गोरखपुर में आर्य नगर दक्षिणी स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व का समापन श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने आत्मस्वरूप के चिंतन और संयम को ब्रह्मचर्य धर्म का आधार बताया। भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी पर 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य नाथ जी का मोक्ष कल्याणक भी मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित कर पूजा की। चंपापुर की मंदारगिरि से 601 मुनियों के साथ भगवान के मोक्ष गमन की कथा का स्मरण किया गया। अनंत चतुर्दशी पर दोपहर 3 बजे 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का 108 रजत कलशों से पंचामृत महाअभिषेक किया गया। शाम को आरती के साथ महापर्व का समापन हुआ। सोसाइटी अध्यक्ष पुष्पदंत जैन, मंत्री ज्ञानेंद्र जैन, राय रविंद्र जैन, रोहित जैन, गौरव, प्रखर, वर्धमान, सुधीर, प्रशांत, हर्ष, अभिषेक, अरिहंत, शलभ, राजीव, विनय, रिंकी, अल्पना, शिखा, अंजू श्री, प्रांजल, प्राची, सुचिता, विमला, सोनाली, रुचिता, मोना सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे।

