गोपालगंज के हीरा पाकड़ स्थित शिव मंदिर से सावन के पावन अवसर पर एक कलश यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा के शुभारंभ से पूर्व मंदिर प्रांगण में आचार्यों और पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चारण और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत पूजा-अर्चना के बाद, सिर पर कलश धारण किए लाल और पीले वस्त्रों में सजे हजारों महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मंदिर परिसर से आगे बढ़े। यह यात्रा हीरा पाकड़ शिव मंदिर से शुरू होकर कोटवा और हरपुर गांव के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई गंडक नदी के तट पर पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं द्वारा ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे लगाए गए। स्थानीय निवासियों ने भी जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। कलश में भरा पवित्र जल गंडक नदी के तट पर पहुंचने के बाद, सभी श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच अपने-अपने कलश में पवित्र जल भरा। इसके बाद, जल से भरे कलश लेकर भक्तगण भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए वापस हीरा पाकड़ शिव मंदिर लौट गए। इस यात्रा को अनुशासित और सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों एवं सभी श्रद्धालु भक्तों का सहयोग रहा। गोपालगंज के हीरा पाकड़ स्थित शिव मंदिर से सावन के पावन अवसर पर एक कलश यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा के शुभारंभ से पूर्व मंदिर प्रांगण में आचार्यों और पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चारण और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत पूजा-अर्चना के बाद, सिर पर कलश धारण किए लाल और पीले वस्त्रों में सजे हजारों महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मंदिर परिसर से आगे बढ़े। यह यात्रा हीरा पाकड़ शिव मंदिर से शुरू होकर कोटवा और हरपुर गांव के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई गंडक नदी के तट पर पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं द्वारा ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे लगाए गए। स्थानीय निवासियों ने भी जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। कलश में भरा पवित्र जल गंडक नदी के तट पर पहुंचने के बाद, सभी श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण के बीच अपने-अपने कलश में पवित्र जल भरा। इसके बाद, जल से भरे कलश लेकर भक्तगण भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए वापस हीरा पाकड़ शिव मंदिर लौट गए। इस यात्रा को अनुशासित और सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों एवं सभी श्रद्धालु भक्तों का सहयोग रहा।

