्या होगा; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में…पूरी खबर पढ़ें

